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विदेश मंत्री का संदेश

Updated at : 25 Feb 2025 6:45 AM (IST)
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S Jaishankar

विदेश मंत्री एस जयशंकर

S Jaishankar : विदेश मंत्री वाराणसी में काशी-तमिल संगमम 3.0 में भाग लेने आये थे, जिसमें उनके साथ अमेरिका और यूरोप से 50 देशों के राजदूतों और कूटनीतिज्ञों ने हिस्सा लिया. शाम को उन्होंने आइआइटी, बीएचयू में छात्रों को संबोधित किया.

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S Jaishankar : वाराणसी में आइआइटी के छात्रों को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जिस तरह यह कहा कि भारत अपने फैसलों पर विदेशी असर नहीं चाहता, उसे भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में पिछले कुछ दिनों में आये बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है. उन्होंने कहा कि चूंकि भारत पर लंबे समय तक विदेशियों का राज रहा, इसलिए अब वह किसी ऐसी विदेशी ताकत से बंधा नहीं रहना चाहता, जहां हमारे फैसले लेने पर उनका बहुत ज्यादा असर हो.

विदेश मंत्री वाराणसी में काशी-तमिल संगमम 3.0 में भाग लेने आये थे, जिसमें उनके साथ अमेरिका और यूरोप से 50 देशों के राजदूतों और कूटनीतिज्ञों ने हिस्सा लिया. शाम को उन्होंने आइआइटी, बीएचयू में छात्रों को संबोधित किया. उनका कहना था कि भारत जैसे बड़े देशों के इतने सारे हित होते हैं कि उन्हें सभी मुद्दों पर दूसरे देशों से बांधा ही नहीं जा सकता. साफ है कि हर देश के साथ कुछ मुद्दों पर सहमति होती है, तो कुछ मुद्दों पर असहमति भी होती है. ऐसी स्थिति में हमें अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ना होगा. दरअसल, अमेरिका के साथ अवैध प्रवासियों की वापसी के अलावा यूएसएड का मुद्दा भी है.

अमेरिका के अलावा बांग्लादेश के साथ भी हमारे रिश्ते जटिल बने हुए हैं. वैश्विक परिदृश्य में अपना महत्व बनाये रखने के साथ-साथ दूसरे देशों से बेहतर संबंध बनाये रखने की चुनौती के बारे में विदेश मंत्री ने दो टूक कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रासंगिकता अपनी चुनौतियों के साथ आती है. अगर आप प्रासंगिक हैं, तो आपके साथ समस्याएं आयेंगी. जब वह कहते हैं कि राष्ट्र की गतिविधियों के हर पहलू का एक वैश्विक आयाम है, तब यह समझना थोड़ा भी मुश्किल नहीं कि भारत जैसे विशाल देश के लिए भीतरी और बाहरी परीक्षाओं से निपटना वाकई कितना जटिल होता है.

दूसरी तरफ यह भी सच्चाई है कि आपका कोई दुश्मन नहीं हो सकता और महत्वहीन हो सकते हैं. अलबत्ता परस्पर जुड़ी दुनिया में वैश्विक जुड़ाव को उन्होंने आवश्यक बताया. उनके मुताबिक, विश्व बंधुत्व की पूरी अवधारणा यही है कि एक देश कैसे अपने दोस्तों को बढ़ा सकता है और अपनी समस्याएं कम कर सकता है. इसके लिए विश्वसनीयता की आवश्यकता होती है. विदेश मंत्री का यह संबोधन वाकई महत्वपूर्ण है. कूटनीति का यह पाठ सिर्फ बीएचयू के छात्रों के लिए नहीं, उन सभी के लिए मूल्यवान और प्रासंगिक है, जो भारत की प्रगति और उसकी चुनौतियों के बारे में जानने-समझने की इच्छा रखते हैं.

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