जीएसटी सुधार से आम आदमी को राहत

Edited by Rajneesh Anand
Updated:
विज्ञापन

जीएसटी सुधार की घोषणा

GST reform : कम टैक्स देने से वे कहीं ज्यादा खरीदारी कर सकेंगे. सीमेंट पर टैक्स घटने से रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी आयेगी. इससे सर्विस सेक्टर को भी सहारा मिलेगा, जिसे भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है.

विज्ञापन

GST reform : आखिरकार काफी जद्दोजहद के बाद केंद्र सरकार ने जीएसटी की दरों में महत्वपूर्ण कटौती की घोषणा कर ही दी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के मॉनसून सत्र में जनता को आश्वस्त किया था कि जीएसटी की दरें घटायी जायेंगी, जो उनके लिए दिवाली का उपहार होगा. वह अपनी बात पर खरे उतरे और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उनकी बात मानते हुए जीएसटी काउंसिल की बैठक में जीएसटी की दर में भारी कटौती की घोषणा कर दी. यह आसान काम नहीं था और न ही पूरी तरह से केंद्र सरकार के हाथ में था, क्योंकि जीएसटी काउंसिल में सभी राज्यों के प्रतिनिधि होते हैं.

उनमें से कई इस तरह की कटौतियों का विरोध कर रहे थे. उन्हें लग रहा था कि इससे उनके राजस्व पर बुरा असर पड़ेगा. इसलिए उन्होंने इसका पुरजोर विरोध किया, लेकिन भाजपा तथा एनडीए के मुख्यमंत्रियों के समर्थन से यह संभव हो गया. विपक्ष के वित्त मंत्री अब भी इस फैसले के खिलाफ प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं. पश्चिम बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने तो कहा कि इससे 47,700 करोड़ रुपये का धक्का लगेगा. वैसे राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीमा पर टैक्स हटाने का स्वागत किया और इसे अपनी पार्टी की नैतिक जीत बताया. दूसरी ओर कांग्रेस हमेशा की तरह हमलावर रही तथा उसने इस घोषणा की टाइमिंग पर सवाल उठाये.

उसकी तरफ से पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस आठ साल से टैक्स घटाने की मांग कर रही थी. उन्होंने पूछा कि क्या जीएसटी की दरों में कटौती सुस्त विकास को लेकर की गई है? या फिर बढ़ते हुए घरेलू कर्ज को लेकर? या घरेलू बचत में गिरावट के कारण? जबकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कहा कि जीएसटी सुधार का ट्रंप के टैरिफ से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि हम इस पर डेढ़ साल से काम कर रहे थे. इस पर चूंकि काफी चर्चा हो चुकी है, इसलिए अब राजनीति की गुंजाइश नहीं है.


जाहिर है, जीएसटी की दरों में कटौती अब सच्चाई है. जीएसटी काउंसिल ने व्यापक सुधारों के तहत पांच और 18 प्रतिशत की दो-स्तरीय टैक्स संरचना को मंजूरी दे दी. यह व्यवस्था आगामी 22 सितंबर से लागू होगी. परिषद के फैसलों के अनुसार अब रोजमर्रा के सामान, खाने-पीने की वस्तुओं, कारों, ट्रकों, सीमेंट जैसी चीजों पर टैक्स या तो खत्म कर दिया गया है या घटा दिया गया है. इससे ग्राहकों खासकर मध्यवर्ग को काफी फायदा होने वाला है.


कम टैक्स देने से वे कहीं ज्यादा खरीदारी कर सकेंगे. सीमेंट पर टैक्स घटने से रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी आयेगी. इससे सर्विस सेक्टर को भी सहारा मिलेगा, जिसे भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. जीवन रक्षक दवाओं पर टैक्स हटाकर जीएसटी परिषद ने बड़ा कदम उठाया है. इसी तरह स्वास्थ्य बीमा पर 18 फीसदी के भारी-भरकम टैक्स को शून्य पर ले जाने से जनता को तो फायदा होगा ही, बीमा क्षेत्र को भी लाभ होगा. इससे इस क्षेत्र में रोजगार की संभावना भी बढ़ेगी क्योंकि भारत में अब भी 30 फीसदी लोगों के पास ही बीमा है.

