Ashley Tellis : मुंबई में जन्मे एश्ले टेलिस की अमेरिका में गिरफ्तारी, राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला या किसी और बात की मिली सजा?
एश्ले टेलिस
Ashley Tellis : एश्ले टेलिस उनलोगों की सूची में शामिल हैं, जिन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी नीतियों और दृष्टिकोणों की आलोचना की है. ऐसे में टेलिस की गिरफ्तारी से कई सवाल खड़े हो रहे हैं. उनके घर से कई गोपनीय दस्तावेज भी बरामद हुए हैं, यह दावा किया जा रहा है.
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Ashley Tellis : भारतीय मूल के विदेश नीति विशेषज्ञ और रक्षा रणनीतिकार एश्ले टेलिस की अमेरिका में गिरफ्तारी हुई है. यह गिरफ्तारी 14 अक्टूबर को हुई है, जिसकी घोषणा वर्जीनिया के अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय द्वारा की गई है. एश्ले टेलिस पर यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने गोपनीय दस्तावेजों को अवैध तरीके से अपने पास रखा है और वे चीन के साथ भी गलत तरीके से संबंध बनाकर रखे हुए हैं और वे उनसे मिलते भी हैं. एश्ले टेलिस अमेरिकी विदेश विभाग के प्रमुख सलाहकार और रणनीतिकार हैं, वे 2001 से विभाग में सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं. दावा कि उनके घर से कई गोपनीय दस्तावेज मिले हैं
कौन हैं एश्ले टेलिस (Ashley Tellis)?
अमेरिका के विदेश नीति विशेषज्ञ एश्ले जे टेलिस का जन्म मुंबई में हुआ है. वे एक ईसाई परिवार से आते हैं, जिनकी जड़ें मुंबई और गोवा में रही हैं. एश्ले टेलिस ने मुंबई के संत जेवियर काॅलेज से बीए और एमए की पढ़ाई की है. उसके बाद उन्होंने शिकागो यूनिवर्सिटी, अमेरिका से अपनी पीएचडी पूरी की. उन्होंने 2000 के दशक के मध्य में अमेरिका-भारत असैन्य परमाणु समझौते की वार्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. एश्ले टेलिस ने अमेरिकी विदेश सेवा में भी कार्य किया है और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में विशेष सहायक के रूप में राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के अधीन भी रहे. टेलिस ना सिर्फ ट्रंप के कार्यकाल में बल्कि जॉर्ज बुश के काल में भी अमेरिकी सरकार में अहम रहे थे.वह वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक, कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में एक वरिष्ठ फेलो भी हैं
क्या एश्ले ने किया है ट्रंप का विरोध?
एश्ले टेलिस उनलोगों की सूची में शामिल हैं, जिन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी नीतियों और दृष्टिकोणों की आलोचना की है. टेलिस ने खासकार उन नीतियों की जमकर आलोचना की जिनका संबंध भारत से था. टेलिस ने कहा है कि भारत- पाकिस्तान संघर्ष में मध्यस्थता का दावा करने वाले राष्ट्रपति ट्रंप को जब उसका श्रेय नहीं मिला तो उन्होंने खुद को ठगा हुआ महसूस किया. भारत के रूस से तेल खरीदने के मसले पर एश्ले टेलिस ने यह कहा कि ट्रंप, भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने से नाराज और असंतुष्ट थे, जबकि सच्चाई यह है कि भारत से ज्यादा तेल चीन, रूस से खरीदता है.
टेलिस ने अमेरिकी सरकार को यह समझाने की कोशिश भी कि वे भारत को गंभीरता से लें. जिस प्रकार एश्ले टेलिस के खिलाफ कार्रवाई हुई और जिस प्रकार वे अमेरिकी सरकार के निर्णयों में अहम भूमिका निभाते रहे हैं. न्यूज एजेंसी राइटर से अनुसार गोपनीय दस्तावेजों को अवैध रूप से रखने और चीनी अधिकारियों के साथ अनधिकृत संपर्क के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया गया है. यदि वे दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें अधिकतम 10 वर्ष की सजा और 250,000 डालर तक का जुर्माना हो सकता है.
एश्ले टेलिस का भारत से क्या संबंध है?
एश्ले टेलिस के माता-पिता भारतीय हैं और उनका जन्म मुंबई में हुआ है.
एश्ले टेलिस ने भारत में कहां से पढ़ाई की है?
एश्ले टेलिस ने मुंबई के संत जेवियर काॅलेज से बीए और एमए की पढ़ाई की है.
एश्ले ने भारत -अमेरिका के संबंध पर क्या कहा है?
एश्ले टेलिस ने भारत और अमेरिका के संबंध पर ट्रंप के नजरिए की आलोचना की है.
एश्ले टेलिस का धर्म क्या है?
एश्ले टेलिस ईसाई हैं.
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लेखक के बारे में
By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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