क्या दक्षिण अफ्रीका की टीम चोकर्स का धब्बा हटा पाएगी, फाइनल में पहुंचने की क्या है उम्मीद?

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क्या दक्षिण अफ्रीका की टीम चोकर्स का धब्बा हटा पाएगी, फाइनल में पहुंचने की क्या है उम्मीद?

Chennai: South Africa’s batter Keshav Maharaj and Tabraiz Shamsi celebrate after winning the ICC Men’s Cricket World Cup 2023 match against Pakistan, at MA Chidambaram Stadium, in Chennai, Friday, Oct. 27, 2023. (PTI Photo/R Senthil Kumar)(PTI10_27_2023_000466A)

दक्षिण अफ्रीका अगर एक नवंबर का मैच जीत जाती है तो उसका मनोबल बढ़ेगा क्योंकि वह टाॅप चार की एक टीम को पीछे करेगी और प्वाइंट टेबल में भारत को पछाड़कर रेट रन रेट के आधार पर फिर से शीर्ष पर पहुंच जाएगी.

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विश्वकप के लीग मैच 12 नवंबर को समाप्त हो जाएंगे, हालांकि नवंबर के पहले सप्ताह में यह लगभग तय भी हो जाएगा कि टाॅप चार टीम कौन-कौन होगी. बात अगर दक्षिण अफ्रीका की करें, तो यह टीम अभी प्वाइंट टेबल में नंबर दो पर है. दक्षिण अफ्रीका ने अब तक छह मैच खेले हैं, जिसमें से उसे पांच मैच में जीत और एक में हार नसीब हुई है. एक नवंबर को दक्षिण अफ्रीका की टीम न्यूजीलैंड के साथ भिड़ रही है, यह मैच दोनों ही टीम के लिए बहुत खास होगा क्योंकि प्वाइंट टेबल में दोनों आसपास हैं. यह दोनों ही टीम का सातवां मैच होगा.

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दक्षिण अफ्रीका अगर एक नवंबर का मैच जीत जाती है तो उसका मनोबल बढ़ेगा क्योंकि वह टाॅप चार की एक टीम को पीछे करेगी और प्वाइंट टेबल में भारत को पछाड़कर रेट रन रेट के आधार पर फिर से शीर्ष पर पहुंच जाएगी.

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दक्षिण अफ्रीका के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दक्षिण अफ्रीका अपने अब तक के प्रदर्शन को इस बार परिणाम में बदलेगी. अगर टीम न्यूजीलैंड के साथ मैच जीत जाती है, तो उसका सेमीफाइनल में जाना तय हो जाएगा. पांच नवंबर को दक्षिण अफ्रीका का भारत के साथ मुकाबला होना है और यह मुकाबला दोनों ही टीम जीतना चाहेगी. भारतीय टीम अभी तक अजेय रही है.

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दक्षिण अफ्रीका के आंकड़ों पर गौर करें तो इस विश्व कप में उसके जीत का प्रतिशत 83.333 है. जबकि सभी विश्व कप का रिकाॅर्ड देखें तो दक्षिण अफ्रीका के जीत का प्रतिशत 61.429 है. के बैटर क्विंटन डि काॅक सबसे अधिक 431 रन बनाकर टाॅप पर हैं.

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दक्षिण अफ्रीका की टीम पर रंगभेदी नीति के कारण 1969-70 में प्रतिबंध लगा दिया गया था. 1991 में टीम पर से प्रतिबंध हटा और 1992 में टीम सेमीफाइनल में पहुंची. लेकिन फाइनल तक का सफर वह तय नहीं पाई क्योंकि इंग्लैंड ने उसे 19 रन से हरा दिया था. दक्षिण अफ्रीका 10 प्वाइंट के साथ टेबल में तीसरे नंबर पर थी.

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दक्षिण अफ्रीका अगर टाॅप पर रही तो उसका मुकाबला चौथे नंबर की टीम से होगा, वहीं अगर वह दो नंबर पर रही तो उसका मुकाबला तीसरे नंबर की टीम से होगा.

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1996 के विश्वकप में दक्षिण अफ्रीका ग्रुप बी में टाॅप पर थी, बावजूद इसके उसने विश्वकप नहीं जीता. 1996 का विश्वकप श्रीलंका ने जीता था.

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2019 के विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका सेमीफाइनल भी नहीं खेल पाई थी, बेहतर प्रदर्शन करने के बाद भी आज तक दक्षिण अफ्रीका ने कोई खिताब अपने नाम नहीं किया है, जिसकी वजह से उसपर चोकर्स का ठप्पा लगा है. उम्मीद की जा रही है कि इस सीजन में दक्षिण अफ्रीका कुछ चेंज करेगा

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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