बेनिटो मुसोलिनी ने अनगिनत महिलाओं से बनाए थे संबंध, लेकिन किसी से भी नहीं किया सच्चा प्यार

Edited by Rajneesh Anand
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बेनिटो मुसोलिनी

Dictators and his Women 2 : बेनिटो मुसोलिनी 20वीं सदी का शायद सबसे विवादित तानाशाह था. उसने लाखों लोगों की हत्या करवाई थी, यही वजह था कि जब उसकी हत्या हुई,तब इटलीवासियों ने उसके शव के साथ बहुत ही बुरा व्यवहार किया. किसी ने उसपर चाबुक बरसाए, तो किसी ने उल्टा लटकाए जाने पर उसे गोली मारी. उसके विचार जितने विवादित थे उतने ही विवादित उसके रिश्ते थे. उसने शादी तो दो की, लेकिन उसका संबंध कई महिलाओं से था.

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Dictators and his Women 2 : बेनिटो मुसोलिनी (Benito Mussolini) 20वीं सदी का दूसरा ऐसा तानाशाह था जिसकी चर्चा मानव इतिहास में आज भी होती है. वह इटली का रहने वाला था और उसे फासीवाद का जनक माना जाता है. उसने इटली में फासीवाद की स्थापना की और दूसरे विश्वयुद्ध की बड़ी वजह भी बना. उसने 1932 में The Doctrine of Fascism लिखवाया, जिसमें यह बताया गया है कि व्यक्ति नहीं, राष्ट्र सर्वोपरि है. मुसोलिनी ने व्यक्ति के अधिकारों को सीमित कर दिया और तानाशाही शासन स्थापित किया. वह लोकतंत्र का हत्यारा था.उसके बारे में यह कहा जाता है कि उसने युवाओं का ब्रेनवाॅश किया. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान वह हिटलर के साथ खड़ा था. मुसोलिनी का पूरा जीवन ही विवादों से भरा था. यही वजह है कि उसका पारिवारिक और प्रेम संबंध भी उतना ही विवादित रहा.

मुसोलिनी ने की थी दो शादी

बेनिटो मुसोलिनी ने अपने जीवन में दो शादियां कीं. उसकी पहली शादी 1914 में
इडा डाल्सर से हुई थी, जबकि दूसरी शादी 1915 में राचेले गुइडी से हुई थी. आरजेबी बोसवर्थ की किताब -Mussolini में उन्होंने बताया है कि वह एक वूमेनाइजर (womanizer) था, वह किसी भी महिला के साथ भावनात्मक रिश्ते में बंधा नहीं था, वह बस अपनी जरूरतों के अनुसार संबंध बनाता था. इडा डाल्सर के साथ अपने संबंध और विवाह को उसने कभी स्वीकार नहीं किया, जबकि उनका एक बेटा भी था. इडा ने संघर्ष के दिनों में उसकी आर्थिक मदद की थी और वह उससे प्रेम भी करती थी. लेकिन मुसोलिनी ने अपने और उसके रिश्ते को हमेशा छुपा कर रखा. जब वह सत्ता में आ गया, तो उसने अपने इस संबंध को खतरा समझा और पत्नी को पागलखाने में बंद करवा दिया था, जहां उसकी मौत हो गई थी. रशेल गुइदी के साथ उसके संबंध भावनात्मक नहीं थे, जबकि वह शादी से पहले काफी समय तक साथ रहे थे. मुसोलिनी शादी को महत्व नहीं देता था, हालांकि उनकी शादी चली. आरजेबी बोसवर्थ अपनी किताब में लिखते हैं कि मुसोलिनी ने उस शादी को चलाने का कोई प्रयास नहीं किया था. उनके 5 बच्चे हुए, लेकिन उनकी शादी बस कहने की शादी थी, जिसमें प्यार के लिए कोई जगह नहीं थी.

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बेनिटो मुसोलिनी अपने परिवार के साथ

क्लारा पेटाची मुसोलिनी की अंतिम प्रेमिका थी

मुसोलिनी के जीवन में कई महिलाएं थी. आरजेबी बोसवर्थ अपनी किताब में लिखते हैं कि मुसोलिनी अपने महल ‘पलाजो वेनेजिया’ के आरामकक्ष में कई महिलाओं से मिलता था. उसके संबंध कई महिलाओं से तो थे, लेकिन वह किसी भी महिला से भावानात्मक स्तर पर जुड़ता नहीं था. मुसोलिनी की किस्मत अच्छी थी कि उसे रशेल जैसी पत्नी और क्लारा पेटाची जैसी प्रेमिका मिली जिन्होंने उसे अपना प्यार दिया. क्लारा पेटाची के बारे में यह कहा जाता है कि मुसोलिनी से लगभग 28 साल छोटी थी और वह उसके प्यार में एकतरह से पागल थी. उसने मुसोलिनी को अपना भगवान मान लिया था और वह उसके लिए कुछ भी करने को तैयार थी. 1945 में जब मुसोलिनी अपनी जान बचाकर भाग रहा था, तो वह भी उसके साथ आ गई थी. जब मुसोलिनी अपने विरोधियों के हत्थे चढ़ा और उसे मार दिया गया, तब क्लारा की भी हत्या कर दी गई. क्लारा पेटाची ने अपनी निजी डायरी में मुसोलिनी के बारे में लिखा है-उसने एक बार मुझसे कहा था कि एक समय था जब मेरे पास 14 औरतें थीं . पेटाची की यह डायरी 1932-1938 के बीच लिखी गई थी, लेकिन इसका प्रकाशन 2009 में हुआ, जिसके बाद काफी हंगामा हुआ था.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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