स्मार्टफोन अलर्ट ने वेनेजुएला में बचायी हजारों की जान

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Venezuela earthquakes

वेनेजुएला में भूकंप

Venezuela : भूकंप उन प्राकृतिक आपदाओं में से है, जो बिना किसी पूर्व सूचना के आता है. पर वेनेजुएला में आये भूकंप के दौरान एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया. जमीन हिलने से कुछ क्षण पहले लाखों लोगों के एंड्रॉयड स्मार्टफोन की स्क्रीन पर संदेश आया कि कुछ ही सेकंड में तेज झटके महसूस हो सकते हैं.

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Venezuela : हाल ही में वेनेजुएला के उत्तर-मध्य तटीय क्षेत्र में कुछ ही क्षणों के अंतराल पर 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो बेहद शक्तिशाली भूकंप आये. एक के बाद एक आने वाले दो बड़े भूकंपों ने पूरे क्षेत्र को बुरी तरह हिला दिया-ऊंची-ऊंची इमारतें ढेर हो गयीं, सड़कें टूटने लगीं, लाखों लोग बेघर हो गये और घबराकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे. वेनेजुएला पृथ्वी की दो अत्यंत सक्रिय टेक्टोनिक प्लेट्स-कैरेबियन प्लेट और दक्षिण अमेरिकी प्लेट-की सीमा पर स्थित है. ये विशाल चट्टानी प्लेटें लगातार बहुत धीमी गति से एक-दूसरे के सापेक्ष खिसकती रहती हैं. इस क्षेत्र में कई स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट मौजूद हैं, जिनके खिसकने से अत्यधिक शक्तिशाली और उथले भूकंप उत्पन्न होते हैं. ये दोनों भूकंप भी इसी प्रकार के थे.


भूकंप उन प्राकृतिक आपदाओं में से है, जो बिना किसी पूर्व सूचना के आता है. पर वेनेजुएला में आये भूकंप के दौरान एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया. जमीन हिलने से कुछ क्षण पहले लाखों लोगों के एंड्रॉयड स्मार्टफोन की स्क्रीन पर संदेश आया कि कुछ ही सेकंड में तेज झटके महसूस हो सकते हैं. यह संदेश लोगों के मन में बड़ा प्रश्न उठाता है कि क्या स्मार्टफोन वास्तव में हमारी जान बचा सकता है? इसका उत्तर है- हां, कई परिस्थितियों में यह संभव है. चेतावनी मिलने का समय भले ही बहुत कम था, पर आपदा प्रबंधन की दृष्टि से यही कुछ सेकंड बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं.

यही कुछ सेकंड लोगों को सही निर्णय लेने, स्वयं को सुरक्षित करने, संभावित नुकसान को कम करने और जीवन बचाने की संभावना कई गुना बढ़ा सकते हैं. वेनेजुएला की इस घटना ने दिखाया कि स्मार्टफोन अब केवल बातचीत, संदेश भेजने, इंटरनेट और मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गया है. यह अब आपदा के समय लोगों की जान बचाने वाला एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण भी बनता जा रहा है. आज भी दुनिया में ऐसी कोई वैज्ञानिक तकनीक उपलब्ध नहीं है, जो यह निश्चित रूप से बता सके कि किस दिन, किस समय और किस स्थान पर भूकंप आयेगा. परंतु गूगल द्वारा विकसित एंड्रॉयड आधारित भूकंप चेतावनी प्रणाली भूकंप शुरू होते ही उसके प्रारंभिक संकेतों को पहचान कर लोगों तक कुछ सेकंड पहले चेतावनी पहुंचा सकती है.


