झारखंड की युवा कवयित्री डाॅ पार्वती तिर्की को विष्णु खरे युवा कविता सम्मान

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parwati tirkey

डाॅ पार्वती तिर्की

Vishnu Khare yuva kavita samman 2025 : पार्वती तिर्की ने कहा कि यह मेरे लिए अत्यंत खुशी का विषय है, संवाद का सम्मान है.वनमाली सृजन पीठ द्वारा राष्ट्रीय विष्णु खरे युवा कविता सम्मान’ ने मुझे संवाद का विश्वास दिलाया है.

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Vishnu Khare yuva kavita samman 2025: झारखंड की युवा कवयित्री डाॅ पार्वती तिर्की को विष्णु खरे युवा कविता सम्मान 2025 से सम्मानित किया गया है. पार्वती तिर्की को यह सम्मान कविता के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया है. पार्वती तिर्की ने अपनी कविताओं में आदिवासी जीवन को उकेरा है. उनकी कविताएं वाचिक पाठ परंपरा को समृद्ध करने वाली है.


पुरस्कार प्राप्त करने के बाद प्रभात खबर के साथ बातचीत में पार्वती तिर्की ने कहा कि यह मेरे लिए अत्यंत खुशी का विषय है, संवाद का सम्मान है.वनमाली सृजन पीठ द्वारा राष्ट्रीय विष्णु खरे युवा कविता सम्मान’ ने मुझे संवाद का विश्वास दिलाया है. इस सम्मान के लिए पुरखा कवि वनमाली जी और विष्णु खरे जी को मैं नमन करती हूं. पुरखे निरंतर मेरी लेखनी को दिशा दें, इसी उम्मीद के साथ इस सम्मान को स्वीकारा है.मैं वनमाली सृजन पीठ का आभार व्यक्त करती हूं.

सुप्रसिद्ध कथाकार शिक्षाविद् तथा विचारक स्वर्गीय जगन्नाथ प्रसाद चौबे ‘वनमाली’ के रचनात्मक योगदान और स्मृति को समर्पित वनमाली सृजन पीठ एक साहित्यिक, सांस्कृतिक तथा रचनाधर्मी अनुष्ठान है. वनमाली सृजनपीठ द्वारा वर्ष 2025 में ‘विष्णु खरे कविता सम्मान’ स्थापित किया जा रहा है. कवि विष्णु खरे की स्मृति में यह सम्मान दिया जा रहा है.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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