Motion of no confidence : बिना सरकार के फ्रांस, कौन संभालेगा राज?
मिशेल बार्नियर और इमैनुएल मैक्रों
French Government No Confidence Vote : फ्रांस के राजनीतिक हालात अजीबोगरीब हो गए हैं, वजह है प्रधानमंत्री मिशेल बार्नियर के खिलाफ अविश्वास का प्रस्ताव पास होना. फ्रांस में सबसे अधिक उम्र में प्रधानमंत्री चुने जाने वाले मिशेल बार्नियर का कार्यकाल सबसे छोटा रहा. गठबंधन की सरकार चला रहे बार्नियर ने एक बड़ा ही जोखिम भरा फैसला लिया जिसकी वजह से आज फ्रांस बिना सरकार के हो गया है.
French Government No Confidence Vote : फ्रांस की नेशनल असेंबली ने बुधवार को प्रधानमंत्री मिशेल बार्नियर के खिलाफ अविश्वास का प्रस्ताव पारित कर दिया है. चौंकाने वाली बात यह है कि उनके खिलाफ वामपंथी और दक्षिणपंथी दोनों ही दलों के नेताओं ने वोट किया. मिशेल बार्नियर महज दो महीने और 29 दिन तक ही अपने पद पर बने रहे. उनके खिलाफ नेशनल असेंबली में 331 वोट पड़े, जबकि 577 सदस्यीय सदन में अविश्वास प्रस्ताव को पास करने के लिए 288 वोट की जरूरत थी.
फ्रांस के प्रधानमंत्री के खिलाफ क्यों लाया गया अविश्वास प्रस्ताव (French Government No Confidence Vote )

फ्रांस के प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने की थी, लेकिन अब मिशेल बार्नियर को इस्तीफा देना पड़ेगा. संभवत: वे पांच दिसंबर को अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को सौंप देंगे. फ्रांस की शासन व्यवस्था में राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की नियुक्ति की जाती है, लेकिन वह अपने कार्यों के लिए निचले सदन यानी नेशनल असेंबली के प्रति उत्तरदायी होता है. मिशेल बार्नियर अपनी नियुक्ति के समय से ही चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, वजह यह है कि उनकी सरकार अल्पमत में है. उसपर मिशेल बार्नियर ने सदन में जोखिम उठाते हुए एक फैसला कर लिया जिसकी वजह से नेशनल असेंबली में उनके खिलाफ अविश्वास का प्रस्ताव पेश कर दिया गया. मिशेल बार्नियर ने सोशल सिक्युरिटी फाइनेंशियल बिल को संविधान के अनुच्छेद 49.3 का प्रयोग करते हुए बिना मतदान के पारित करा दिया, जिसकी वजह से उनके खिलाफ सांसद एकजुट हो गए और अविश्वास का प्रस्ताव पारित कर दिया.
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फ्रांस में सोशल सिक्युरिटी के तहत बीमारों और सीनियर सिटीजन को सुविधा दी जाती है. साथ ही नागरिकों को इमरजेंसी के दौरान भी मदद का विकल्प दिया जाता है. इसी वजह से इस बिल में कुछ अतिरिक्त टैक्स की व्यवस्था की गई थी जिसका विरोध राजनीतिक पार्टियां कर रहीं थीं.
फ्रांस के संविधान में क्या है अनुच्छेद 49.3 (what is article 49.3 in the french constitution)
फ्रांस की राजनीति में इन दिनों अनुच्छेद 49.3 की खूब चर्चा हो रही है. वजह यह है कि इसी अनुच्छेद की वजह से प्रधानमंत्री मिशेल बार्नियर को अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा. संविधान के इसी अनुच्छेद का प्रयोग करते हुए प्रधानमंत्री ने सोशल सिक्युरिटी फाइनेंशियल बिल को पास भी किया. इस फ्रांसिसी संवैधानिक व्यवस्था के तहत सरकार को यह अधिकार है कि वह बिना संसदीय मतदान के किसी कानून को पारित सकती है. इस अनुच्छेद में चार पैराग्राफ शामिल हैं और इसका सबसे महत्वपूर्ण पैराग्राफ है 49.3 जो बिना मतदान के सरकार को कानून पास करने की अनुमति देता है लेकिन साथ ही इस अनुच्छेद में यह प्रावधान भी है कि 24 घंटे के अंदर सांसद अविश्वास प्रस्ताव पेश कर उस निर्णय को चुनौती दे सकते हैं और अगर अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है तो वह कानून रद्द माना जाता है. यही वजह है कि इस संवैधानिक व्यवस्था का उपयोग करते वक्त बहुत ही सावधानी बरती जाती है. जब कभी की फ्रांस के इतिहास में इस अनुच्छेद का उपयोग किया गया है, सरकारों को जोखिम उठाना पड़ा है.
प्रधानमंत्री मिशेल बार्नियर की क्षमता पर क्यों उठ रहे हैं सवाल

प्रधानमंत्री मिशेल बार्नियर को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने नियुक्त किया है, लेकिन वे एक अल्पमत की सरकार से चुने गए थे. यही वजह है कि उनकी लोकप्रियता पर असर रहा. कहीं ना कहीं इसमें राष्ट्रपति की भी भूमिका है. जून महीने में उन्होंने संसद को भंग कर दिया था और समय से पहले चुनाव कराने का ऐलान कर दिया था. लेकिन इस चुनाव में मैंक्रो की पार्टी दूसरे स्थान पर रही, हालांकि उनकी पार्टी सिंगल लार्जेस्ट पार्टी के रूप में उभरी. अल्पमत वाली पार्टी से प्रधानमंत्री चुने जाने से वहां के सांसदों में असंतोष पहले से ही था, लेकिन अनुच्छेद 49.3 का प्रयोग करने से वहां के सांसद नाराज हो गए.
फ्रांस में अब कोई सरकार नहीं
फ्रांस के प्रधानमंत्री मिशेल बार्नियर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद अब उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा. इस स्थिति में राष्ट्रपति मैंक्रो को दूसरा प्रधानमंत्री चुनना होगा. लेकिन अभी उनके लिए यह काम बहुत कठिन है, क्योंकि वे समय से पहले चुनाव पहले ही करा चुके हैं, इसलिए नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति चुनाव के जरिए नहीं हो सकती है. इसलिए कोई कार्यवाहक प्रधानमंत्री ही एकमात्र विकल्प है. फ्रांस के कानून के अनुसार नेशनल असेंबली को कम से कम एक वर्ष तक बने रहना चाहिए, इस लिहाज से अब चुनाव के द्वारा प्रधानमंत्री का चुनाव 2025 के जुलाई से पहले संभव नहीं है.
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फ्रांस के संविधान में अनुच्छेद 49.3 किससे संबंधित है?
फ्रांसिसी संविधान का अनुच्छेद 49.3 सरकार को यह ताकत देता है कि वो किसी कानून को बिना संसदीय मतदान के पारित कर दे.
फ्रांस के प्रधानमंत्री का चुनाव कौन करता है?
फ्रांस के प्रधानमंत्री का चुनाव राष्ट्रपति करता है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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