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Chaitra Purnima 2020 : सदियों पुरानी परंपरा टूटी, अयोध्‍या की 84 कोसी परिक्रमा स्‍थगित

By ThakurShaktilochan Sandilya
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कोरोना का ग्रहण धार्मिक आयोजनों व अनुष्ठान पर भी लगा है प्रत्येक वर्ष चैत्र पूर्णिमा के दिन मखौड़ा धाम में मनवर के पवित्र जल में स्नान के पश्चात यही से शुरू होने वाली परंपरागत 84 कोसी परिक्रमा इस वर्ष स्थगित कर दी गयी है. यह परिक्रमा आगामी बुधवार पूर्णिमा के दिन से शुरू होनी थी.अयोध्या चित्रकूट प्रयागराज नैमिषारण्य काशी मथुरा बिहार के गया एवं अन्य प्रदेशों के साधु संत व गृहस्थ तथा पड़ोसी देश नेपाल से आने वाला परिक्रमार्थियों का जत्था मखौड़ा धाम के लिए नहीं पहुंच रहा है.यूं तो पूर्णिमा से पहले ही मख धाम साधु संतों से गुलजार होने के साथ पंडाल व विभिन्न दुकानों की सजावट से बृहद मेले का रूप ले लेता है पर इस बार मखौड़ा सूनी है.

क्यों स्थगित कर दी गई परिक्रमा :

अयोध्या धाम के गया मंदिर के संत गयादास ने कहा कि समाज है तो धर्म है जिनका सुरक्षित होना ही सबसे बड़ा धर्म है परिक्रमा स्थगित कर हम साधु संत हवन पूजन से जगत कल्याण के लिए आराध्य से प्रार्थना करेंगे. विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि राष्ट्र धर्म सर्वोपरि है विहिप कार्यकर्ता लॉक डाउन के चलते पीड़ित लोगों की सेवा में लगे हैं. विहिप के संगठन मंत्री सुरेंद्र सिंह ने कहा जब पूरा विश्व महामारी से जूझ रहा है तो राष्ट्र व समाज हित में परिक्रमा स्थगित करना ही उचित है. मखौड़ा धाम श्रीराम मंदिर पश्चिमी के महंत सिद्धू दास ने कहा कि चैत्र पूर्णिमा पर इस बार 21 दिनों तक केवल भजन कीर्तन चलेगा मेला आयोजन भी स्थगित है.

ये है परिक्रमा की महत्ता :

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के अवध धाम की सांस्कृतिक सीमा 84 कोस में फैली है. मान्यता है कि अवध प्रांत के 84 कोस में फैले अयोध्या बस्ती गोंडा आंबेडकर नगर बाराबंकी जिलों के 21 दिन की पैदल यात्रा में करीब 250 धार्मिक स्थलों की परिक्रमा करने से प्राणी 84 लाख यौनियो में जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है. योगिनी नृत्य से देवी को प्रसन्न करने तथा लिट्टी चोखा प्रसाद अमृत तुल्य माना गया है.

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