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चंद्रयान-3 : मेकॉन के 50 इंजीनियर्स की टीम ने इसरो के लिए डिजाइन किया था लांचिंग पैड

Updated at : 23 Aug 2023 7:11 PM (IST)
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चंद्रयान-3 : मेकॉन के 50 इंजीनियर्स की टीम ने इसरो के लिए डिजाइन किया था लांचिंग पैड

चंद्रयान-3 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्व उतर चुका है. इसरो को चांद तक पहुंचाने में झारखंड की दो संस्थाओं का बड़ा योगदान है. मेकॉन व एचईसी. मेकॉन के 50 इंजीनियर्स की टीम ने लांच पैड को डिजाइन किया, जिससे इसरो के छोटे-बड़े रॉकेट लांच किये जाते हैं. इसके अधिकतर हिस्से का निर्माण एचईसी में हुआ था.

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भारत का मिशन चंद्रयान-3 सफल हो गया है. चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग चांद की सतह पर हो चुकी है. इसमें झारखंड का बहुत बड़ा योगदान है. राजधानी रांची की दो संस्थाओं मेकॉन और एचईसी ने लांचिंग पैड को डिजाइन किया. उसके कई महत्वपूर्ण उपकरणों का निर्माण भी एचईसी में हुआ.यह तीसरा मौका था, जब भारत की अंतरिक्ष एजेंसी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधन संगठन (इसरो) ने चंद्रयान का प्रक्षेपण किया है. इसरो के लिए सबसे बड़े लांचिंग पैड जीएसएलवी को मेकॉन ने तैयार किया. इसके उपकरण झारखंड की राजधानी रांची और टाटा में भी बने हैं. मेकॉन ने इसके कॉन्सेप्ट से लेकर कमिशनिंग तक का काम किया. 350 करोड़ रुपये के बजट वाले जीएसएलवी का अनावरण देश के जाने-माने वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने किया था.

एसआर मजुमदार ने किया था टीम का नेतृत्व

मेकॉन के इंजीनियर और इस प्रोजेक्ट का हिस्सा रहे निशीथ कुमार ने ‘प्रभात खबर’ (prabhatkhabar.com) को बताया कि वर्ष 1999 में मेकॉन को इसरो के लिए रॉकेट प्रक्षेपण हेतु लांचिंग पैड बनाने का कांट्रैक्ट मिला. निशीथ कुमार ने बताया कि यह पहला मौका था, जब भारत में रॉकेट को लांच करने के लिए लांचिंग पैड का निर्माण हुआ. इसके पहले भारत के पास रॉकेट के प्रक्षेपण के लिए लांचिंग पैड बनाने का कोई अनुभव नहीं था. हमारे पास पुराना कोई रेफरेंस भी नहीं था. इसरो ने अपनी जरूरतें बतायीं और मेकॉन के एसआर मजुमदार के नेतृत्व में मेकॉन के 50 इंजीनियर्स की कोर टीम ने काम शुरू किया और इस प्रोजेक्ट को सफल बनाया.

कॉन्सेप्ट से कमिशनिंग तक का काम मेकॉन ने किया

नीशीथ कुमार ने बताया कि कॉन्सेप्ट से कमिशनिंग तक का काम मेकॉन ने किया. सप्लाई से मैन्युफैक्चरिंग और टेस्टिंग से कमिशनिंग, हर काम मेकॉन ने किया. उन्होंने बताया कि जीएसएलवी से बड़े से बड़े रॉकेट को लांच किया जा सकता है. हालांकि, इसरो अभी इसका इस्तेमाल सिर्फ बड़े रॉकेट्स लांच करने में करता है. उन्होंने बताया कि लांचिंग पैड के लिए कई तरह के उपकरण बनाने थे. मेकॉन ने झारखंड की दो कंपनियों के अलावा देश के अलग-अलग हिस्से की कंपनियों से भी उपकरण बनवाये. कुछ चीजें विदेशों से भी मंगायी गयी.

टाटा को भी मेकॉन ने दिया था उपकरण बनाने का काम

मेकॉन के इंजीनियर श्री कुमार ने बताया कि मेकेनिकल, गैस्ट्रल, सिविल और टेक्निकल समेत कई काम थे. उन्होंने बताया कि देश की प्रतिष्ठित कंपनी टाटा ने जमशेदपुर की इकाई में कुछ उपकरणों का निर्माण किया था. रांची की एचईसी ने भी कई उपकरणों का निर्माण किया और असेंबलिंग का भी काम किया. चेन्नई की कंपनी केटीवी, मुंबई की कंपनी गोदरेज के अलावा भी कई कंपनियों ने लांचिंग पैड के लिए उपकरण बनाये थे. कुछ इक्विपमेंट्स रूस और यूरोप से भी मंगवाये गये थे.

