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Ahoi Ashtami 2021 LIVE Updates: अहोई अष्टमी पर कब निकलेंगे तारे और क्या है चांद देखने का समय

अहोई अष्टमी का यह व्रत संतान की लंबी आयु के लिए किया जाता है. इस दिन माता पार्वती के अहोई स्वरूप की अराधना की जाती है. यहां जानिये तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि से लेकर सब कुछ

By Prabhat khabar Digital
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Ahoi Ashtami Puja Ka Shubh Muhurat, Katha
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Ahoi Ashtami Puja Ka Shubh Muhurat, Katha: अहोई अष्टमी का यह व्रत संतान की लंबी आयु के लिए किया जाता है. इस दिन माता पार्वती के अहोई स्वरूप की अराधना की जाती है. यहां जानिये तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि से लेकर सब कुछ

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अहोई व्रत में जरूर करें ये काम

1. अहोई व्रत रखने वाली महिलाएं संतान की लंबी उम्र और सुखदायी जीवन की कामना करें

2. व्रत से पहले की रात सादा भोजन करें। मांस, लहसुन, प्यार और मदिरा का सेवन न करें

3. अहोई अष्टमी के दिन निर्धन व्यक्ति को दान दें, इससे फल की प्राप्ति होती है

4. अहोई अष्टमी के लिए नए करवे का प्रयोग करें

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यह है व्रत की पूजा विधि

पूजा विधि: अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करके व्रत का संकल्प करती हैं. पूजा के लिए गेरू पर दीवार से अहोई माता का चित्र बनाएं, साथ ही सेही और उनके सात पुत्रों का चित्र भी बनाती हैं. चित्र बनाने की जगह मार्केट से खरीदे गए कैलेंडर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. सामग्री के लिए अहोई माता मूर्ति, माला, दीपक, करवा, अक्षत, पानी का कलश, पूजा रोली, दूब, कलावा, श्रृंगार का सामान, श्रीफल, सात्विक भोजन, बयाना, चावल की कोटरी, सिंघाड़े, मूली, फल, खीर, दूध व भात, वस्त्र, चौदह पूरी और आठ पुए जरूरी होते हैं.

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शुभ मुहूर्त (Ahoi Ashtami Shubh Muhurat)

अहोई अष्टमी का व्रत 28 अक्टूबर 2021 को बृहस्पतिवार के दिन रखा जाएगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त- 05:39 PM से 06:56 PM

अवधि- 01 घण्टा 17 मिनट

गोवर्धन राधा कुण्ड स्नान गुरुवार, अक्टूबर 28, 2021 को

तारों को देखने के लिए सांझ का समय- 06:03 PM

अहोई अष्टमी के दिन चन्द्रोदय समय-11:29 PM

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अहोई माला पहनने का महत्व

अहोई अष्टमी के दिन स्याहु माला को संतान की लंबी आयु की कामना के साथ पहना जाता है. दिवाली तक इसे पहनना आवश्यक माना जाता है. मान्यता है कि इससे पुत्र की आयु लंबी होती है.

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संध्या काल में पढ़ते हैं अहोई कथा

संध्या के समय अहोई माता की कथा सुनने के बाद तारे काे अर्घ्य देकर पूजा पूर्ण होती है. पूजा के बाद महिलाएं चांदी की बनी स्याहु की माला पहनती हैं.

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अहोई पर पूजा का समय

दिन में अहोई अष्टमी कथा सुनने और पूजन के लिए दोपहर 12:30 से 2 बजे के बीच स्थिर लग्न और शुभ चौघड़िया मुहूर्त का समय श्रेष्ठ होगा. संध्याकाल में अहोई माता के पूजन के लिए शाम 6:30 से 8:30 के बीच स्थिर लग्न का शुभ मुहूर्त होगा.

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अहोई व्रत में ना पहनें इन रंगों के कपड़े

अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं को नीले और काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए. जिन महिलाओं ने व्रत रखा हैं वे इन रंगों के कपड़े भूलकर भी धारण न करें.

