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‘रंग श्रीकांत’ कार्यक्रम में अभिभूत हुए दर्शक, श्रीकांत वर्मा की कविताओं की दृश्य प्रस्तुति रही बेमिसाल

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‘रंग श्रीकांत’ कार्यक्रम में अभिभूत हुए दर्शक, श्रीकांत वर्मा की कविताओं की दृश्य प्रस्तुति रही बेमिसाल

श्रीकांत वर्मा सिर्फ छत्तीसगढ़ के नहीं बल्कि देश और दुनिया के प्रसिद्ध साहित्यकार थे. मगर छत्तीसगढ़ में उन पर बहुत कम कार्यक्रम हुए हैं. छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद की कोशिश इस चुप्पी को तोड़ने और एक जीवंत साहित्यिक व सांस्कृतिक माहौल बनाने की है.

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साहित्य अकादमी व श्रीकांत वर्मा पीठ छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद संस्कृति विभाग की ओर से एक महत्वपूर्ण आयोजन ‘रंग श्रीकांत’ (Rang Shrikant ) का आयोजन पुरातत्व व संस्कृति विभाग रायपुर के सभागार में किया गया. इस आयोजन में श्रीकांत वर्मा के रचनाकर्म पर आधारित तीन प्रस्तुतियां हुईं. जिन्हें दर्शकों ने बेहद सराहा.

श्रीकांत वर्मा प्रसिद्ध साहित्यकार थे

कार्यक्रम की शुरूआत में श्रीकांत वर्मा पीठ, छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद, बिलासपुर के अध्यक्ष राम कुमार तिवारी ने स्वागत भाषण में कहा कि संस्कृति परिषद बनने के बाद श्रीकांत वर्मा पर रायपुर में यह पहला कार्यक्रम है. श्रीकांत वर्मा सिर्फ छत्तीसगढ़ के नहीं बल्कि देश और दुनिया के प्रसिद्ध साहित्यकार थे. मगर छत्तीसगढ़ में उन पर बहुत कम कार्यक्रम हुए हैं. छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद की कोशिश इस चुप्पी को तोड़ने और एक जीवंत साहित्यिक व सांस्कृतिक माहौल बनाने की है.

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कहानियों का मंचन करना एक बड़ी चुनौती

आयोजन की शुरुआत संगीत नाटक अकादमी सम्मान प्राप्त प्रसिद्ध रंगकर्मी राजकमल नायक के वक्तव्य से हुई. ”श्रीकांत वर्मा की रचनाओं में नाट्य तत्व” विषय पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि श्रीकांत वर्मा की कहानियों का मंचन करना एक बड़ी चुनौती है. उनकी कहानियों में उस तरह के नाटकीय तत्व नहीं हैं, जैसे अन्य कहानीकारों में देखने को मिलते हैं. उन्होंने कहा कि श्रीकांत वर्मा की सुप्रसिद्ध कविता मगध व अन्य कविताओं के देशभर में लगातार मंचन होते रहे हैं. वहीं उनकी कहानियां आम जनजीवन की कहानियां हैं और मनोवैज्ञानिक स्तर पर मनुष्य मन को खंगालने का उपक्रम करती हैं. हम गौर से अगर उनकी कहानियों को जानने की कोशिश करें तो हम पाते हैं कि हम अनायास ही श्रीकांत वर्मा को भी जान पा रहे हैं.

बहुचर्चित कविताओं की मंच पर प्रस्तुति

इसके बाद अगला आयाम स्व. श्रीकांत वर्मा की कविताओं की दृश्य प्रस्तुति का था . इसमें श्रीकांत वर्मा की 11 बहुचर्चित कविताओं की मंच पर प्रस्तुति की गयी. इनमें मगध, कोशाम्बी जड़, काशी का न्याय, हवन, तीसरा रास्ता, हस्तक्षेप, कलिंग, वंसत सेना, कोशल गणराज्य और मणिकर्णिका का डोम शामिल हैं. इसका निर्देशन छत्तीसगढ़ फिल्म एंड आर्ट सोसायटी, रायपुर से जुड़ी रचना मिश्रा ने किया. उल्लेखनीय है कि रचना मिश्रा छत्तीसगढ़ में इस समय सबसे सक्रिय महिला रंग निर्देशिका हैं. पिछले एक दशक में उन्होंने बीस से अधिक नाटकों का निर्देशन किया है. मगध की कविताओं की दृश्य प्रस्तुति अपने समय की सियासत पर एक प्रभावशाली टिप्पणी के रूप में सामने आयी.

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नाटक ‘दुपहर’ में बचपन और किशोरावस्था की मन:स्थितियों का अनुभव

विहान ड्रामा वर्क्स भोपाल के निर्देशक सौरभ अनंत ने कवि श्रीकांत वर्मा का साहित्य पढ़ने के बाद तीन कहानियों ‘दुपहर’, ‘संकर’ व ‘चॉकलेट’ को मंचन हेतु चयनित किया. जिसमें से ‘दुपहर’ का मंचन यहां राजधानी रायपुर में हुआ. यह नाटक मूलत: बचपन और किशोरावस्था की मन:स्थितियों का रोचक अनुभव कराता है. जिसमें केंद्रीय पात्र बिगुल और कप्तान दो लड़के हैं जो स्कूल से छुट्टी मारकर भाग निकले हैं. यह नाटक यह भी कहता है कि सीखने को स्कूल या कॉलेज की चारदीवारी तक सीमित नहीं किया जा सकता, ख़ास तौर पर साहस और प्रयोगशीलता जैसे गुणों की शिक्षा को. इसमें कप्तान की भूमिका शुभम कटियार और बिगुल की भूमिका रुद्राक्ष भायरे ने निभाई. दोनों अभिनेताओं ने अपने सहज और रंग भरे अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया.

शानदार प्रस्तुति में रही भूमिका

इस नाट्य प्रस्तुति में गिटारिस्ट स्नेह विश्वकर्मा,गीत, गायक व संगीत निर्देशन निरंजन कार्तिक,रूपसज्जा, वेशभूषा एवं रंग सामग्री श्वेता केतकर,तकनीकी सहायक कार्तिकेय नामदेव,अभिनय प्रशिक्षण व सहायक निर्देशक श्वेता केतकर,प्रकाश परिकल्पना, नाट्य रूपांतरण व निर्देशक सौरभ अनंत का योगदान रहा. कार्यक्रम का संचालन साहित्य अकादमी के कार्यक्रम समन्वयक मृगेंद्र सिंह ने किया.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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