बिजली का बिल भरने से लेकर बच्चे की फीस जमा करने तक, बैंक का काम निपटाना हो या अस्पताल की अपॉइंटमेंट लेनी हो, शायद ही कोई ऐसा काम बचा हो, जिसके लिए आज हमें घर से निकलना पड़े. क्योंकि आज इनमें से ज्यादातर काम एक क्लिक पर हो जाते हैं. यह हमारी बढ़ती डिजिटल ताकत का नतीजा है.लेकिन यह सुविधा अब एक नई चुनौती भी बन रही है.आंकड़े बताते हैं कि CERT-In को रिपोर्ट की गई साइबर सुरक्षा घटनाओं में 2021 से 2025 के बीच 110.29% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है.यानी जैसे-जैसे हमारी जिंदगी डिजिटल होती जा रही है, साइबर खतरे का दायरा भी बढ़ रहा है. ऐसे में सवाल है कि आखिर ये हमले बढ़ क्यों रहे हैं और इनसे आम लोगों को कितना खतरा है?डिजिटल विस्तार के साथ कैसे बढ़ रहा साइबर खतराजहां एक तरफ भारत में डिजिटल सेवाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है, वहीं साइबर खतरा भी बढ़ता जा रहा है.सरकारी कामकाज से लेकर बैंकिंग, अस्पताल और बिजली व्यवस्था तक कई जरूरी सेवाएं अब ऑनलाइन हैं. ऐसे में किसी डिजिटल सिस्टम पर हमला सिर्फ डेटा चोरी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर आम लोगों तक भी पहुंच सकता है.CERT-In को रिपोर्ट की गई साइबर सुरक्षा घटनाएं 2021 में करीब 14 लाख थीं, जो 2025 में बढ़कर 29.44 लाख हो गईं.समझिए कि क्या होता है साइबर हमलासीधे शब्दों में समझें तो जब कोई व्यक्ति या समूह बिना अनुमति किसी कंप्यूटर, मोबाइल, वेबसाइट या नेटवर्क में प्रवेश की कोशिश करता है, तो इसे साइबर अटैक कहा जाता है.इसका मकसद अलग-अलग हो सकता है. कोई निजी जानकारी या डेटा चुराना चाहता है, कोई बैंकिंग फ्रॉड के जरिए पैसे हड़पने की कोशिश करता है, तो कोई सिस्टम को लॉक करके उसके बदले फिरौती मांगता है. कई बार हमलावर किसी वेबसाइट या ऑनलाइन सेवा को ठप करने की कोशिश भी करते हैं.लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है. सरकार के आंकड़ों में सिर्फ सफल हैकिंग ही नहीं, बल्कि अलग-अलग तरह की साइबर सुरक्षा घटनाएं दर्ज होती हैं. इसलिए आंकड़े में शामिल हर घटना का मतलब यह नहीं है कि किसी सिस्टम को सफलतापूर्वक हैक कर लिया गया या बड़ी मात्रा में डेटा चोरी हो गया.ये भी पढ़ें: भारत समेत कई देशों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर अमेरिका की नजर, जानें क्यों उठा रहा सवाल?क्यों बढ़ रही साइबर घटना और क्या है इसका कारणइसकी सबसे बड़ी वजह है तेजी से बढ़ता डिजिटल इस्तेमाल.आज सरकारी सेवाओं के लिए वेबसाइट और मोबाइल ऐप हैं. बैंकिंग और पेमेंट ऑनलाइन है. अस्पतालों में मरीजों का रिकॉर्ड सब डिजिटल रिकॉर्ड हो रहा है. बिजली और दूसरी जरूरी सेवाएं भी कंप्यूटर नेटवर्क से जुड़ी हैं.जितना ज्यादा सिस्टम ऑनलाइन होगा, उतने ज्यादा रास्ते साइबर अपराधियों के लिए भी बनेंगे.इसके अलावा अपराधियों के तरीके भी बदल रहे हैं. फर्जी ईमेल और लिंक भेजकर पासवर्ड चुराना, वायरस डालना, डेटा चोरी करना और सिस्टम को लॉक करके पैसे मांगना आम तरीके बन चुके हैं.कैसे होता है साइबर हमला ?साइबर हमले का कोई एक तरीका नहीं है. अपराधी अलग-अलग तरीकों से ऐसा कर सकता है. इसे एक आसान उदाहरण से समझिए.