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अहोई अष्टमी का लाभ

ऐसी मान्यता है कि जिन महिलाओं की संतानें हमेशा बीमार रहती हैं उन्हें यह व्रत जरूर करने चाहिए. संतानें होते ही मर जाती हैं, उन्हें भी यह व्रत अवश्य करना चाहिए. संतानों की अच्छी और लंबी आयु के लिए महिलाओं को यह व्रत करना चाहिए. यह व्रत माता और पिता दोनों करें तो अधिक फल प्राप्त मिलता है.

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अहोई अष्टमी की सामग्री

अहोई माता मूर्ति या पोस्टर, माला, दीपक, करवा, अक्षत, पानी का कलश, पूजा रोली, दूब, कलावा, श्रृंगार के सामान, श्रीफल, सात्विक भोजन, बयाना, चावल की कोटरी, सिंघाड़े, मूली, फल, खीर, दूध व भात, वस्त्र, चौदह पूरी और आठ पुए आदि.

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अहोई अष्टमी मंत्र

अहोई अष्टमी से 45 दिनों तक ‘ॐ पार्वतीप्रियनंदनाय नमः’ का 11 माला जाप करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है. ऐसा करने के पीछे मान्यता है कि संतान कामना की इच्छा रखने वाले लोगों की भी इच्छा पूरी हो जाती है.

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अहोई अष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त

इस साल अहोई अष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त (Ahoi Ashtami Puja Shubh Muhurat) 28 अक्टूबर 2021, गुरुवार को शाम 05:39 से 06:56 तक है. वहीं तारों को देखने का समय शाम को करीब 06:03 बजे है.

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अहोई अष्‍टमी की पूजा विधि

इस दिन अहोई माता (Ahoi Mata) की पूजा की जाती है. इसके लिए दीवार पर या कागज पर गेरू से अहोई माता का चित्र बनाएं और साथ ही सेई और उसके 7 पुत्रों का भी चित्र बनाएं. फिर अपने बच्‍चों के कल्‍याण और उनकी सुख-समृद्धि की कामना करते हुए पूजा शुरू करें. इसके लिए अहोई माता के चित्र के सामने एक चौकी रखकर उस पर जल से भरा कलश रखें. कलश पर स्वास्तिक बनाएं. फिर रोली-चावल से माता की पूजा करें. उन्‍हें मीठे पुए या आटे के हलवे का भोग लगाएं. इसके बाद हाथ में गेंहू के 7 दाने लेकर अहोई माता की कथा सुनें. आखिर में चंद्रमा और तारों को अर्घ्य दें.

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महिलाएं न करें मिट्टी से जुड़ा कोई काम

अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami) के व्रत के दिन महिलाओं को मिट्टी से जुड़ा कोई काम नहीं करना चाहिए. इसके अलावा भूलकर भी खुरपी का इस्तेमाल नहीं करें. अहोई अष्टमी के दिन ऐसा करना अशुभ होता है.

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धारदार चीजों का नहीं करें इस्तेमाल

अहोई अष्टमी के दिन व्रत रखने वाली महिलाएं किसी भी धारदार चीज का इस्तेमाल नहीं करें. कैंची, चाकू, सुई और ब्लेड आदि का इस्तेमाल नहीं करें. धारदार चीजों का इस्तेमाल अशुभ माना जाता है.

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खाना बनाने में नहीं इस्तेमाल करें ये चीजें

अहोई अष्टमी के व्रत के दिन खाना बनाने में प्याज, लहसुन और तेल आदि का इस्तेमाल नहीं करें. जो महिलाएं अहोई अष्टमी का व्रत रखें वो दिन में सोने से परहेज करें. गलती से भी घर में किसी बड़े-बुजुर्ग का अनादर न करें.

