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Happy Chhath Puja: खरना पूजा के साथ 36 घंटे का निर्जला छठ व्रत शुरू, कल डूबते सूर्य को दिया जायेगा अर्घ्य

Updated at : 29 Oct 2022 6:16 PM (IST)
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Happy Chhath Puja: खरना पूजा के साथ 36 घंटे का निर्जला छठ व्रत शुरू, कल डूबते सूर्य को दिया जायेगा अर्घ्य

Happy Chhath Puja: इसी के साथ छठव्रतियों का 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो गया. रविवार को सूर्योदय के बाद भगवान की पूजा-अर्चना करके लोकगीत के बीच प्रसाद बनाने की तैयारी शुरू हो जायेगी. इस बार रविवार को छठ पड़ रहा है, इसलिए इसकी महत्ता और बढ़ गयी है.

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Chhath Mahaparv 2022: खरना के साथ 36 घंटे का निर्जला छठ व्रत शुरू हो गया है. छठ महापर्व के तीसरे दिन रविवार (30 अक्टूबर 2022) को छठव्रती भगवान भास्कर को अर्घ्य देंगे. शनिवार को दिन भर उपवास रखने के बाद शाम में खरना का अनुष्ठान किया गया. व्रती ने भगवान की पूजा-अर्चना कर सभी के लिए मंगल कामना की और प्रसाद ग्रहण किया. इसके बाद प्रसाद का वितरण किया गयी.

छठ महापर्व पर बन रहा है विशेष संयोग

इसी के साथ छठव्रतियों का 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो गया. रविवार को सूर्योदय के बाद भगवान की पूजा-अर्चना करके लोकगीत के बीच प्रसाद बनाने की तैयारी शुरू हो जायेगी. इस बार रविवार को छठ पड़ रहा है, इसलिए इसकी महत्ता और बढ़ गयी है. रविवार को भगवान सूर्य की पूजा का दिन माना गया है. वर्षों बाद ऐसा संयोग है कि छठ महापर्व रविवार को पड़ रहा है.

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छठव्रती तैयार करेंगी प्रसाद

व्रती सूर्य भगवान को अर्घ्य देने के लिए रविवार सुबह से ही प्रसाद बनाने की तैयारी शुरू कर देंगी. इसके लिए ठेकुआ, चावल के लड्डू सहित कई प्रसाद बनाया जाता है. प्रसाद बन जाने के बाद छठ घाट जाने के लिए डाला सजाया जाता है. डाला में सभी पूजन सामग्री डाली जायेगी. दोपहर में साढ़े तीन बजे से ही छठव्रतियों का छठ घाट की ओर जाने का सिलसिला शुरू हो जायेगा.

पैदल और वाहन से घाट तक जाते हैं छठव्रती

राजधानी रांची में बहुत से छठव्रती पैदल ही छठ घाट जाते हैं. वहीं, बहुत से ऐसे भी व्रती हैं, जो छोेटे-बड़े वाहनों से दूर-दराज के नदी-तालाबों के किनारे अर्घ्य देने के लिए जाते हैं. कई लोग गाजे-बाजे के साथ भी जाते हैं. कल यानी रविवार (30 अक्टूबर 2022) शाम को 5 बजकर 12 मिनट पर अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया जायेगा.

घाट पर स्नान करने के बाद दिया जायेगा संध्याकालीन अर्घ्य

अर्घ्य देने से पहले छठ घाट पर ही व्रती स्नान-ध्यान करेंगे. जैसे ही सूर्य देवता अस्त होने लगेंगे, व्रती उन्हें अर्घ्य देना शुरू कर देंगे. घाट पर अर्घ्य देने के बाद भगवान की आरती की जायेगी. भगवान को नमन करके तमाम पूजन सामग्री को समेटकर श्रद्धालु घाट से अपने-अपने घरों को लौट जायेंगे.

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सुबह फिर घाट पर जायेंगे छठव्रती

घर पहुंचने के बाद अगले दिन सोमवार यानी 31 अक्टूबर 2022 को सुबह में उदयाचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी शुरू हो जायेगी. सोमवार को सुबह स्नान ध्यान कर पुनः छठ घाट जायेंगे. घाट पर स्नान करने के पश्चात भगवान भास्कर के उदय का इंतजार करेंगे. सूर्यदेव के उगते ही छठव्रती उन्हें अर्घ्य देना शुरू कर देंगे. बारी-बारी से परिवार के अन्य लोग भी अर्घ्य देंगे.

लोगों को टीका लगाकर प्रसाद वितरण करेंगे छठव्रती

व्रती के साथ घाट तक जाने वाले सभी लोग बारी-बारी से अर्घ्य देंगे. इसके बाद व्रती भगवान को नमन करेंगे और परिवार के सभी लोगों के साथ मिलकर हवन करेंगी. सभी लोगों को टीका लगाकर प्रसाद का वितरण भी करेंगी. इसी के साथ चार दिवसीय छठ महापर्व का समापन हो जायेगा. घाट से लौटते समय रास्ते में पड़ने वाले तमाम मंदिरों में व्रती पूजा करेंगी और घर पहुंचकर पारण करेंगी.

https://www.youtube.com/watch?v=sVymjDpPrwk

कई धार्मिक संस्थाओं की ओर से शिविर लगाया जायेगा

झारखंड की राजधानी रांची समेत सभी जिलों में व्रतधारियों के स्वागत के लिए कई धार्मिक संस्थाओं और स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से शिविर लगाये जाते हैं. इसमें समाज के गणमान्य लोग शामिल होते हैं. शिविर लगाकर छठ पूजा करने वाले लोगों को पूजन सामग्री उपलब्ध करायी जाती है.

रिपोर्ट- राजकुमार, रांची

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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