पहले हमलावर किसी व्यक्ति को फर्जी ईमेल या मैसेज भेजता है. वह लिंक खोलते ही यूजर की जानकारी हासिल करने की कोशिश करता है.इसके बाद वह उसी लिंक के जरिए सिस्टम में प्रवेश कर डेटा चोरी, सिस्टम लॉक या सेवा बाधित कर सकता है. यानी खतरा कई बार एक छोटे से क्लिक से भी हो सकता है.सरकारी वेबसाइट हैक पीछे क्या है कारणकिसी वेबसाइट का पेज बदल देना ही साइबर हमला नहीं है.असल खतरा उस वेबसाइट के पीछे मौजूद डेटा और सिस्टम है.किसी सरकारी पोर्टल पर आम लोगों की निजी जानकारी, दस्तावेज या दूसरे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड हो सकते हैं.अगर हमलावर वहां तक पहुंच बना लेता है तो डेटा चोरी हो सकता है, सिस्टम बंद हो सकता है और सरकारी सेवा प्रभावित हो सकती है.बैंक और अस्पताल पर क्यों रहती है अपराधियों की नजरसाइबर अपराधियों के लिए बैंक और वित्तीय संस्थान बड़े लक्ष्य होते हैं क्योंकि यहां पैसा और वित्तीय जानकारी मिलने के साथ-साथ आम लोगों की जानकारी भी होती है.अस्पतालों में मरीजों का संवेदनशील डेटा होता है और कई सेवाएं डिजिटल सिस्टम पर निर्भर करती हैं. अगर सिस्टम बंद हो जाए तो ऑनलाइन पंजीकरण, रिपोर्ट या दूसरी डिजिटल सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं.बिजली, टेलीकॉम और दूसरी जरूरी सेवाओं पर हमला इससे भी गंभीर हो सकता है, क्योंकि इसका असर सीधे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है.ये भी पढ़ें: सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवादों के पीछे क्या है कारण ? जानिए सिस्टम में कहां है गड़बड़ीसाइबर सुरक्षा के लिए सरकार क्या कर रही है व्यवस्था ?साइबर हमलों से निपटने के लिए सरकार ने कई स्तरों पर व्यवस्था बनाई है.CERT-In साइबर खतरों की निगरानी करता है,अलर्ट और सुरक्षा सलाह जारी करता हैसाइबर घटनाओं से निपटने में मदद करता है.सरकार ने सूचना सुरक्षा ऑडिट के लिए 237 संस्थाओं को पैनल में शामिल किया है. इनकी मदद से सरकारी और अन्य महत्वपूर्ण सिस्टम की सुरक्षा में मौजूद कमजोरियों की जांच की जा सकती है. इसके अलावा अलग-अलग महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए विशेष साइबर सुरक्षा और प्रतिक्रिया तंत्र भी बनाए गए हैं.सिर्फ सरकार नहीं, आम आदमी भी निशाने परसाइबर सुरक्षा को केवल सरकारी वेबसाइट तक सिमित नहीं है बल्कि आम लोगों के साथ भी फर्जी बैंक कॉल, OTP ठगी, नकली लिंक, फर्जी कस्टमर केयर और सोशल मीडिया अकाउंट चोरी जैसी घटनाएं होती हैं. इसलिए साइबर सुरक्षा में सबसे जरूरी चीज है, सावधानी.इसके लिए अनजान लिंक पर क्लिक न करना, अलग-अलग खातों के लिए अलग पासवर्ड रखना, जहां संभव हो वहां टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन इस्तेमाल करना और किसी के साथ OTP या बैंकिंग जानकारी साझा न करना काफी मददगार हो सकता है.आगे अभी और बढ़ने वाली है चुनौतीजानकारों का मानना है कि भारत जितनी तेजी से डिजिटल हो रहा है, साइबर सुरक्षा की चुनौती भी उतनी ही बड़ी होती जाएगी. सरकारी वेबसाइट, बैंक, अस्पताल, बिजली व्यवस्था और दूसरी सेवाएं एक-दूसरे से ज्यादा जुड़ रही हैं. ऐसे में किसी एक सिस्टम की कमजोरी दूसरे सिस्टम के लिए खतरा बन सकती है.पढ़िए देश दुनिया और बिहार झारखंड की ओरिजिनल खबर