By Prabhat Khabar Digital Desk
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ईश-वंदना


डॉ डी कौर

जीवन के उद्‌गम में तुम हो

सांसों की सरगम में तुम हो

वाणी में, पुकार में, तुम हो

हृदय के हर तार में तुम हो

प्रीत में तुम हो, प्यार में तुम हो

जीवन के श्रृंगार में तुम हो

डमरू की डम-डम में तुम हो

वीणा की झंकार में तुम हो

आयत में तुम, श्लोक में तुम हो

यीशु के उपदेश में तुम हो

कर्मों में तुम, धर्म में तुम हो

अंतर्मन के मर्म में तुम हो

पैरों की थिरकन में तुम हो

गीतों के गुंजन में तुम हो

तुम संग मेरा नेह बड़ा है

क्षण-क्षण में, कण-कण में तुम हो

डॉ डी कौर

एमबीबीएस, एमडी, सेवानिवृत्त, सहायक प्राध्यापक, स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग

संपर्क-9431175489,6202340296

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