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क्वांटम मिशन: प्रौद्योगिकी में लंबी उड़ान

Updated at : 05 May 2023 7:43 AM (IST)
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क्वांटम मिशन: प्रौद्योगिकी में लंबी उड़ान

एक ऐसी कंप्यूटर व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही थी, जो तीव्र हो, जिसमें बहुआयामी प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जा सके, जो बिग डेटा को समाहित कर सके और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिसकी हैकिंग न हो सके.

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बीते दशकों में इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर के विकास के साथ कंप्यूटर प्रौद्योगिकी में भारी सुधार हुआ है, जिसके चलते संचार, स्वास्थ्य, ऊर्जा, ऑटोमोबाइल, अंतरिक्ष आदि में अभूतपूर्व प्रगति हुई. लेकिन इस विकास की अपनी सीमाएं रहीं. इसकी बड़ी समस्या यह रही कि कंप्यूटरों को विभिन्न प्रकार के वायरस और मैलवेयर भेजकर या हैक कर कब्जाया जा सकता है. इससे पूरी व्यवस्था ठप्प हो सकती है. वित्तीय धोखाधड़ी तो रोजमर्रा का विषय है.

इससे देशों की सुरक्षा पर भी लगातार खतरा मंडरा रहा है. क्वांटम प्रौद्योगिकी कंप्यूटर प्रणाली में एक बड़े बदलाव और विकास के रूप में देखी जा रही है, जिससे कंप्यूटरों को अधिक तीव्र, प्रभावी और सुरक्षित बनाया जा सकता है. अप्रैल 19, 2023 को केंद्रीय कैबिनेट द्वारा नेशनल क्वांटम मिशन के लिए 6,003 करोड़ रुपये की अनुमति के बाद भारत दुनिया में सातवां ऐसा देश बन गया है, जिसका अपना क्वांटम मिशन है.

अभी तक अमेरिका, ऑस्ट्रिया, फिनलैंड, फ्रांस, कनाडा और चीन का ही अपना समर्पित क्वांटम मिशन है. इस विषय की शुरुआत दिसंबर 2018 में हुई थी, जब मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में ‘नेशनल मिशन ऑन साइबर फिजिकल सिस्टम्स’ हेतु 3,660 करोड़ रुपये की घोषणा की गयी थी.

अप्रैल 2023 से प्रारंभ नेशनल क्वांटम मिशन के चार हिस्से होंगे. पहले तीन हिस्से हैं- क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन (संचार) एवं क्वांटम सेंसिंग (संवेदन) तथा चौथा हिस्सा उक्त तीनों कार्यक्रमों हेतु उपकरणों का निर्माण है. माना जा रहा है कि क्वांटम मिशन अपनाने वाले देश भी अभी शोध एवं विकास के स्तर पर ही हैं और इनमें से किसी ने क्वांटम तकनीकी का अनुप्रयोग शुरू नहीं किया है. ऐसे में क्वांटम मिशन अपनाने के कारण भारत भी इन देशों के समकक्ष आ गया है.

गौरतलब है कि विकसित देशों की बड़ी कंपनियों ने भविष्य की क्वांटम प्रौद्योगिकी में अरबों डालर का निवेश किया है, जिसमें अति सुरक्षित प्रतिरक्षा संचार से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं के अनुप्रयोगों, जैसे- अति सटीक एमआरआइ आदि, के संदर्भ में अनंत संभावनाएं हैं. जानकारों का कहना है कि इस मिशन को किसी एक व्यक्ति या संस्था द्वारा संचालित नहीं किया जा सकता क्योंकि यह प्रौद्योगिकी बहुत जटिल है.

इस कार्यक्रम को मिशन की तर्ज पर ले जाने की जरूरत है, जिसमें विभिन्न प्रकार की संस्थाओं एवं शोधकर्ताओं को मिलकर काम करना होगा. क्वांटम कंप्यूटर आधुनिक कंप्यूटरों की तुलना में बहुत तीव्र और अद्यतन हैं. इनमें उन जटिल समस्याओं को हल करने की क्षमता है, जो वर्तमान में हमारी पहुंच से परे हैं.

