ED Raid: तीन महीने में ईडी ने बरामद किये 100 करोड़, जानें इन पैसों का अब क्‍या होगा

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 12 Sep 2022 12:17 PM

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ED Raid: जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद प्राप्त हुए पैसों का क्‍या होता है. यह सवाल सभी के मन में आता है. तो आइए आपको इन पैसों के बारे में बताते हैं. ईडी को बरामद पैसे जब्त करने का अधिकार होता है.

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प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी (ED) का नाम इन दिनों काफी चर्चा में रहता है. छापेमारी करने के बाद इस जांच एजेंसी के हाथ करोड़ों रुपये आते हैं. अंग्रेजी वेबसाइट इंडिया टुडे की खबर के अनुसार पिछले 3 महीने में ईडी ने 100 करोड़ रुपये के करीब जब्त किये हैं. कई केस की जांच के संबंध में छापेमारी की गयी जिसके बाद ये पैसे ईडी के हाथ लगे. यदि आपको याद हो तो पिछले दिनों ईडी ने कोलकाता के एक व्‍यापारी के यहां से 17 करोड़ रुपये बरामद किये थे. ये छापेमारी मोबाइल गेमिंग ऐप को लेकर की गयी थी.

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कुछ सप्‍ताह पहले बंगाल में ही ईडी ने छापेमारी करके इतिहास में पहली बार 50 करोड़ रुपये बरामद किये थे. मामले में पश्‍चिम बंगाल के मंत्री पार्थ चटर्जी को और उसकी करीबी अर्पिता मुखर्जी को गिरफ्तार किया था. अर्पिता मुखर्जी के अपार्टमेंट से जाच एजेंसी ईडी को पैसे मिले थे और ये कार्रवाई एसएससी घोटाले में की गयी थी. झारखंड में भी कुछ इसी तरह का मामला देखने को कुछ महीने पहले मिला था और ईडी ने करोड़ों रुपये बरामद किये थे.

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जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद प्राप्त हुए पैसों का क्‍या होता है. यह सवाल सभी के मन में आता है. तो आइए आपको इन पैसों के बारे में बताते हैं. ईडी को बरामद पैसे जब्त करने का अधिकार होता है. हालांकि ये पैसे वो अपने साथ नहीं रखते हैं. प्रोटोकॉल के अनुसार जब पैसे बरामद किये जाते हैं तो जिसके यहां से पैसे बरामद हुए, उसे पूरा मौका दिया जाता है कि वह अपनी बात रखे और पैसों का स्त्रोत बताये. यदि सामने वाला ईडी को पैसों के स्‍त्रोत के बारे में बताने में अक्षम होता है तो उस पैसे को अवैध मान लिया जाता है.

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जांच एजेंसी ईडी पैसों को सीज करती है. ईडी मनी लॉड्रिंग एक्‍ट यानी PMLA के तहत ये कार्रवाई करती है. इसके बाद ईडी स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों को पैसों की गिनती करने के लिए कॉल करते हैं. अधिकारी पैसों की गिनती के लिए नोटों की गिनती वाली मशीन लेकर पहुंचते हैं. एक स्‍वतंत्र अधिकारी की देखरेख में अब पैसों को बॉक्‍स में सील किया जाता है. इसके बाद सील का मेमोरी दिया जाता है. इसके बाद इन पैसों को स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया के ऑफिस में भेज दिया जाता है. यह बैंक में Personal Deposit (PD) अकाउंट में रखा जाता है जो जांच एजेंसी का होता है. ये इसके बाद सेंटर गर्वमेंट की ट्रेजरी में जमा हो जाता है.

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जो भी पैसे जब्त किये जाते हैं उसे ईडी खर्च नहीं कर सकती है. इन पैसों को ना ही बैंक और ना ही सरकार खर्च कर सकती है. ईडी एक अनंतिम कुर्की आदेश तैयार करती है. इसे जारी भी करती है. छह महीने में कुर्की की पुष्टि करने के लिए एक निर्णायक प्राधिकारी की आवश्यकता होती है. इस सारी कार्रवाई को करने का उद्देश्‍य यह है कि आरोपी जब्त की गयी नकदी का इस्‍तेमाल नहीं कर सके. एक बार जब कुर्की कर ली जाती है उसके बाद से केस समाप्त होने तक पैसा बैंक में पड़ा रहता है. यदि आरोपी को दोषी ठहराया जाता है, तो नकद राशि केंद्र की संपत्ति बन जाती है और यदि आरोपी को अदालत द्वारा बरी कर दिया जाता है, तो नकद राशि वापस कर दी जाती है.

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Amitabh Kumar

लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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