प्रदोष व्रत पर बन रहा है त्रिपुष्कर योग का संयोग

Published by :Shaurya Punj
Published at :27 Apr 2026 5:55 PM (IST)
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Bhaum Pradosh Vrat 2026

भौम प्रदोष व्रत 2026

Bhaum Pradosh Vrat 2026: भौम प्रदोष व्रत 28 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा। जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंगल दोष शांति के लिए किए जाने वाले सरल उपाय और धार्मिक महत्व।

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Bhaum Pradosh Vrat 2026: भौम प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है. यह व्रत विशेष रूप से मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष पर रखा जाता है, इसलिए इसे “भौम प्रदोष” कहा जाता है. इस दिन भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा का भी खास महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यता है कि यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी होता है, जिनकी कुंडली में मंगल दोष होता है. इस व्रत के प्रभाव से मंगल ग्रह शांत होकर शुभ फल देने लगता है.

भौम प्रदोष व्रत 2026: तिथि और योग

अप्रैल 2026 में भौम प्रदोष व्रत 28 अप्रैल, मंगलवार को रखा जाएगा. पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 28 अप्रैल को शाम 6:51 बजे से होगा और इसका समापन 29 अप्रैल को शाम 7:51 बजे होगा. इस दिन अभिजीत मुहूर्त और त्रिपुष्कर योग का संयोग भी बन रहा है, जिससे इस व्रत का महत्व और अधिक बढ़ जाता है.

भौम प्रदोष व्रत की पूजा विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद शिव मंदिर जाकर या घर पर ही शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें. हालांकि, इस व्रत की मुख्य पूजा प्रदोष काल यानी शाम के समय की जाती है.

प्रदोष काल से पहले पुनः स्नान कर भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग के सामने घी का दीपक जलाएं. फिर प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें और “ॐ नमः शिवाय” जैसे मंत्रों का जाप करें. शिव चालीसा का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है. पूजा के दौरान भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, मदार, दूध, दही और शहद अर्पित करें. अंत में पहले गणेश जी और फिर भगवान शिव की आरती कर पूजा पूर्ण करें.

मनोकामना पूर्ति के सरल उपाय

भौम प्रदोष व्रत के दिन कुछ सरल उपायों से विशेष लाभ प्राप्त किया जा सकता है. शिवलिंग पर 21 बेलपत्र चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और रुके हुए कार्य पूरे होने लगते हैं. इसके अलावा शिव मंदिर में दीपदान करने से भी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. इस प्रकार भौम प्रदोष व्रत श्रद्धा और विधिपूर्वक करने से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता आती है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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