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झारखंड में सिर्फ 1.1 प्रतिशत घरों में होता है बोतलबंद पानी का इस्तेमाल, 6.8% घरों में उबाल कर पीते हैं पानी

Updated at : 30 Nov 2019 12:33 AM (IST)
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झारखंड में सिर्फ 1.1 प्रतिशत घरों में होता है बोतलबंद पानी का इस्तेमाल, 6.8% घरों में उबाल कर पीते हैं पानी

सुनील चौधरी रांची : झारखंड में बोतलबंद पानी का इस्तेमाल अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम होता है. यहां केवल 1.1 प्रतिशत घरों में ही बोतल बंद पानी का इस्तेमाल होता है. देश में सबसे अधिक बोतलबंद पानी का इस्तेमाल दमन और दीव में होता है. यहां 38.8 प्रतिशत घरों बोतल बंद पानी का […]

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सुनील चौधरी
रांची : झारखंड में बोतलबंद पानी का इस्तेमाल अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम होता है. यहां केवल 1.1 प्रतिशत घरों में ही बोतल बंद पानी का इस्तेमाल होता है.
देश में सबसे अधिक बोतलबंद पानी का इस्तेमाल दमन और दीव में होता है. यहां 38.8 प्रतिशत घरों बोतल बंद पानी का इस्तेमाल करते हैं. यह रिपोर्ट नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन (एनएसएसओ) की है. जुलाई 2018 से दिसंबर 2018 के बीच यह सर्वे हुआ था, जिसकी रिपोर्ट नवंबर 2019 में जारी की गयी है.
रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश में 29.8 और तेलंगना में 28.7 प्रतिशत घरों में बोतलबंद पानी का इस्तेमाल किया जाता है. वहीं मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, ओड़िशा, उत्तराखंड व लक्षद्वीप में बोतलबंद पानी का इस्तेमाल करने वाले लोगों का प्रतिशत शून्य है. झारखंड के शहरी क्षेत्र में 3.9 प्रतिशत घरों में बोतलबंद पानी का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में सिर्फ 0.2 प्रतिशत घरों में बोतलबंद पानी का इस्तेमाल होता है.
73.4 प्रतिशत घरों में बिना किसी ट्रीटमेंट के पानी पीते हैं लोग : रिपोर्ट में पानी के ट्रीटमेंट के तरीकों का भी अध्ययन किया गया है. यानी कि लोग ट्रीटमेंट करके या सामान्य पानी पीते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड के 4.1 प्रतिशत घरों में इलेक्ट्रिक वाटर प्यूरीफायर लगा हुआ है. यानी शुद्ध जल के लिए लोग वाटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करते हैं, जबकि 6.8 प्रतिशत घरों में लोग पानी को उबाल कर पीते हैं.
राज्य के 73.4 प्रतिशत घरों में लोग बिना किसी ट्रीटमेंट के सामान्य पानी पीते हैं. 0.2 प्रतिशत घरों में एलम ट्रीटेड वाटर पीते हैं. 1.4 प्रतिशत घरों में ब्लीच या क्लोराइड टेबलेट से ट्रीटेड वाटर का इस्तेमाल होता है. 3.9 प्रतिशत घरों में बिना बिजली के प्यूरीफायर का इस्तेमाल होता है. 10.3 प्रतिशत घरों में लोग कपड़े से पानी छान कर पीते हैं.
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