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अहोई अष्टमी व्रत मुहूर्त


अष्टमी तिथि प्रारंभ: 28 अक्टूबर 2021 गुरुवार, 12:49PM से
अष्टमी तिथि समाप्ति: 29 अक्टूबर 2021 शुक्रवार, 2:09 PM तक
पूजा मुहूर्त समय: 05:39 PM से 06:56 तक

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इन रंगों के कपड़े नहीं पहनें महिलाएं

वैसे तो हिंदू धर्म की हर पूजा में सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा होती है लेकिन अहोई अष्टमी की पूजा शुरू करने से पहले गणेश जी की पूजा करना का विशेष महत्व है. अहोई अष्टमी पर अर्घ्य के लिए कांसे के लोटे का इस्तेमाल नहीं करें. इसके अलावा महिलाएं गहरे नीले या काले रंग के कपड़े नहीं पहनें.

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व्रत के समय भूलकर भी न करें ये काम, नहीं प्राप्त होगा व्रत का पूरा फल

यदि आपने अहोई अष्टमी का व्रत रखा है तो आपको दिन के समय भूलकर भी सोना नहीं चाहिए, मान्यता है कि इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है.

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अहोई पहनने का सही तरीका

अहोई अष्टमी के दिन अहोई माता की पूजा करें और करवा में जल भरकर रखें. अहोई माता की कथा सुनें.स्याहु माता के लॉकेट की पूजा करें। उसके बाद संतान को पास में बैठाकर माला बनाएं. इस मौले को मौली के धागों की मदद से तैयार करें. माला बनाने के लिए किसी प्रकार की सूई या पिन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. संतान का तिलक करें और माला धारण करें.

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पवित्र माह कार्तिक में आता है यह पवित्र त्‍योहार

कार्तिक मास की काफी महत्ता है और इसकी महिमा का बखान पद्मपुराण में भी किया गया है. कहा जाता है कि इस माह में प्रत्येक दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करने, ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने, गायत्री मंत्र का जप एवं सात्विक भोजन करने से महापाप का भी नाश होता है. इसलिए इस माह में आने वाले सभी व्रत का विशेष फल है.

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अहोई अष्टमी पूजा सामग्री

अहोई माता मूर्ति, माला, दीपक, करवा, अक्षत, पानी का कलश, पूजा रोली, दूब, कलावा, श्रृंगार का सामान, श्रीफल, सात्विक भोजन, बयाना, चावल की कोटरी, सिंघाड़े, मूली, फल, खीर, दूध व भात, वस्त्र, चौदह पूरी और आठ पुए आदि.

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कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है अहोई अष्टमी

हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन महिलाएं संतान प्राप्ति और अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए निर्जल उपवास करती हैं. फिर शाम को तारों का दर्शन करने के बाद उन्हें अर्घ्य देकर व्रत पारण करती हैं.

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अहोई अष्टमी पर बन रहा है गुरु-पुष्य योग (Ahoi Ashtami Guru Pushya Yog)

ज्योतिषियों के अनुसार अहोई अष्टमी व्रत (Ahoi Ashtami Vrat) के दिन गुरू पुष्य योग (Guru Pushya Yog) की उपस्थिति होने के कारण अहोई अष्टमी व्रत का महत्व कई गुना बढ़ जाता है. इस बार अहोई अष्टमी पर यही योग बना रहा है, तो माताएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए ये व्रत अवश्य रखें. शाम के समय ही तारों को देखने के बाद माताएं उनकी पूजा करती हैं और अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण करती हैं.