शेष लोग किसी भी तरह के सुरक्षा कवच से वंचित हैं. ट्रांसपोर्ट और टूरिज्म ऐसे क्षेत्र हैं, जो बड़ी तादाद में रोजगार देते हैं और इन पर टैक्स घटाकर इन्हें प्रोत्साहित किया गया है. इससे पर्यटन और बढ़ेगा तथा सरकार को मिलने वाले टैक्स में भी वृद्धि होगी. प्रीपेड तथा पोस्टपेड मोबाइल सेवाओं पर टैक्स की दर घटने से कम आय वाले लोगों को राहत मिलेगी, तो इंटरनेट और डीटीएच की दरें घटने से युवा वर्ग को राहत होगी. यानी समाज के हर वर्ग को राहत देने की कोशिश की गयी है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से मुद्रास्फीति की दर में 1.1 फीसदी की कमी आयेगी.

जीएसटी की दरों में कटौती के फैसले का स्वागत शेयर बाजार ने किया. निवेशक भी इस फैसले से खुश हैं. दरअसल बाजार में मांग की कमी दिख रही थी और यह देखते हुए, कि भारतीय अर्थव्यवस्था खपत पर आधारित है, यह कदम उत्साहवर्धक है. दरअसल इस समय अर्थव्यवस्था को एक एक बूस्टर की जरूरत थी, जो उसे मिल गया है. इससे खरीदारी बढ़ेगी और उसका असर मैन्युफैक्चरिंग पर पड़ेगा, जो अंततः रोजगार बढ़ायेगा. इससे अर्थव्यवस्था के प्रति निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और जीडीपी विकास की दर ऊंची रहेगी, जो इस समय कुलांचे भर रही है, लेकिन जिस पर ट्रंप के टैरिफ का खतरा मडरा रहा है. आयकर में भारी छूट के बाद जीएसटी में बड़ी राहत न केवल महंगाई को नियंत्रित करेगी, बल्कि मध्यवर्ग की खपत की क्षमता को बढ़ावा देगी. लोकतंत्र में टैक्स वसूली ही सब कुछ नहीं है, टैक्स में सुधार करना और उसे जनता के मनमाफिक बनाना भी जरूरी है. जीएसटी काउंसिल ने यह बड़ा कदम उठाकर आर्थिक सुधारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जतायी है.


पिछले कुछ समय से जीएसटी में सुधार की बहुत मांग की जा रही थी और पक्ष तथा विपक्ष के सांसद भी मुखर हो रहे थे. दरअसल कुछ वस्तुओं पर टैक्स की दरों में विसंगति थी, तो कुछ में अधिकता थी. जैसे, दो तरह के जो सामान मिलकर एक उत्पाद होते हैं, उन पर अलग-अलग टैक्स दरें हैं, जो कारोबारियों के लिए परेशानी का कारण है. जैसे, रेस्तरां में रोटी पर कम टैक्स है, तो परांठे पर ज्यादा. बिना एसी वाले रेस्तरां के लिए अलग दर है, तो एसी वाले के लिए अलग. खुले सामान पर कोई टैक्स नहीं है, लेकिन पैकेट में आते ही उस पर टैक्स लगेगा. ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं, जो जीएसटी की विसंगतियां के बारे में बताते हैं. लेकिन अब नयी घोषणा के बाद सभी तरह की विसंगतियां खत्म हो गयी हैं.

जीएसटी के जरिये कर संग्रह का जो लक्ष्य रखा गया था, वह काफी हद तक पूरा हो गया है. पिछले पांच साल में जीएसटी वसूली दोगुनी हो चुकी है. वर्ष 2024-25 में कुल जीएसटी वसूली 22.08 लाख करोड़ रुपये हो गयी है, जो 9.4 प्रतिशत की दर से बढ़ी है. यह भी एक कारण है कि सरकार टैक्स में कमी करने को तैयार हो गयी. अब सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि कंपनियां, कारोबारी, दुकानदार, रेस्तरां मालिक टैक्स में कटौती का फायदा ग्राहकों को पहुंचायें. पिछली बार यह देखा गया था कि इसका फायदा खुद कारोबारी अपने सामान या सेवाओं की कीमतें बढ़ाकर हड़प लेते हैं. उम्मीद करनी चाहिए कि अब ऐसा नहीं होगा.
(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

विज्ञापन
Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola