World Book Fair 2024: मेले में साम्य के नंद चतुर्वेदी विशेषांक का लोकार्पण

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World Book Fair 2024: मेले में साम्य के नंद चतुर्वेदी विशेषांक का लोकार्पण

world Book Fair 2024 : नंद बाबू की कविता ‘शरीर’ को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि देह के लिए जैसा राग और स्वीकृति नंद बाबू के मन में है वह भी कम कवियों में देखने को मिलता है.

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World Book Fair 2024: नंद चतुर्वेदी बड़े अंत:करण वाले मनुष्य और कवि थे. वे उन कवियों में से थे जो सबको साथ लेकर चले. अच्छा है कि अब हिंदी कविता आलोचना की दृष्टि बदली है और हमारी भाषा के बड़े कवि के रूप में उनकी प्रतिष्ठा हो रही है. सुपरिचित आलोचक ओम निश्चल ने कवि नंद चतुर्वेदी की जन्म शताब्दी के अवसर पर विख्यात लघु पत्रिका ‘साम्य’ का लोकार्पण करते हुए कहा कि नंद बाबू केवल कवि ही नहीं कविता के सक्रिय कार्यकर्ता भी थे.

सादगी भरे शिल्प में भी विडंबनाओं को देखा


विश्व पुस्तक मेले में गार्गी प्रकाशन के स्टाल पर आयोजित लोकार्पण में निश्चल ने कहा कि अपने सादगी भरे शिल्प में भी नंद बाबू ने हमारी विडंबनाओं को देखा -परखा. उद्भावना के संपादक अजय कुमार ने कहा कि विस्मृति के इस दौर में साम्य का यह अंक सचमुच उत्साहवर्धक घटना है. उन्होंने हाल में आए उद्भावना के अंक में प्रकाशित नंद चतुर्वेदी की कविताओं का जिक्र भी किया. जाने माने आलोचक प्रो हितेंद्र पटेल ने नंद चतुर्वेदी की कविताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह बाजार का दौर है और इस दौर में हमें अपनी स्मृतियों को बचाए रखने की चुनौती है.

नॉस्टेल्जिया का रचनात्मक उपयोग नंद बाबू ने कविताओं में किया

साम्य के इस विशेषांक का प्रकाशन बाजारवादी समय में कविता और संस्कृति का प्रतिकार है. उदयपुर से आए आलोचक माधव हाड़ा ने कहा कि मैं नंद बाबू का स्नेहभाजन रहा हूं और उन्हें याद करना मेरे लिए प्रीतिकर अनुभव है. हाड़ा ने कहा कि नॉस्टेल्जिया का जैसा रचनात्मक उपयोग नंद बाबू ने अपनी कविताओं में किया है वैसा हिंदी के किसी दूसरे समकालीन कवि के यहां नहीं मिलता. उनकी कविता के कई आयाम है और वे हर बार अपना मुहावरा तोड़कर नया स्वर बनाते हैं.

देह के लिए अनोखा राग


नंद बाबू की कविता ‘शरीर’ को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि देह के लिए जैसा राग और स्वीकृति नंद बाबू के मन में है वह भी कम कवियों में देखने को मिलता है. गार्गी प्रकाशन के अतुल कुमार ने बताया कि खराब स्वास्थ्य के बावजूद साम्य के कंजकों का प्रकाशन संपादक विजय गुप्त की निष्ठा और समर्पण को दर्शाता है. संयोजन कर रहे युवा आलोचक पल्लव ने नंद चतुर्वेदी के गद्य लेखन को भी महत्त्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पिछली सदी के अनेक भुला दिए दिए लोग नंद बाबू की गद्य कृतियों में सुरक्षित हैं.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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