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अहोई अष्टमी शुभ मुहूर्त (Ahoi Ashtami Shubh Muhurat)

अहोई अष्टमी का व्रत 28 अक्टूबर 2021 को बृहस्पतिवार के दिन रखा जाएगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त- 05:39 PM से 06:56 PM
अवधि- 01 घण्टा 17 मिनट
गोवर्धन राधा कुण्ड स्नान गुरुवार, अक्टूबर 28, 2021 को
तारों को देखने के लिए सांझ का समय- 06:03 PM
अहोई अष्टमी के दिन चन्द्रोदय समय-11:29 PM

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अहोई से लेकर दिवाली तक पहनते हैं स्याहु की माला

अहोई अष्टमी की पूजा के लिए चांदी की अहोई बनाई जाती है, जिसे स्याहु भी कहते हैं. पूजा के समय इस माला कि रोली, अक्षत से इसकी पूजा की जाती है, इसके बाद एक कलावा लेकर उसमे स्याहु का लॉकेट और चांदी के दाने डालकर माला बनाई जाती है. व्रत करने वाली माताएं इस माला को अपने गले में अहोई से लेकर दिवाली तक धारण करती हैं.

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अहोई पहनने का सही तरीका

अहोई अष्टमी के दिन अहोई माता की पूजा करें और करवा में जल भरकर रखें. अहोई माता की कथा सुनें. स्याहु माता के लॉकेट की पूजा करें, उसके बाद संतान को पास में बैठाकर माला बनाएं. इस मौले को मौली के धागों की मदद से तैयार करें. माला बनाने के लिए किसी प्रकार की सूई या पिन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. संतान का तिलक करें और माला धारण करें.

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अहोई अष्टमी पर स्याहु की माला पहनने का महत्व

अहोई अष्टमी की पूजा के लिए चांदी की अहोई बनाई जाती है, जिसे स्याहु भी कहते हैं. पूजा के समय इस माला कि रोली, अक्षत से इसकी पूजा की जाती है, इसके बाद एक कलावा लेकर उसमे स्याहु का लॉकेट और चांदी के दाने डालकर माला बनाई जाती है. व्रत करने वाली माताएं इस माला को अपने गले में अहोई से लेकर दिवाली तक धारण करती हैं.

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पूजा का मुहूर्त शाम को 01 घंटे 17 मिनट का है

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को संतान के सुखी और समृद्धि जीवन के लिए अहोई अष्टमी को व्रत रखा जाता है. 28 अक्तूबर को शाम 5:39 से शाम 6:56 बजे तक अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त है. अहोई अष्टमी के दिन अहोई माता की पूजा का मुहूर्त शाम को 01 घंटे 17 मिनट का है. इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत कर अहोई माता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं. इस व्रत में शाम को तारों को अर्घ्य दिया जाता है.

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अहोई अष्टमी पर बन रहे तीन शुभ योग

इस साल अहोई अष्टमी पर 3 विशेष योग बन रहे हैं. इसे अत्यधिक शुभ माना जा रहा है. इसमें सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और गुरु पुष्य योग एक साथ बन रहे हैं. इन योगों में पुष्य नक्षत्र को सभी नक्षत्रों का राजा माना जाता है. बृहस्पतिवार को गुरु पुष्य नक्षत्र योग होने से अत्यधिक लाभ मिलता है. ऐसे में इस बार अहोई व्रत करने वाली माताओं को कई गुना ज्या फल मिलेगा.

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अहोई अष्टमी शुभ मुहूर्त

इस साल अष्टमी तिथि 28 अक्टूबर की दोपहर 12 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर 29 अक्टूबर की दोपहर 02 बजकर 09 मिनट तक रहेगी. इस दिन पूजन मुहूर्त 28 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 39 मिनट से शाम 06 बजकर 56 मिनट तक है.

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अहोई अष्टमी महत्व

हिंदू धर्म में अहोई अष्टमी का विशेष महत्व है। यह व्रत संतान की सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है. कहते हैं कि अहोई अष्टमी का व्रत कठिन व्रतों में से एक है. इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं. मान्यता है कि अहोई माता की विधि-विधान से पूजन करने से संतान को लंबी आयु प्राप्त होती है. इसके साथ ही संतान की कामना करने वाले दंपति के घर में खुशखबरी आती है.