दरअसल, अधिकांश स्मार्टफोन में एक अत्यंत छोटा, पर अत्यधिक संवेदनशील सेंसर लगा होता है, जिसे ‘एक्सेलेरोमीटर’ कहा जाता है. यह सेंसर धरती में होने वाले अत्यंत सूक्ष्म कंपन को भी महसूस कर सकता है. जब किसी क्षेत्र में एक साथ बड़ी संख्या में स्मार्टफोन लगभग एक ही समय पर असामान्य कंपन दर्ज करते हैं, तो वे यह जानकारी गूगल के सर्वर तक भेज देते हैं. सर्वर पर पहुंचने वाले इन लाखों संकेतों का विश्लेषण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) और मशीन लर्निंग (एमएल) की सहायता से किया जाता है. यदि स्मार्टफोन से प्राप्त आंकड़े एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं, तो एआइ/एमएल कुछ ही सेकंड में यह निष्कर्ष निकाल लेता है कि भूकंप शुरू हो चुका है और तुरंत चेतावनी संदेश संभावित प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के मोबाइल फोन पर भेज देता है.

दरअसल, भूकंप के समय पृथ्वी के भीतर से विभिन्न प्रकार की भूकंपीय तरंगें निकलती हैं. इनमें सबसे पहले निकलने वाली ‘पी-तरंगें’ (प्राथमिक या दाब तरंगें) भूकंप का पहला संकेत होती हैं. ये धरती में हल्का कंपन उत्पन्न करती हैं. सामान्यतः इनसे बहुत अधिक नुकसान नहीं होता है. इनकी गति लगभग छह से आठ किलोमीटर प्रति सेकंड होती है, इसलिए ये सबसे पहले प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचती हैं और स्मार्टफोन इन्हें पहचान लेते हैं. पी-तरंगों के कुछ सेकंड बाद ‘एस-तरंगें’ (द्वितीयक या कतरनी तरंगें) पहुंचती हैं. इनकी गति लगभग तीन से चार किलोमीटर प्रति सेकंड होती है. अर्थात ये पी-तरंगों की तुलना में काफी धीमी होती हैं, पर इनकी शक्ति कहीं अधिक होती है. एस-तरंगें धरती को अधिक तीव्रता से हिलाती हैं. चूंकि पी-तरंगें एस-तरंगों से कहीं तेज चलती हैं, इसलिए उनके बीच कुछ सेकंड का अंतर होता है. यही कुछ सेकंड इस तकनीक के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. कई बार लोगों को केवल 10 से 15 सेकंड का समय मिलता है, जबकि कुछ परिस्थितियों में 30 से 40 सेकंड तक की चेतावनी भी मिल सकती है.


दुनियाभर में वैज्ञानिक पृथ्वी अवलोकन प्रणाली से प्राप्त भूमि सतह तापमान के आंकड़ों का अध्ययन कर रहे हैं. इसी प्रकार ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस/जीपीएस) की सहायता से पृथ्वी की सतह में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों और प्लेटों की गतिविधियों की निगरानी की जा रही है. कुछ मामलों में यह पाया गया है कि बड़े भूकंप से पहले पृथ्वी की सतह के तापमान में असामान्य परिवर्तन और धरातल में अत्यंत सूक्ष्म विकृतियां उत्पन्न हो सकती हैं. हालांकि, इन संकेतों के आधार पर अभी विश्वसनीय भविष्यवाणी करना संभव नहीं हुआ है. पर हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका स्मार्टफोन, अब धीरे-धीरे व्यक्तिगत सुरक्षा और आपदा प्रबंधन का भी महत्वपूर्ण साधन बनता जा रहा है. हम आपदाओं को रोक नहीं सकते, पर विज्ञान और तकनीक की सहायता से उनके प्रभावों को कम अवश्य कर सकते हैं. संभवत:, निकट भविष्य में स्मार्टफोन मानव सुरक्षा के सबसे प्रभावी उपकरणों में से एक बन जाये. आपदाओं का सामना मानव बुद्धिमत्ता, सामूहिक प्रयास और समय पर प्राप्त जानकारी से ही संभव है.
(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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पीके जोशी

लेखक के बारे में

By पीके जोशी

सेंटर फॉर स्पेस साइंस एंड टेक्नोलोजी एजूकेशन इन एशिया एंड पैसिफिक से संबद्ध रहे हैं.

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