Bihar Election 2025 : महागठबंधन में सीटों को लेकर किचकिच जारी, फिर भी राजद और कांग्रेस का दावा-हम साथ-साथ हैं

Edited by Rajneesh Anand
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राहुल गांधी और तेजस्वी यादव

Bihar Election 2025 : महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर अभी जो कुछ अस्पष्टता की स्थिति नजर आ रही है, वो आने वाले एक दो दिन में बिलकुल साफ हो जाएगी. यह दावा राजद और कांग्रेस दोनों पार्टियां कर रही हैं. इनका कहना है कि हर पार्टी अधिक से अधिक सीट पर चुनाव लड़ना चाहती है, जो स्वाभाविक है, इसमें विवाद जैसी कोई बात नहीं है. पार्टियों के दावे पर भरोसा कर भी लिया जाए, लेकिन जो संकेत मिल रहे हैं, वो कई सवाल खड़े करने वाले हैं.

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Bihar Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण का नामांकन शुक्रवार को समाप्त हो गया, लेकिन महागठबंधन में अभी भी सीटों को लेकर समझौता नहीं हो पाया है. कांग्रेस ने तो अपने 48 उम्मीदवारों की सूची जारी की थी, लेकिन राजद ने अबतक कोई अधिकारिक सूची जारी नहीं की है. पहले चरण में 121 सीट पर चुनाव होना है और महागठबंधन के 127 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर पेच कहां फंसा है और अगर बातचीत सफल नहीं रही, तो क्या महागठबंधन टूट की ओर तो नहीं बढ़ेगा?

क्या टूट की ओर अग्रसर है महागठबंधन?

बिहार विधानसभा चुनाव में पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को होना है, जिसके लिए नामांकन की प्रक्रिया समाप्त हो गई है. बावजूद इसके महागठबंधन में अबतक सीटों को एक लेकर समझौता नहीं हो पाया है, जिसकी वजह से कई सीटों पर महागठबंधन के दो प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल कर दिया है. इस स्थिति में महागठबंधन का भविष्य क्या होगा इस बारे में बात करते हुए राजद के प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा कि कहीं कोई दिक्कत नहीं है. महागठबंधन एकजुट है और पूरी उम्मीद है कि नामांकन वापस लेने की तारीख से पहले सबकुछ स्पष्ट हो जाएगा.

चित्तरंजन गगन ने कहा कि कुछ सीटों पर महागठबंधन में कुछ अस्पष्टता है, लेकिन बातचीत हो रही है और सबकुछ ठीक हो जाएगा. जिन सीटों पर दो-दो प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल कर दिया है, वहां से नाम वापसी होगी और जिस उम्मीदवार की जीत की संभावना ज्यादा होगी, वही चुनावी मैदान रहेगा. शुक्रवार को राजद की ओर से 71 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया है, जल्दी ही सबकुछ स्पष्ट हो जाएगा. महागठबंधन में सीटों को लेकर किसी भी तरह के विवाद से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि हर पार्टी यह चाहती है कि वह अधिक से अधिक सीट पर चुनाव लड़े, यह बिलकुल स्वाभाविक बात है, लेकिन बातचीत में जिसकी जीत सुनिश्चित प्रतीत होगी, वहीं चुनावी मैदान में रहेगा, यह बात पूरी तरह स्पष्ट है.

महागठबंधन में सीट समझौते पर कोई विवाद है या बन चुकी है बात?

महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर कोई विवाद नहीं है. बात पूरी तरह बन चुकी है और जल्दी ही सारी जानकारी सामने आ जाएगी. उक्त बातें कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने कही. उन्होंने कहा कि सीटों के आदान-प्रदान पर बात चल रही है. पहले चरण के नामांकन में कांग्रेस, राजद, सीपीआई, वीआईपी, सीपीएम सभी पार्टियों के उम्मीदवारों ने नामांकन किया है. हमारे बीच कोई विवाद नहीं है, कुछ बातें हैं, जो दो-एक दिन में निपट जाएगी, उसके बाद अधिकारिक सूची सामने आ जाएगी. महागठबंधन पूरी तरह एकजुट है, कहीं कोई विवाद नहीं है.

महागठबंधन के किन सीटों पर फ्रेंडली फाइट की आशंका?

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राहुल गांधी और तेजस्वी यादव

महागठबंधन के घटक दल राजद और कांग्रेस भले ही यह दावा कर रहे हैं कि उनके बीच सबकुछ ठीक है, लेकिन सीट शेयरिंग पर अबतक बात ना बनना यह साबित करता है कि अंदरुनी खींचतान जारी है. पहले चरण में 121 और दूसरे चरण में 122 सीटों पर मतदान होना है. 122 सीटों के लिए भी नामांकन की प्रक्रिया सोमवार 20 अक्टूबर को समाप्त हो जाएगी. जो स्थिति नजर आ रही है उसमें राजद, कांग्रेस, माकपा, भाकपा और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) से मिलकर बने महागठबंधन को अभी भी कई सीटों पर सहमति बनानी है. प्रभात खबर के पाॅलिटिकल एडिटर मिथिलेश कुमार बताते हैं कि अभी तक महागठबंधन में सीट शेयरिंग पर बात नहीं बन पाई है, हालांकि गठबंधन में टूट जैसी कोई स्थिति नहीं है. उन्होंने बताया कि 121 सीट पर महागठबंधन के 127 प्रत्याशियों ने नामांकन कर दिया है.

विवाद की वजह यह है कि कांग्रेस व राजद ने वैशाली और लालगंज सीट पर अपने-अपने प्रत्याशी खड़े कर दिए हैं. दोनों दलों के उम्मीदवारों ने शुक्रवार को अपना-अपना पर्चा दाखिल किया है. इसी तरह बछवाड़ा, बिहारशरीफ और राजपाकर सीट पर सीपीआई और कांग्रेस ने अपने-अपने प्रत्याशी उतारे हैं. मुंगेर के तारापुर सीट पर वीआईपी और राजद दोनों के उम्मीदवारों ने पर्चा भरा है. वामदलों के 23 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया है. अभी की स्थिति में कुल 6-7 सीट ऐसे होंगे जहां, महागठबंधन के बीच फ्रेंडली फाइट की संभावना है. मुकेश सहनी भी नाराज हैं, वे चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन उनकी आकांक्षाओं को पूरा करना होगा. कांग्रेस को भी 70 सीट चाहिए. कहने का आशय यह है कि जो महागठबंधन चुनाव से पहले बिलकुल साथ-साथ था, वो पहले दौर के नामांकन में बिखरा हुआ सा नजर आ रहा है. वहीं एनडीए की ओर अगर देखें, तो उन्होंने तमाम विवादों के बावजूद सीट शेयरिंग कर लिया है.

बिहार विधानसभा में कुल कितनी सीटें हैं?

बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं.

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मतदान कब है?

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए 06 नवंबर और 11 नवंबर को मतदान होना है. जबकि परिणाम 14 नवंबर को घोषित होंगे.

चिराग पासवान एनडीए के साथ चुनाव लड़ रहे हैं?

हां, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में चिराग पासवान एनडीए के साथ चुनावी मैदान में हैं.

महागठबंधन में सीट शेयरिंग पर समझौता हो गया है?

नहीं, अभी तक महागठबंधन में सीट शेयरिंग पर समझौता नहीं हुआ है.

महागठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी कौन है?

महागठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी राजद है, कांग्रेस का स्थान दूसरा है.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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