Geeta Jayanti 2024: महाभारत का सार गीता के सन्देश में निहित
Published by : Shaurya Punj Updated At : 11 Dec 2024 10:14 AM
Geeta Jayanti 2024
Geeta Jayanti 2024: प्रत्येक वर्ष दिसम्बर के महीने में सम्पूर्ण विश्व में गीता जयन्ती का आयोजन किया जाता है, और इस समय के दौरान विद्वानजन इस महान ग्रन्थ के गहन विषयों पर चर्चा करते हैं.
Geeta Jayanti 2024: भारत के बच्चों ने अपने बचपन में जितनी भी कहानियां सुनी हैं, उनमें से महाभारत की कथा ने उन्हें अनेक सदियों से सबसे अधिक आकर्षित किया है. महाभारत-कथा कथानक, उपकथानकों, पात्रों और छलकपट इत्यादि विविध जटिलताओं से पूर्ण है, तथापि इसका सार गीता के सन्देश में निहित है. श्रीमद्भगवद्गीता स्वयं भगवान् द्वारा अपने भक्त महान् पाण्डव योद्धा अर्जुन को प्रदान किये गए कालातीत, युगान्तरकारी और शाश्वत एवं दिव्य धर्मोपदेश की एक अत्यन्त उत्कृष्ट प्रस्तुति है.
ऐसा सत्य ही कहा गया है कि एक भक्त किसी समय में अपनी आध्यात्मिक यात्रा के जिस चरण में होता है, श्रीमद्भगवद्गीता यात्रा के उस खण्ड पर अपना प्रकाश डालती है.
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गीता जयंती आज
प्रत्येक वर्ष दिसम्बर के महीने में सम्पूर्ण विश्व में गीता जयन्ती मनाई जाती है और विशेष रूप से इस अवधि में ज्ञानीजन इस महान् ग्रन्थ में निहित गहन विषयों पर प्रकाश डालते हैं.
जब कुरुक्षेत्र की रणभूमि में अर्जुन अपने ही “सम्बन्धियों” के विरुद्ध युद्ध करने के लिए इच्छुक नहीं थे तथा विषाद की स्थिति में थे, तो प्रत्युत्तर में भगवान् श्रीकृष्ण ने उन्हें अपने रूपान्तरकारी एवं प्रेरक शब्दों के साथ परम सत्य का उपदेश दिया. श्री श्री परमहंस योगानन्द द्वारा रचित पुस्तक “ईश्वर-अर्जुन संवाद” श्रीमद्भगवद्गीता और उसमें अन्तर्निहित सन्देश की एक अत्यन्त गहन आध्यात्मिक व्याख्या है. योगानन्दजी ने वैश्विक स्तर पर अत्यन्त लोकप्रिय पुस्तक, “योगी कथामृत” तथा अनेक अन्य अत्यधिक प्रेरणादायक आध्यात्मिक पुस्तकों का भी लेखन किया है.
दो खण्डों वाली पुस्तक “ईश्वर-अर्जुन संवाद” में योगानन्दजी ने गीता के 700 श्लोकों के वास्तविक महत्व का विस्तृत विश्लेषण किया है. भगवान् श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए दिव्य उपदेश का सार यह है कि हम सब आत्मा हैं, शरीर नहीं, और अन्ततः हमारे भीतर विद्यमान पाण्डवों को हमारे भीतर विद्यमान कौरवों पर विजय प्राप्त करनी होगी, ताकि आत्मा जन्म और मृत्यु के अन्तहीन चक्रों से मुक्त हो सके.
भगवान् ने जिस प्रकार अपने शिष्य अर्जुन को सर्वोच्च युद्ध लड़ने का परामर्श दिया था, उसी प्रकार प्रत्येक मनुष्य को अपने अहंकार, आदतों, क्रोध, बुराई, वासना और भौतिक इच्छाओं पर विजय पाने का प्रयास करना चाहिए, ताकि वह अन्तिम मोक्ष प्राप्त कर सके. योगानन्दजी बताते हैं कि महाभारत का प्रत्येक पात्र एक अद्वितीय गुण का प्रतीक है, जिसे हमें पराजित करना है अथवा उसका पोषण करना है—यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह गुण अन्दर विद्यमान दुष्ट कौरवों का प्रतिनिधित्व करता है या नेक पाण्डवों का.
योगानन्दजी की “क्रियायोग” शिक्षाओं में गीता का मूल सन्देश निहित है. “क्रियायोग” आत्म-साक्षात्कार का सर्वोच्च मार्ग है. योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया (वाईएसएस) द्वारा प्रकाशित योगानन्दजी की गृह अध्ययन पाठमाला में “क्रियायोग” ध्यान प्रविधियों के विषय में चरणबद्ध निर्देश सम्मिलित हैं. यह योगदा सत्संग पाठमाला सभी सत्यान्वेषियों के लिए उपलब्ध है तथा इस पाठमाला के माध्यम से लाखों भक्तों ने अपनी आध्यात्मिक खोज को तीव्र करने की क्षमता प्राप्त की है.
श्रीमद्भगवद्गीता में ध्यान की इस उत्कृष्ट वैज्ञानिक प्रविधि “क्रियायोग” का दो बार उल्लेख किया गया है. उन्नीसवीं शताब्दी में महावतार बाबाजी की “लीला” के माध्यम से मानवजाति ने पुनः इसकी खोज की. बाबाजी ने अपने शिष्य और योगानन्दजी के परम गुरु लाहिड़ी महाशय को इसका ज्ञान प्रदान किया. लाहिड़ी महाशय ने स्वामी श्रीयुक्तेश्वर गिरि को “क्रियायोग” की दीक्षा प्रदान की और तत्पश्चात उन्होंने अपने प्रमुख शिष्य योगानन्दजी को दीक्षा प्रदान की.
भारत में एक कहावत है, “जहाँ कृष्ण हैं, वहाँ विजय है!” वस्तुतः वे लोग अत्यन्त भाग्यशाली हैं, जिन्होंने अपनी जीवनशैली का निर्माण गीता की शिक्षाओं के अनुरूप किया है. अधिक जानकारी : yssi.org
लेखक : विवेक अत्रे
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शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.
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