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Ahoi Ashtami 2021: व्रत कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार दिवाली के मौके पर घर को लीपने के लिए एक साहुकार की सात बहुएं मिट्टी लाने जंगल में गई तो उनकी ननद भी उनके साथ चली आई. साहुकार की बेटी जिस जगह मिट्टी खोद रही थी. उसी जगह स्याहु अपने बच्चों के साथ रहती थी. मिट्टी खोदते वक्त लड़की की खुरपी से स्याहू का एक बच्चा मर गया. इसलिए जब भी साहुकार की बेटी को बच्चे होते थे, वो सात दिन के भीतर मर जाते थे. एक-एक कर सात बच्चों की मौत के बाद लड़की ने जब पंडित को बुलाया और इसका कारण पूछा तो उसे पता चला कि अनजाने में उससे जो पाप हुआ, उसका ये नतीजा है. पंडित ने लड़की से अहोई माता की पूजा करने को कहा, इसके बाद कार्तिक कृष्ण की अष्टमी तिथि के दिन उसने माता का व्रत रखा और पूजा की. बाद में माता अहोई ने सभी मृत संतानों को जीवित कर दिया. इस तरह से संतान की लंबी आयु और प्राप्ति के लिए इस व्रत को किया जाने लगा.

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अहोई अष्टमी पूजा का मुहूर्त

अहोई अष्टमी का व्रत 28 अक्टूबर 2021 को बृहस्पतिवार के दिन किया जाएगा

अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त – 05:39 PM से 06:56 PM

अवधि – 01 घण्टा 17 मिनट

गोवर्धन राधा कुण्ड स्नान बृहस्पतिवार, अक्टूबर 28, 2021 को

तारों को देखने के लिए सांझ का समय – 06:03 PM

अहोई अष्टमी के दिन चन्द्रोदय समय – 11:29 PM

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अहोई अष्टमी का महत्व (Ahoi Ashtami Importance)

अहोई अष्टमी व्रत माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए रखती हैं. इस व्रत को बहुत श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाता है। इस दिन भगवान गणेश और कार्तिकेय की माता पार्वती की उपासना की जाती है. कहते हैं कि जो माताएं इस दिन व्रत रखती है उनकी संतानों की दीर्घायु होती है. उन्हें यश, कीर्ति, वैभव, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है. बताया जाता है कि जिनकी माताएं इस दिन व्रत रखती हैं उनके बच्चों की रक्षा स्वयं माता पार्वती करती हैं.

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अहोई अष्टमी व्रत विधि (Ahoi Ashtami Vrat Vidhi)

अहोई अष्टमी के दिन माताएं सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें

फिर अहोई अष्टमी व्रत रखने का संकल्प लें

अहोई माता की पूजा के लिए दीवार पर गेरू से माता अहोई का चित्र बनाएं

साथ ही सेह और उनके सात पुत्रों का चित्र बनाएं। आप चाहें तो उनका रेडिमेड चित्र या प्रतिमा भी लगा सकते हैं

अब इस पर जल से भरा हुआ कलश रखें

रोली-चावल से अहोई माता की पूजा करें

अब अहोई माता को मीठे पुए या आटे के हलवे का भोग लगाएं

कलश पर स्वास्तिक बनाकर हाथ में गेंहू के सात दाने लें

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अहोई अष्टमी 2021 पूजा मुहूर्त

अहोई अष्टमी के दिन अहोई माता की पूजा का मुहूर्त शाम को 01 घंटे 17 मिनट का है. 28 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 39 मिनट से शाम 06 बजकर 56 मिनट तक अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त है.

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कब है अहोई अष्टमी का व्रत

अहोई अष्टमी तिथि गुरुवार, 28 अक्टूबर 2021 दोपहर 12 बजकर 51 मिनट से प्रारंभ होकर शुक्रवार, 29 अक्टूबर सुबह 02 बजकर 10 मिनट तक रहेगी.

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