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हर दिन का अलग रंग, चैत्र नवरात्रि 2025 के शुभ रंग और उनका प्रभाव

Updated at : 29 Mar 2025 10:43 AM (IST)
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Chaitra Navratri 2025 importance of colours (AI Generated Image)

Chaitra Navratri 2025 importance of colours (AI Generated Image)

Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्रि का आरंभ 30 मार्च से होगा, और इसी दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी मानी जाती है. नवरात्रि के नौ दिनों में पूजा के दौरान प्रत्येक दिन विभिन्न रंगों के वस्त्र धारण किए जाते हैं. यह मान्यता है कि यदि आप नवदुर्गा की पूजा के दौरान दिन के अनुसार वस्त्र पहनते हैं, तो आपको मां भगवती का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

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Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्रि का समय आते ही पूरे भारत में भक्ति की एक अद्भुत लहर फैल जाती है. श्रद्धालु देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं, उपवास रखते हैं, भजन-कीर्तन में भाग लेते हैं और शक्ति की आराधना में मग्न हो जाते हैं. यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि आत्मा की शुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है.

चैत्र नवरात्रि क्यों विशेष है?

यह पर्व न केवल वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है, बल्कि हिंदू पंचांग के अनुसार नए वर्ष की शुरुआत का भी संकेत देता है. कई स्थानों पर इसे राम नवमी से भी जोड़ा जाता है, क्योंकि इस समय भगवान राम का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है.

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घटस्थापना से होती है शुरुआत

चैत्र नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है, जिसमें एक मिट्टी के बर्तन में जौ बोए जाते हैं और कलश की स्थापना की जाती है. यह कलश मां दुर्गा का प्रतीक माना जाता है, जिसमें नारियल, आम के पत्ते और पवित्र जल रखा जाता है. क्या आप जानते हैं कि नवरात्रि के प्रत्येक दिन का एक विशेष रंग होता है? इन नौ रंगों का देवी स्वरूपों से गहरा संबंध है. आइए जानते हैं, किस दिन कौन-सा रंग धारण करना शुभ है और प्रत्येक देवी का क्या महत्व है.

नौ दिनों के नौ रंग और उनकी विशेषता

 पहला दिन – 30 मार्च (रंग: नारंगी, देवी: मां शैलपुत्री)

  • महत्व: मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं.
  • रंग का अर्थ: नारंगी रंग ऊर्जा, साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक है.
  • पूजा विधि: इस दिन घटस्थापना की जाती है और मां को सफेद फूल और देसी घी का भोग अर्पित किया जाता है.

दूसरा दिन – 31 मार्च (रंग: सफेद, देवी: मां ब्रह्मचारिणी)

  • महत्व: मां ब्रह्मचारिणी तप और संयम का प्रतीक मानी जाती हैं.
  • रंग का अर्थ: सफेद रंग शुद्धता और शांति का प्रतीक है.
  • पूजा विधि: इस दिन मां को मिश्री, दूध और पंचामृत का भोग अर्पित किया जाता है.

तीसरा दिन – 1 अप्रैल (रंग: लाल, देवी: मां चंद्रघंटा)

  • महत्व: मां चंद्रघंटा शक्ति और साहस का प्रतीक हैं.
  • रंग का अर्थ: लाल रंग साहस, उत्साह और ऊर्जा का प्रतीक है.
  • पूजा विधि: इस दिन मां को केसर मिलाकर दूध और मिठाइयों का भोग अर्पित किया जाता है.

चौथा दिन – 2 अप्रैल (रंग: रॉयल ब्लू, देवी: मां कूष्मांडा)

  • महत्व: मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचनाकार के रूप में पूजा जाता है.
  • रंग का अर्थ: यह रंग स्थिरता, आत्मविश्वास और बुद्धिमत्ता का प्रतीक है.
  • पूजा विधि: मां को मालपुआ और शहद का भोग अर्पित किया जाता है.

पांचवां दिन – 3 अप्रैल (रंग: पीला, देवी: मां स्कंदमाता)

  • महत्व: मां स्कंदमाता प्रेम और वात्सल्य की देवी मानी जाती हैं.
  • रंग का अर्थ: पीला रंग खुशी, समृद्धि और ज्ञान का प्रतीक है.
  • पूजा विधि: मां को केले और गुड़ से बने व्यंजन का भोग अर्पित किया जाता है.

छठा दिन – 4 अप्रैल (रंग: हरा, देवी: मां कात्यायनी)

  • महत्व: मां कात्यायनी ने महिषासुर का संहार किया था.
  • रंग का अर्थ: हरा रंग समृद्धि, उर्वरता और नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है.
  • पूजा विधि: इस दिन मां को शहद और हरी सब्जियों का भोग अर्पित किया जाता है.

सातवां दिन – 5 अप्रैल (रंग: ग्रे, देवी: मां कालरात्रि)

  • महत्व: मां कालरात्रि बुरी शक्तियों का नाश करने वाली देवी मानी जाती हैं.
  • रंग का अर्थ: ग्रे रंग संतुलन, शांति और दृढ़ता का प्रतीक है.
  • पूजा विधि: मां को गुड़ और तिल से बने व्यंजन अर्पित किए जाते हैं.

आठवां दिन – 6 अप्रैल (रंग: बैंगनी, देवी: मां महागौरी)

  • महत्व: मां महागौरी करुणा, सौंदर्य और शुद्धता की प्रतीक हैं.
  • रंग का अर्थ: बैंगनी रंग आध्यात्मिकता और समृद्धि का संकेत देता है.
  • पूजा विधि: मां को नारियल और दूध से बने व्यंजन अर्पित किए जाते हैं.

नवां दिन – 9 अप्रैल (रंग: मोरपंखी हरा, देवी: मां सिद्धिदात्री)

  • महत्व: मां सिद्धिदात्री सिद्धियों और अद्भुत शक्तियों की देवी मानी जाती हैं.
  • रंग का अर्थ: यह रंग प्रेम, दया और आत्मिक संतुलन का प्रतीक है.
  • पूजा विधि: इस दिन मां को तिल, मिठाई और पंचामृत अर्पित किया जाता है.

चैत्र नवरात्रि में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए?

क्या करें?

  • उपवास के दौरान केवल सात्विक आहार का सेवन करें.
  • माता रानी की पूजा में लाल फूल, कपूर और गंगाजल का उपयोग करें.
  • कन्या पूजन करें, जिससे मां दुर्गा की कृपा प्राप्त हो सके.

क्या न करें?

  • नवरात्रि के समय मांसाहार और नशे से दूर रहें.
  • किसी भी जीव को कष्ट न पहुंचाएं, बल्कि दान और पुण्य कार्य करें.
  • अपवित्र वस्त्रों और अशुद्ध विचारों से बचें.

आस्था और शक्ति का पर्व

चैत्र नवरात्रि केवल देवी दुर्गा की पूजा का समय नहीं है, बल्कि यह आत्म-निरीक्षण और शुद्धिकरण का भी एक महत्वपूर्ण अवसर है. नौ दिनों तक उपवास रखने और माता की उपासना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिलती है.

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ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा  
ज्योतिष वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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