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पहली बार भारत ने रॉकेट लांचिंग के लिए पैड बनाया

नीशीथ कुमार ने बताया कि भारत को लांच पैड बनाने का कोई अनुभव नहीं था. इसलिए यह थोड़ा मुश्किल काम था. लेकिन, मेकॉन के इंजीनियर्स ने इस चैलेंज को स्वीकार किया और इसरो की कमेटी और कई आईआईटी के प्रोफेसर्स के साथ मिलकर अंतरिक्ष एजेंसी की जरूरत के मुताबिक लांचिंग पैड तैयार करके दिया. उन्होंने बताया कि हर डिजाइन को तीन स्तर पर अप्रूवल मिलने के बाद ही उसे फाइनल किया जाता था.

इसरो की कमेटी की देखरेख में चला था काम

इसके लिए इसरो की एक कमेटी थी. इसमें इसरो के वैज्ञानिकों के अलावा अलग-अलग आईआईटी के प्रोफेसर हुआ करते थे. वे हमें अपनी जरूरतें बताते थे. हम उसका डिजाइन तैयार करते थे. इस डिजाइन को उनके सामने रखते थे. अगर उनके हिसाब से डिजाइन होता, तो उसको अप्रूव कर दिया जाता था. अगर उन्हें इसमें किसी बदलाव की जरूरत होती, तो वे हमें बताते थे, फिर मेकॉन के इंजीनियर्स उनकी जरूरत के हासिब से उसमें तब्दीली (मॉडिफिकेशन) करते थे. इस तरह क्वालिटी पर बहुत जोर दिया जाता था.

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एचइसी ने कई महत्वपूर्ण उपकरण बनाकर दिये

बता दें कि रांची स्थित हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन (एचइसी), जिसे मदर ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज कहा जाता है, ने जीएसएलवी के लिए हॉरिजोंटल स्लाइडिंग डोर, फोल्डिंग कम वर्टिकल रिपोजिशनेबल प्लैटफॉर्म (एफसीवीआरपी), मोबाइल लांचिंग पेडेस्टल और 10 टन का हैमर हेड टावर क्रेन बनाया है. इसरो अपने सभी बड़े रॉकेट का प्रक्षेपण इसी मोबाइल लांचिंग पेडेस्टल से करता है. बता दें कि 10 टन का हैमर हेड टावर क्रेन रॉकेट के बैलेंस को बनाये रखता है.

एचइसी के कर्मचारी रांची में मना रहे हैं जश्न

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि एचइसी ने देश के भारी उद्योगों के लिए भी बहुत से उपकरण बनाये हैं. यह देश की एकमात्र मदर ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज है. एचइसी मुख्यालय रांची में यहां के कर्मचारी चंद्रयान-3 के प्रक्षेपण का जश्न मना रहे हैं. केक कटिंग की भी व्यवस्था की गयी है. कर्मचारियों का कहना है कि भले एचइसी आज खस्ताहाल स्थिति में हो, लेकिन इसका इतिहास गौरवशाली रहा है. चंद्रयान-3 के लिए हमने अलग से कोई काम नहीं किया हो, लेकिन इसका प्रक्षेपण हमारे बनाये लांचिंग पैड से ही हो रहा है. इसलिए यह हमारे लिए भी गर्व की बात है.

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खूंटी के सोहन यादव भी हैं चंद्रयान-3 का हिस्सा

बता दें कि झारखंड के खूंटी जिले के तोरपा प्रखंड में रहने वाले सोहन यादव भी मिशन चंद्रयान-3 का हिस्सा थे. तोरपा प्रखंड के तपकरा ग्राम के सोहन यादव ऑर्बिटर इंटीग्रेशन और टेस्टिंग टीम का हिस्सा बने. सोहन यादव इसरो में काम कर रहे हैं और मिशन गगनयान से भी जुड़े थे. 15 दिन उन्होंने अपनी मां को फोन किया था. बताया था कि अब 15 दिन बाद चंद्रयान-3 के प्रक्षेपण के बाद ही बात होगी. सोहन की मां और बड़े भाई मिशन चंद्रयान-3 की सफलता की प्रार्थना करने वैष्णोदेवी गये हुए हैं.

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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