India vs New Zealand : 36 साल बाद कीवीज की उड़ान, भारत को तीसरी बार घर में रौंदा

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India vs New Zealand : भारतीय धरती पर जीत के लिए तरस रही न्यूजीलैंड की टीम को आखिरकर 36 साल बाद ड्रेसिंग रूम में सेलिब्रेशन का मौका मिला है. 1988 में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में न्यूजीलैंड ने भारत को 136 रन से शिकस्त दी थी और उसके बाद कोई भी जीत इनके खाते में नहीं आई थी. आज के मैच के हीरो रहे मैट हैनरी और विलियम ओरूर्के . हैनरी ने फर्स्ट इनिंग में पांच विकेट और कुल आठ विकेट लिए जबकि ओरूर्के ने कुल सात विकेट चटकाए.

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India vs New Zealand : भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले जा रहे टेस्ट सीरीज के पहले मैच में रविवार 20 अक्टूबर को न्यूजीलैंड ने भारत को आठ विकेट से पराजित कर दिया. न्यूजीलैंड के लिए यह जीत ऐतिहासिक है क्योंकि 1988 के बाद पूरे 36 साल बाद उन्हें भारतीय सरजमीं पर जीत नसीब हुई है. भारत में न्यूजीलैंड तीन टेस्ट मैचों का सीरीज खेलने वाला है और उनकी बोहनी ऐतिहासिक जीत से हुई है. भारत को उसके घर में हराना किसी भी टीम के लिए बहुत बड़ी जीत होती है और ब्लैक कैप कीवीज ने यह कर दिखाया है.


पूरे 36 साल बाद न्यूजीलैंड की टीम को मिली जीत

1988 से अबतक कुल आठ टेस्ट सीरीज न्यूजीलैंड और भारत के बीच भारत में खेले गए हैं, नौवां टेस्ट सीरीज जारी है, जो न्यूजीलैंड के लिए ऐतिहासिक साबित हो गया है. 1988-89 में भारत और न्यूजलैंड ने तीन मैचों की सीरीज खेली जिसे भारत ने 2-1 से जीता. इस सीरीज में न्यूजीलैंड को वानखेड़े के मैदान पर जीत मिली थी और उन्होंने भारत को 136 से हराया था. न्यूजीलैंड ने इस मैच में 236 और 279 रन बनाए थे, जबकि भारत 234 और 145 रन बनाकर आॅलआउट हो गई थी. यह मैच 24 नवंबर से 29 नवंबर के बीच मुंबई में खेली गई थी. इस मैच में रिचर्ड हैडली और जाॅन ब्रेसवेल ने बेहतरीन बल्लेबाजी की थी और भारतीय बल्लेबाजों को टिकने नहीं दिया था. हैडली ने कुल 10 विकेट लिए थे और ब्रेसवेल ने 8 विकेट चटकाए थे.


न्यूजीलैंड ने भारत में खेले 13 टेस्ट सीरीज, जीते सिर्फ 3 मैच

न्यूजीलैंड ने भारत में 1955 से 2024 के बीच 13 टेस्ट सीरीज खेले हैं, जिनमें से एक भी सीरीज में उसे जीत हासिल नहीं हुई है. पहला टेस्ट सीरीज 1955-56 में खेला गया था जिसमें कुल पांच मैच खेले गए थे और भारत ने इस सीरीज को 2-0 से जीता था. उसके बाद 1964-65 में चार मैचों की सीरीज खेली गई थी, जिसे भारत ने 1-0 से जीता था. उसके बाद 1969-70 में सीरीज खेली गई जो ड्रा रहा था, इसमें कुल तीन मैच खेले गए थे और दोनों टीमों ने एक-एक मैच जीता था और एक मैच ड्रा खेला गया था. 1976-77 में तीन मैचों की सीरीज खेली गई जिसे भारत ने 2-0 से जीता था. 1988-89 में तीन मैचों की सीरीज खेली गई जिसे भारत ने 2-1 से जीता था. उसके बाद 1995-96 में तीन मैचों के सीरीज को भारत ने 1-0 से जीता था. 1999 में तीन मैचों के सीरीज को 1-0 से जीता. 2003-04 में दो मैच की सीरीज 0-0 से ड्रा खेली गई. 2010-11 में तीन मैचों की सीरीज 1-0 से भारत ने जीता, 2012 में दो मैचों की सीरीज 2-0 से भारत ने जीता. उसके बाद भारत ने 2016-17 में तीन मैचों के सीरीज को 3-0 से जीता और 2021-22 में दो मैचों के सीरीज को भी भारत ने 1-0 से जीता. 2024 में तीन मैचों का सीरीज खेला जाना है और पहला मैच न्यूजीलैंड ने जीता है. यानी कुल रिकाॅर्ड यह कहता है कि अबतक खेले गए टेस्ट सीरीज में मात्र तीन मैच ही न्यूजीलैंड ने जीते हैं, एक 1969 में खेली गई थी, दूसरी 1988 में और तीसरी 2024 में खेली गई थी.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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