–बिराज बड़ाईक- प्रकृति पर्व सरहुल को झारखंड में बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. सरहुल के मौसम में प्रकृति श्रृंगार की हुई युवती के समान खूबसूरत नजर आती है. इस अवसर पर आदिवासी समुदाय के लोग खुशी से नाचते-गाते हैं. मान्यता है कि इस दिन धरती और सूर्य का विवाह हुआ था. पढ़िए सरहुल के मौके पर गाया जाने वाला गीत… बन में का फुला फुलेगोटा जंगल चारेका दिसाय रेगोटा जंगल…1बन में सरई फुला फुलेगोटा जंगल चारेका दिसाय रेगोटा जंगल …2हो हाईल रेमहुआ रे महुआ पतईमहुआ पतई सभे क्षईर गेलक रेमहुआ पतई, सभे झईर गेलकहाय रे महुआ पतई सभे क्षईर गेलक…3डाईर ऊपर खोंच लागेखोंच ऊपर फुला रेफुला गिरे धरती सोभाय रेफुला गिरे धरती सोभाय …4हो हाईल रे–खेईल खेला, खेला रेलहई लेबे डांडा नेवाय केसहायक अध्यापिकानागपुरी विभागमहिला महाविद्यालय, लोहरदगा