‘भारत आयरलैंड में बना रहा है उपनिवेश’-इस सोशल मीडिया पोस्ट से मचा हंगामा, ट्रोल हुआ यूजर

Updated:
विज्ञापन
India Ireland

India and Ireland : भारत और आयरलैंड के संबंध आजादी के वक्त से ही अच्छे रहे हैं. ऐसे हालात में जब कोई आयरिश भारत के खिलाफ नफरत से भरा सोशल पोस्ट करता है, तो लोग जानना चाहते हैं कि ऐसा क्यों है. दोनों देशों ने हमेशा एक दूसरे का साथ दिया और संस्कृति और परंपरा को साझा किया है.

विज्ञापन

India and Ireland : आयरलैंड आमतौर पर शांत माना जाने वाला द्वीप है, लेकिन यहां के एक व्यक्ति माइकल ओ’कीफे के एक एक्स पोस्ट से हंगामा मच गया है और उसे पोस्ट पर लगातार कमेंट आ रहे हैं. माइकल ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें एक भारतीय परिवार को आयरलैंड में मकान के बाहर नेमप्लेट लगाते हुए दिखाया गया है. यह परिवार बहुत ही खुशी और गर्व के साथ अपना नेमप्लेट लगा रहा है. विवाद वीडियो के कैप्शन पर है, जिसमें लिखा है-भारतीयों द्वारा खरीदा गया एक और घर. हमारे छोटे से द्वीप पर 1.5 अरब की आबादी वाला देश अपना उपनिवेश बना रहा है.


माइकल ओ‘कीफे टिप्पणी पर कई लोगों ने आपत्ति जताई है. खासकर उपनिवेश शब्द पर बवाल मचा है. एक यूजर ने आपत्ति जताते हुए लिखा है कि अगर कोई विदेशी व्यक्ति आपके देश में सिर्फ मकान खरीद लेता है, तो उसे उपनिवेश बनाने से कैसे जोड़ा जा सकता है. इस तरह की बयानबाजी अनुचित है. दूसरे यूजर शुभ चटर्जी ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा है कि इतनी नफरत ना करें, भारत चाहे तो पूरे आयरलैंड को 30 मिनट में खरीद सकता है. आप शायद कोविड का दौर भूल गए जब भारतीय डाॅक्टर्स ने ही आयरलैंड के लोगों की जान बचाई थी. भारत आयरलैंड को उपनिवेश बनाने में कोई रुचि नहीं रखता है.

Also Read :ममता बनर्जी ने क्यों दी डीवीसी के साथ हुए समझौते को तोड़ने की धमकी, जानें पूरी बात

अमेरिका में हर साल 5 लाख से 16 लाख तक  गर्भपात, चुनाव में छाया मुद्दा, जानें पूरी बात

भारतीयों ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

कई भारतीयों ने माइकल ओ‘कीफे के पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी लेकिन माइकल अपने स्टैंड पर बने रहे और बार-बार यह कहा कि भारत को जो कुछ करना है अपने देश में करें, हमारे देश को उपनिवेश बनाना बंद कर दें. उन्होंने भारतीयों द्वारा किए गए अपराधों का जिक्र भी उन्होंने किया, लेकिन उन्हें मुंह की खानी पड़ी क्योंकि यूजर्स ने डेटा शेयर किया जिसमें यह बताया गया है कि आयरलैंड में रहने वाले भारतीय सबसे कम अपराध करने वालों में शामिल हैं.


कहां है आयरलैंड?


आयरलैंड उत्तर पश्चिम यूरोप में स्थित एक देश है, जो अटलांटिक महासागर, सेल्टिक सागर,आयरिश सागर और सेंट जार्ज के चैनल से घिरा है. यह सिर्फ यूके के साथ अपने उत्तरी क्षेत्र की भूमि सीमा को साझा करता है. यहां का सबसे बड़ा शहर डबलिन है, जो यहां की राजधानी भी है. आजादी से पहले यह ब्रिटेन का उपनिवेश था, लेकिन 1949 में इसे स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता मिल गई.आयरिश यहां की मुख्य भाषा है, इसके अलावा यहां अंग्रेजी बोली जाती है. यहां के लोगों का अपनी संस्कृति से गहरा लगाव है. यहां बसने वाले 92 प्रतिशत लोग रोमन कैथोलिक हैं, हालांकि देश ने किसी धर्म को मान्यता नहीं दी है.


भारत और आयरलैंड के संबंध

भारत और आयरलैंड के संबंध शुरुआत से ही मित्रतापूर्ण रहे हैं. आजादी के वक्त से ही भारत और आयरलैंड मित्र रहे हैं. भारत में लगभग 45 हजार भारतीय मूल के लोग हैं, जो यहां रहते हैं. दोनों देश संस्कृति और परंपरा भी साझा करते हैं और कभी भी इनके बीच कोई विवाद उत्पन्न नहीं हुआ है. दोनों देशों के व्यापारिक संबंध भी बहुत अच्छे रहे हैं . दोनों देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री एक-दूसरे के देश का दौरा भी करते रहे हैं. दोनों ही देश ने एक दूसरे की संप्रुभता का हमेशा सम्मान किया है और एक दूसरे की मदद भी की है.

विज्ञापन
रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola