भानू सप्तमी 2026: सूर्य उपासना का पर्व आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और राहुकाल

Updated at : 07 Feb 2026 8:30 PM (IST)
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Bhanu Saptami 2026

भानू सप्तमी 2026

Bhanu Saptami 2026: भानू सप्तमी आज 8 फरवरी 2026 दिन रविवार को मनाई जाएगी, जो भगवान सूर्यदेव की उपासना और आरोग्य-सुख की प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है. इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत-पूजन करने से रोग, कष्ट और बाधाएं दूर होकर जीवन में ऊर्जा, यश और समृद्धि का संचार होता है.

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Bhanu Saptami 2026: भानू सप्तमी का व्रत सुबह 8 फरवरी 2026 दिन रविवार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा, जो भगवान सूर्य देव की उपासना के लिए विशेष फलदायी माना जाता है. इस दिन व्रत और अर्घ्य देने से रोग, कष्ट और दरिद्रता दूर होती है तथा आरोग्य और तेज की प्राप्ति होती है. आइए जानते है ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु: से भानू सप्तमी और रथ सप्तमी व्रत का शुभ मुर्हूत और पूजा टाइम से संबंधित सबकुछ

भानू सप्तमी या रथ सप्तमी शुभ मुर्हूत

भानू सप्तमी 8 फरवरी 2026 दिन रविवार को है.
भानू सप्तमी तिथि प्रारम्भ – 07 फरवरी 2026 की रात 03 बजकर 38 मिनट पर
भानू सप्तमी तिथि समाप्त – 08 फरवरी 2026 को 05 बजकर 15 मिनट पर
भानू सप्तमी पूजा का शुभ समय – 07 फरवरी को 07 बजकर 53 मिनट से 10 बजकर 05 मिनट तक
भानू सप्तमी व्रत पारण शुभ समय – 08 फरवरी को शाम 05 बजकर 38 मिनट से रात 08 बजकर 51 मिनट तक

8 फरवरी 2026 दिन रविवार का मुहूर्त और पंचांग

सूर्योदय: सुबह 06 बजकर 31 मिनट पर.
कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि: 9 फरवरी सुबह 5 बजकर 18 मिनट तक रहेगी.
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 57 मिनट से सुबह 5 बजकर 44 मिनट तक.
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 25 मिनट तक.
विजय मुहूर्त: दोपहर 2 बजकर 08 मिनट से लेकर दोपहर 02 बजकर 51 मिनट तक.
राहुकाल: शाम 04 बजकर 14 मिनट से 05 बजकर 57 मिनट तक रहेगा.
गुलिक काल: 02 बजकर 50 मिनट से 04 बजकर 14 मिनट तक

भानू सप्तमी और रथ सप्तमी पूजा विधि

सूर्योदय से पहले उठकर जल में तिल या गंगाजल मिलाकर स्नान करें.
स्वच्छ या लाल/पीले वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें.
पूजा स्थान पर सूर्य देव का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें.
तांबे के लोटे में जल, रोली, अक्षत और लाल फूल डालकर तैयार करें
उगते सूर्य को कम से कम तीन बार अर्घ्य अर्पित करें.
लाल चंदन, पुष्प, धूप-दीप और नैवेद्य से विधिपूर्वक पूजन करें.
‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र या आदित्य हृदय स्तोत्र का जप करें.
दिनभर व्रत रखकर सूर्य देव का ध्यान और सत्संकल्प करें.
गेहूं, गुड़, तांबा, लाल वस्त्र या अन्न का दान करें.
शाम को सात्विक भोजन से व्रत पारण कर भगवान सूर्य का आभार व्यक्त करें.

ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु:
ज्योतिष एवं हस्त रेखा विशेषज्ञ | 12 साल का अनुभव
Mo- +91 8620920581

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Radheshyam Kushwaha

लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

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