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PHOTOS: कौन हैं लद्दाख मैराथन में जीत का परचम लहराने वाले 56 वर्षीय सुमन प्रसाद?

Updated at : 18 Sep 2023 4:40 PM (IST)
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PHOTOS: कौन हैं लद्दाख मैराथन में जीत का परचम लहराने वाले 56 वर्षीय सुमन प्रसाद?

रांची: 56 वर्षीय सुमन प्रसाद ने तमाम चुनौतियों को स्वीकार करते हुए लद्दाख मैराथन का सपना पूरा कर लिया. स्वास्थ्य खराब होने पर डॉक्टरों ने उन्हें मैराथन पूरा करने का सपना छोड़ देने की सलाह दी थी, लेकिन सपने को हकीकत में बदलने की जिद और जुनून के कारण उन्होंने सपने को सच कर दिखाया.

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रांची के सुमन प्रसाद की लद्दाख यात्रा दिल्ली हाफ मैराथन (21 किलोमीटर), कोलकाता मैराथन (25 किलोमीटर) और कठिन मुंबई मैराथन (42 किलोमीटर) के सफल समापन के साथ शुरू हुई, जो उनके जुनून, समर्पण और प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है.

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लद्दाख मैराथन में अपना स्थान सुरक्षित करने के लिए सुमन ने उत्सुकता से उस कार्यक्रम के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराया था. इस मैराथन को पूरा करना उनका सबसे बड़ा सपना था. इस मैराथन को पूरा करने के लिए उन्होंने झारखंड में पतरातू घाटी के जोखिम भरे इलाके में अपना प्रशिक्षण शुरू किया था. वह लद्दाख के लिए तैयार थे.

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लद्दाख की ठंडी हवा ने उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाला. वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गए और ऑक्सीजन का स्तर कम होने के कारण चलने में असमर्थ हो गए. उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. दिल का दौरा पड़ने का ख़तरा होने के कारण डॉक्टरों ने सलाह देते हुए उनसे अपने जीवन की खातिर अपने सपने को त्यागने का आग्रह किया. उन्होंने कई डॉक्टरों से चिकित्सकीय सलाह ली. सभी ने इस सपने को पूरा करने की जिद छोड़ देने की राय दी.

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फाइनेंस कंपनी में मैनेजर सुमन ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि लद्दाख मैराथन के सपने को साकार करने का जुनून उन्हें परेशान करता रहा. उन्होंने हार मानने से इनकार कर दिया. एक बार फिर उन्होंने हिम्मत जुटाई. जैसे ही उन्होंने कुछ कदम बढ़ाए, उन्हें अहसास हुआ कि उनका ऑक्सीजन लेवल बढ़ गया है. इससे उन्हें चुनौती जारी रखने का साहस मिला.

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उनका कुशलक्षेम जानने लद्दाख पहुंचे भांजे के आने से अतिरिक्त ऊर्जा का संचार हुआ. उन्होंने संकल्प लिया और अपनी गति तेज कर दी और इस तरह निर्धारित समय सीमा में उन्होंने लद्दाख मैराथन पूरा करते हुए फिनिश लाइन को पार कर लिया. सपने साकार होने के बाद उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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