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Jharkhand GDP : वित्त वर्ष 2020-21 में 1.6 फीसदी तक गिर सकता है झारखंड का सकल घरेलू उत्पाद

Updated at : 29 Jun 2020 9:35 PM (IST)
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Jharkhand GDP : वित्त वर्ष 2020-21 में 1.6 फीसदी तक गिर सकता है झारखंड का सकल घरेलू उत्पाद

Jharkhand GDP, Jharkhand News, Economical Impact of Lockdown : रांची/मुंबई : वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान झारखंड का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी ) में 1.6 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है. इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की रिपोर्ट में यह बात कही गयी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से घोषित लॉकडाउन के दौरान जिन राज्यों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा, उसमें झारखंड भी शामिल है.

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रांची/मुंबई : वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान झारखंड का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी ) में 1.6 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है. इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की रिपोर्ट में यह बात कही गयी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से घोषित लॉकडाउन के दौरान जिन राज्यों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा, उसमें झारखंड भी शामिल है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना वायरस महामारी के प्रसार को रोकने के लिए लगाये गये लॉकडाउन का असर चालू वित्त वर्ष के दौरान राज्यों के सकल घरेलू उत्पाद में दिख सकता है. इस दौरान आर्थिक गतिविधियों के थमने की वजह से राज्यों के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में 14.3 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है.

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की सोमवार को जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि असम, गोवा, गुजरात और सिक्किम जैसे राज्यों में जीएसडीपी की गिरावट दहाई अंक में रह सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है, ‘हमारा मानना है कि वित्त वर्ष 2020- 21 में राज्यों के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में गिरावट रहेगी. यह गिरावट 1.4 प्रतिशत से लेकर 14.3 प्रतिशत के दायरे में रह सकती है.’

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इसमें कहा गया है कि झारखंड, कर्नाटक,तमिलनाडु, केरल और ओड़िशा ये पांच राज्य ऐसे हैं, जहां सकल घरेलू उत्पाद पर लॉकडाउन का सबसे गहरा असर दिख सकता है. वहीं मध्य प्रदेश, पंजाब, बिहार, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश पांच प्रमुख राज्य ऐसे होंगे, जहां इसका असर सबसे कम रह सकता है. कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए देश में 25 मार्च, 2020 को लॉकडाउन (बंद) लागू किया गया था.

हालांकि, इस दौरान आवश्यक सेवाओं से जुड़ी गतिविधियों को जारी रखा गया था. रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉकडाउन का असर विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग रहा. कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र में इसका असर अलग-अलग रहा.

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘लॉकडाउन का कृषि क्षेत्र के काम पर असर कम रहा है. इसलिए जिन राज्यों के जीडीपी में कृषि क्षेत्र का योगदान अधिक है, उन पर कृषि क्षेत्र का कम योगदान रखने वाले राज्यों के मुकाबले कम प्रभाव पड़ा है.’ इसी प्रकार सेवा क्षेत्र के तहत आने वाले कुछ क्षेत्रों पर भी लॉकडाउन का असर कम रहा है.

बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं, सूचना प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी सेवाओं पर यह असर कम रहा है. इन क्षेत्रों ने अपने कामकाज को स्थिति के अनुरूप ढाल दिया था और बड़े पैमाने पर कर्मचारी घर पर रहकर ही परिचालन को संभाले हुए थे.

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रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन राज्यों में इन सेवाओं का हिस्सा अधिक है, उन राज्यों में लॉकडाउन का असर उन राज्यों के मुकाबले कम रहा है, जिन राज्यों की जीडीपी में इन सेवाओं का हिस्सा कम है. इसके मुताबिक, लॉकडाउन की वजह से सभी राज्यों के राजस्व प्रदर्शन पर बुरा असर होगा.

जिन राज्यों के कुल राजस्व में राज्य के अपने कर राजस्व का हिस्सा अधिक होगा, उन पर इसका ज्यादा असर दिखेगा. ऐसे राज्यों के वर्तमान मूल्य पर जीएसडीपी के आंकड़ों और बजट के अनुमानों के बीच अंतर अधिक होगा. इस लिहाज से महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना और हरियाणा अधिक संवेदनशील राज्य हो सकते हैं.

इन राज्यों में वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान खुद के कर राजस्व का बजट अनुमान उनके अनुमानित राजस्व के 57 से लेकर 64 प्रतिशत के दायरे में है. इन राज्यों के जीएसडीपी के आंकड़े उनके बजट अनुमान से 15 से 24 प्रतिशत तक कम हो सकते हैं.

Posted By : Mithilesh Jha

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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