डी कंपनी की जगह लेना चाहता है लाॅरेंस बिश्नोई गैंग, 700 शूटर्स का फैला रखा है जाल

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Lawrence Bishnoi gang

Lawrence Bishnoi gang : देश में हाई प्रोफाइल मर्डर के जरिए अपना खौफ कायम करने में जुटा लाॅरेंस बिश्नोई गैंग सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा रहा है. बिश्नोई गैंग अंडरवर्ल्ड डाॅन दाऊद इब्राहिम और करीम लाला की याद ताजा कर रहा है. पहले धमकी, फिर हत्या और उसकी जिम्मेदारी लेकर यह गैंग यह साबित करने में जुटा है कि उनकी बादशाहत कायम है. किस तरह लाॅरेंस बिश्नोई गैंगस्टर बना और कैसे उसका गैंग काम कर रहा है, इसकी पूरी कहानी यहां पढ़ें

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Lawrence Bishnoi gang : लाॅरेंस बिश्नोई गैंग आज के समय में दहशत का दूसरा नाम बन गया है. जिस तरह इस गैंग की सक्रियता देश में बढ़ी है और हाई प्रोफाइल मर्डर को अंजाम देकर इस गैंग ने अपनी बादशाहत कायम की है, उससे लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या लाॅरेंस बिश्नोई गैंग ‘डी कंपनी’ बनने की ओर अग्रसर हो रहा है. लाॅरेंस बिश्नोई अभी तिहाड़ जेल में है, लेकिन उसने जेल में रहकर ही मुंबई के हाई प्रोफाइल राजनेता बाबा सिद्दीकी की हत्या करवा दी. लाॅरेंस बिश्नोई ने जिस तरह काफी कम समय में क्राइम की दुनिया में अपना दबदबा कायम किया है, उसने सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती पेश कर दी है.

कैसे काम करता है लाॅरेंस बिश्नोई

लाॅरेंस बिश्नोई के गैंग में अभी 700 शूटर हैं, जो पूरे देश में सक्रिय हैं. इस गैंग में वैसे लोगों को जोड़ा गया है, जिनकी क्राइम हिस्ट्री बहुत अधिक दर्ज नहीं है. बाबा सिद्दीकी की हत्या में भी इसी तरह का पैटर्न नजर आया है. जिन शूटर का प्रयोग लाॅरेंस बिश्नोई ने बाबा सिद्दीकी की हत्या में करवाया है, उन्होंने इक्का-दुक्का क्राइम ही किया है और वे पुलिस की नजर में बहुत आए भी नहीं है. लाॅरेंस बिश्नोई गैंग की खासियत यह है कि वे क्राइम करने के बाद उसकी जिम्मेदारी भी लेते हैं और यह साबित करने की कोशिश करते हैं कि वे जो कुछ कर रहे हैं वह सही है. बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद भी जिस तरह का सोशल मीडिया पोस्ट सामने आया, उसमें यही बात कही गई थी कि वे दुश्मनी नहीं चाहते थे, ना ही उन्होंने किसी तरह के खून-खराबे की शुरुआत की. लेकिन वे यह भी कहते हैं कि जो उनके मकसद में बाधा बनेंगे उसका हाल बाबा सिद्दीकी वाला होगा.

लाॅरेंस बिश्नोई कैसे बना गैंगस्टर

लाॅरेंस बिश्नोई का जन्म पंजाब में हुआ है, उनके पिता एक किसान थे. स्कूली शिक्षा के दौरान लाॅरेंस बिश्नोई का कोई संबंध अपराध की दुनिया से नहीं था, लेकिन जैसे ही आगे की पढ़ाई के लिए वह चंडीगढ़ आया, उसका संपर्क गैंगस्टर गोल्डी बरार से हुआ, जिसने उसका वास्ता अपराध की दुनिया से कराया. वह छात्र नेता भी बना और उसपर हत्या की कोशिश, जबरन वसूली और मोबाइल की छिनतई जैसे केस दर्ज हुए. बाद में उसपर कई तरह के गंभीर मामले दर्ज हुए जिसमें हत्या, जबरन वसूली और धमकाने के कई केस थे. बाद में उसके गैंग में जसविंदर सिंह उर्फ ​​रॉकी जैसा कुख्यात भी शामिल हुआ. शुरुआती दौर में लाॅरेंस बिश्नोई गैंग रिवेंज किलिंग पर फोकस रहता था, लेकिन बाद में इस गैंग ने पैसे के लिए भी हत्या करना शुरू कर दिया.

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अंडरवर्ल्ड में कायम शून्य को भरने की कोशिश में जुटा है बिश्नोई गैंग

बिश्नोई गैंग इस प्रयास में है कि वह अंडरवर्ल्ड का बादशाह बन जाए, इसी कोशिश में वह हाई प्रोफाइल मर्डर कर रहा है. मुंबई पुलिस का दावा है कि बिश्नोई गैंग अंडरवर्ल्ड की शून्यता को भरना चाहता है. सलमान खान को जान से मारने की धमकी देने का सिलसिला इसी सोच का हिस्सा हो सकता है. हालांकि बिश्नोई गैंग यह दावा करता है कि उनका सलमान खान से विरोध काले हिरण की हत्या को लेकर है. बिश्नोई गैंग ने उन्हें माफी मांगने की सलाह दी थी, लेकिन सलमान खान ने यह नहीं किया था, जिसके बाद लाॅरेंस बिश्नोई ने जोधपुर कोर्ट में यह कहा था कि मैं सलमान खान को जोधपुर में ही मारूंगा. उसके बाद से लगातार सलमान खान के परिवार को धमकी दी जा रही है. उनके घर के बाहर फायरिंग की जाती है. बिश्नोई गैंग अब सिर्फ देश तक की ही सीमित नहीं रहा है, उनके गुर्गे विदेशों में भी अपना दबदबा दिखा रहे हैं. सलमान खान के साथ अलबम बनाने पर पंजाबी सिंगर एपी ढिल्लन के कनाडा स्थित घर के बाहर फायरिंग की गई थी. पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला, करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह और एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या करके अपना खौफ कायम करने की कोशिश की है और यह भी साबित करने की कोशिश की है कि बिश्नोई गैंग अब मुंबई तक पहुंच चुका है.

मुंबई में कायम था अंडरवर्ल्ड का राज

मुंबई पर 70-80 के दशक में अंडरवर्ल्ड का राज था. करीम लाला, हाजी मस्तान और वरदराजन जैसे डाॅन अपनी हुकूमत चलाते थे. उसके बाद डी कंपनी का दौर आया और दाऊद ने शुरू किया खून-खराबे का सिलसिला. इसने जबरन वसूली और पैसे के लिए सुपारी लेना भी शुरू कर दिया. दाऊद ने पूरे मुंबई को बदल दिया. 1993 में मुंबई हमले की योजना बनाने के बाद दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान चला गया. उसके पाकिस्तान जाने के बाद अंडरवर्ल्ड की बादशाहत भी जाती रही और गैंगवार पर अंकुश लगा दिया गया. बिश्नोई गैंग इसी बादशाहत पर कब्जा जमाने की कोशिश में नजर आ रहा है.  

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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