बजट: बिहार को मिलेगा आठ हजार करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त कर्ज, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर

Union Budget 2022-23: राजकोषीय प्रबंधन के मुद्दे पर राज्यों को एक बड़ी राहत की घोषणा की गयी है. वित्त मंत्री ने राज्यों को 1.00 लाख करोड़ रुपया ब्याज मुक्त ऋण 50 वर्षों के लिए उपलब्ध कराने की घोषणा की है.
डा बख्शी अमित कुमार सिन्हा, अर्थशास्त्री
यह एनडीए–2 का तीसरा बजट है जो मुख्य रूप से तीन उद्देश्यों को ध्यान में रख कर बनाया गया है. उद्देश्य हैं :आर्थिक विकास के साथ समग्र कल्याण यानी ‘सबका साथ–सबका विकास, अर्थव्यवस्था को डिजिटल प्लेटफार्म पर ले जाना, स्वच्छता तथा जलवायु कार्ययोजना को बढ़ावा देना एवं सार्वजनिक पूंजी निवेश की सहायता से निजी निवेश आरंभ करना. इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए 39.45 लाख करोड़ रुपये का बजट रखा गया जो पिछले वर्ष से 13.3 प्रतिशत ज्यादा है. इस बजट में पूंजीगत निवेश पर विशेष जोर दिया गया है और 10.7 लाख करोड़ प्रभावी पूंजीगत व्यय़ के रूप में व्यय होना है. यह पूरे जीडीपी का 4.1 प्रतिशत है. यह बजट देश की अर्थव्यवस्था को तेजी से बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
राजकोषीय प्रबंधन के मुद्दे पर राज्यों को एक बड़ी राहत की घोषणा की गयी है. वित्त मंत्री ने राज्यों को 1.00 लाख करोड़ रुपया ब्याज मुक्त ऋण 50 वर्षों के लिए उपलब्ध कराने की घोषणा की है. साथ ही 8.17 लाख करोड़ रुपया सभी राज्यों को केंद्रीय कर में हिस्सेदारी के रूप में मिलेगा. बिहार को ब्याज मुक्त ऋण करीब आठ हजार करोड़ रुपये प्राप्त होंगे, वही 82,139 करोड़ रुपये केंद्रीय कर में हिस्सेदारी के रूप में मिलेंगे. देश में व्याप्त आर्थिक-सामाजिक विषमता को दूर करने के लिए इस बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया है.
देश के प्रत्येक गांव को ऑप्टीकल फाइबर केबल से जोड़ कर डिजिटल क्रांति लाने का प्रयास है जो गांव को बाजार से जोड़ेगा. इसी पहल में अगला कदम सरकार ने डिजिटल शिक्षा और डिजिटल स्वास्थ्य के लिए अपनाया है. इस पहल से ग्रामीण सुदूर वंचित बच्चे आसानी से शिक्षा ग्रहण कर पाएंगे तथा जरूरत मंद स्वास्थ्य सलाह ले पाएंगे. हर कक्षा के लिए एक चैनल कार्यक्रम शिक्षा से वंचित बच्चों को आसानी से उनकी भाषा में शिक्षा प्राप्त कराने का माध्यम बनेगा. सीमावर्ती क्षेत्र के गांवों के विकास को मॉडल ग्राम के रूप में विकसित किया जाना है, जिसमें नेपाल से लगे गांवों को विकसित करने की योजना है.
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कृषि के क्षेत्र में बिहार को जैविक खेती, कृषि आधुनिकीकरण तथा खरीददारी में पारदर्शिता के द्वारा लाभ मिलेगा. इसके अंतर्गत गंगा नदी के पांच किमी के क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा देना है. फसल खरीद के अंतर्गत पारदर्शिता के साथ क्रय राशि का 75 प्रतिशत भुगतान 10 दिन के अंदर करना है और बाकी 25 प्रतिशत भुगतान अंत में देना है. फसल विज्ञान के लिए पहली बार 19,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.
बिहार के लिए ‘वन रेलवे स्टेशन–वन प्रोडक्ट’ एक अच्छा कदम है. इससे बिहार अपने उत्पाद को इस प्लेटफार्म पर आसानी से बेच सकता है. यह योजना रेल तथा डाक विभाग के सहयोग से कार्यान्वित होना है. इससे बिहारी उद्यमी को प्रोत्साहन मिलेगा. इसके अतिरिक्त 100 कार्गो टर्मिनल से भी बिहार को लाभ होगा. शहरी क्षेत्र के लिए मल्टीमॉडल शहर परिवहन का प्रावधान किया गया है. साथ ही 2–टीयर/3–टीयर शहरों के लिए राज्य में शहरी प्लानिंग से लेकर ट्रांजिट तक केंद्रीय सहायता का प्रावधान है. बजट प्रावधान देश की अर्थव्यवस्था को उच्च आर्थिक विकास का लक्ष्य हासिल करने में कारगर साबित होगा. राष्ट्रीय स्तर पर 9.2 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि आकलन देश के लिए एक सकारात्मक संकेत है. बिहार भी 10 प्रतिशत से ऊपर की आर्थिक वृद्धि दर को हासिल करने की दिशा में अग्रसर होगा.
बजट से उम्मीद थी कि किसान सम्मान निधि योजना की सहायता राशि को बढ़ा कर 10,000 रुपये किया जायेगा. राज्य सरकार के लिए जीएसडीपी का पांच प्रतिशत तक राजकोषीय घाटा का अवसर प्रदान कर आर्थिक विकास को और गति प्रदान किया जा सकता था. बिहार जैसे वंचित राज्यों की केंद्र प्रायोजित योजना में हिस्सेदारी 80:20 करना चाहिए था. पिछड़े राज्यों को राजस्व घाटा से निबटने हेतु विशेेष सहायता मिलनी चाहिए थी.
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By Prabhat Khabar News Desk
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