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‘वक्त की अलगनी पर’ कविता संग्रह का लोकार्पण, कवयित्री रश्मि शर्मा ने कहा, कविता लिखना मेरी आदत और जरूरत

Updated at : 07 Apr 2019 8:12 AM (IST)
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‘वक्त की अलगनी पर’ कविता संग्रह का लोकार्पण, कवयित्री रश्मि शर्मा ने कहा, कविता लिखना मेरी आदत और जरूरत

रांची : ‘वक्त की अलगनी पर’ कविता संग्रह में कवयित्री ने दिल के दर्द को शब्दों में पिरोया है. साथ ही उनकी कविता में एक लय है जो जीवन की अनिवार्य शर्त है. कविताएं सहज और कोमल मन की अभिव्यक्ति है. उक्तें रांची के वरिष्ठ साहित्यकार और रांची विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर अशोक प्रियदर्शी ने […]

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रांची : ‘वक्त की अलगनी पर’ कविता संग्रह में कवयित्री ने दिल के दर्द को शब्दों में पिरोया है. साथ ही उनकी कविता में एक लय है जो जीवन की अनिवार्य शर्त है. कविताएं सहज और कोमल मन की अभिव्यक्ति है. उक्तें रांची के वरिष्ठ साहित्यकार और रांची विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर अशोक प्रियदर्शी ने कही. उन्होंने युवा कवयित्री रश्मि शर्मा के कविता संग्रह ‘वक्त की अलगनी पर ’ के लोकार्पण समारोह में कही. उन्होंने कहा कि किसी भी पुस्तक की समीक्षा उसके लोकार्पण के वक्त नहीं होनी चाहिए, यह वक्त प्रशंसा का है. हमें खुश होना चाहिए कि हमारी लाइब्रेरी और समृद्ध हुई.

कार्यक्रम में उपस्थित डाॅ माया प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि लोकार्पण के वक्त किताब की आलोचना नहीं प्रशंसा होनी चाहिए. हमारे समाज में स्त्रियों की उपस्थिति हमेशा वस्तु के रूप में हुई है. उसकी विचारशीलता पर पांबदी है. उसके दृष्टिकोण का खुलापन समाज को स्वीकार्य नहीं रहा है. इन परिस्थितियों में रश्मि शर्मा का कविता संग्रह युवाओं को प्रेरणा देता है. इस कविता संग्रह प्रेम कविताओं को प्रधानता दी गयी है, साथ ही मानव मन की भावनाओं को प्रमुखता से उकेरा गया है.

लोकार्पण के वक्त रश्मि शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि कविता लिखना मेरी जरूरत है या आदत यह मैं खुद से पूछती हूं. जब मन बेचैन होता है तो मैं लिखती हूं और अपने भावों को शब्दों में उकेरती हूं. कविताएं मैं इसलिए भी लिखती हूं क्योंकि यह आदमी होने की सलाहियत पैदा करती है. कविताएं मेरे अंतर्मन का भाव हैं. यह मेरी तीसरी कविता संग्रह है.

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार भारत यायावर मौजूद थे. कार्यक्रम में रश्मि शर्मा ने अपनी एक कविता का पाठ किया. उनकी कविताओं का पाठ कवयित्री और शिक्षिका मुक्ति शाहदेव, रेणु मिश्रा और विनोद कुमार ने भी किया.

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