हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार से पहले मृत सुहागिन महिला को सजाया क्यों जाता है? जानें रहस्य

Published by : Neha Kumari Updated At : 09 Jun 2026 11:42 AM

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सुहागिन महिला के अंतिम श्रृंगार का सांकेतिक तस्वीर (एआई)

Hindu Ritual: हिंदू धर्म में सुहागिन महिला की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार से पहले उसका सोलह श्रृंगार करने की परंपरा है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शोक की इस घड़ी में मृत महिला को दुल्हन की तरह क्यों सजाया जाता है? यदि नहीं, तो यह लेख आपके लिए है. आइए जानते हैं सनातन धर्म की इस प्राचीन परंपरा के पीछे छिपे धार्मिक महत्व, मान्यताओं और आध्यात्मिक कारणों के बारे में विस्तार से.

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Hindu Ritual: सनातन धर्म में मृत्यु को जीवन का अंत नहीं, बल्कि आत्मा के एक शरीर से दूसरे शरीर में प्रवेश का माध्यम माना गया है. हिंदू धर्मग्रंथों, विशेषकर गरुड़ पुराण में अंतिम संस्कार से जुड़े कई नियम और परंपराओं का उल्लेख मिलता है. अक्सर देखा जाता है कि जब किसी सुहागिन महिला का निधन होता है, तो उसके अंतिम संस्कार से पहले उसे दुल्हन की तरह सजाया जाता है. उसे लाल या पीली साड़ी पहनाई जाती है, हाथों में चूड़ियां, पैरों में आलता लगाया जाता है और माथे पर सिंदूर लगाकर उसका सोलह श्रृंगार किया जाता है. आखिर शोक की इस घड़ी में मृत महिला को इस प्रकार सजाने के पीछे क्या धार्मिक कारण हैं? आइए जानते हैं.

‘सधवा मृत्यु’ और अखंड सौभाग्य का सम्मान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि किसी महिला की मृत्यु उसके पति के जीवित रहते होती है, तो उसे ‘सधवा मृत्यु’ कहा जाता है. हिंदू धर्म में ऐसी मृत्यु को सौभाग्यशाली माना गया है. मान्यता है कि स्त्री का लाल जोड़ा, सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां और मंगलसूत्र इस बात का प्रतीक होते हैं कि उसने अपना जीवन सुहागिन के रूप में बिताया और अपने वैवाहिक संबंधों का निर्वाह किया. गरुड़ पुराण से जुड़ी लोकमान्यताओं के अनुसार, ऐसी महिला की अंतिम विदाई केवल शोक का अवसर नहीं होती, बल्कि उसके अखंड सौभाग्य और वैवाहिक पहचान के प्रति सम्मान प्रकट करने का भी प्रतीक मानी जाती है.

अगले जन्म में भी सुहागिन रहने की कामना

इससे जुड़ी एक मान्यता यह भी है कि व्यक्ति जिस मानसिक अवस्था और स्वरूप में इस संसार से विदा लेता है, उसका प्रभाव उसकी अगली यात्रा पर पड़ सकता है. इसी कारण सुहागिन महिला का अंतिम संस्कार से पूर्व सोलह श्रृंगार किया जाता है. माना जाता है कि इससे उसकी आत्मा को शांति मिलती है और उसे अगले जन्म में भी सुखी वैवाहिक जीवन तथा सुहाग का सौभाग्य प्राप्त हो.

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नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.

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