क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांतों पर आधारित होने के कारण क्वांटम एन्क्रिप्शन तकनीकें पारंपरिक एन्क्रिप्शन विधियों की तुलना में अधिक सुरक्षित होती हैं. इसलिए इस मिशन के कार्यों में एक महत्वपूर्ण कार्य है- लंबी दूरी का संचार. इस मिशन के फलस्वरूप संचार व्यवस्था में अभूतपूर्व क्रांति तो आयेगी ही, भारत विश्व में इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका में आ सकता है.

यह मिशन भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा संचालित किया जायेगा. इस मिशन के तहत 2023 और 2031 के आठ वर्षों के दौरान देश में क्वांटम प्रौद्योगिकी के लिए वैज्ञानिक एवं औद्योगिक शोध एवं विकास के कार्यों को गति दी जायेगी तथा इसके नवाचार हेतु वातावरण निर्माण किया जायेगा. गौरतलब है कि वर्तमान समय की कंप्यूटर प्रक्रिया दो अंकों- ‘एक’ और ‘शून्य’- पर आधारित है.

लेकिन इस मिशन के अंतर्गत बनाये जा रहे क्वांटम कंप्यूटरों की प्रक्रिया में ‘क्यूबिट्स’ या ’क्वांटम बिट्स’ इकाइयां रहेंगी. पहले पांच वर्षों में 50 से 100 क्यूबिट्स वाले कंप्यूटर बनेंगे और आठ वर्षों में 50 से 1000 क्यूबिट्स वाले कंप्यूटरों का निर्माण शुरू हो जायेगा. इन क्वांटम उपकरणों के निर्माण हेतु साजो-सामान तैयार करने में यह मिशन काम करेगा. इस प्रकार के कंप्यूटरों के निर्माण से सैटेलाइट आधारित संचार व्यवस्था संचालित होगी और अन्य देशों के साथ सुरक्षित क्वांटम संचार संभव हो पायेगा.

आम भाषा में यदि कहें, तो क्वांटम मिशन के द्वारा भारत में एक स्वदेशी और स्वावलंबी संचार व्यवस्था हेतु नवीनतम शोध तो संभव होगा ही, साथ ही साथ सूचनाओं का आदान-प्रदान भी अत्यधिक सुरक्षित हो जायेगा, जिससे कंप्यूटर प्रणाली को हैक नहीं किया जा सकेगा. चिकित्सीय निदान, पर्यावरणीय निगरानी और भू-वैज्ञानिक अन्वेषण जैसे उपयोगी क्षेत्रों में इसका उपयोग देखा जा रहा है.

पिछले कुछ समय से भारत ने डिजिटलाइजेशन में अभूतपूर्व प्रगति की है. जन-धन खाते, आधार और मोबाइल की तिकड़ी यानी ‘जैम ट्रिनिटी’ के कारण न केवल सरकार द्वारा लोक कल्याण सेवाओं की डिलीवरी हो रही है, बल्कि प्रत्यक्ष नकद राशि का लाभार्थियों को सीधा भुगतान भी संभव हो सका है. जो भुगतान पहले बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से या नकद लेन-देन से होते थे, अब बेहद आसान तरीके से यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस के माध्यम से होने लगे हैं.

उधर ई-कॉमर्स ने जहां लोगों का जीवन आसान बना दिया है, वहीं उसके रोजगार आदि पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के कारण उससे आशंकाएं भी निर्मित हो रही हैं. इसके समाधान के लिए सरकार ओपन नेटवर्क डिजिटल कॉमर्स के नाम से एक नयी व्यवस्था की ओर बढ़ रही है. शिक्षा, भूमि रिकॉर्ड, चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य हो या बड़े पैमाने पर नागरिकों को सेवा प्रदान करने का कार्य हो, सबको आधुनिकतम तरीके की कंप्यूटर व्यवस्था से ही अंजाम दिया जा सकता है.

लेकिन पिछले समय में कंप्यूटर व्यवस्था में वायरस, मैलवेयर आदि और अपराधियों व दुश्मन देशों द्वारा हैकिंग के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. इनसे निपटने के कारगर उपाय करने के बावजूद कई बार निजी व्यक्तियों, कॉरपोरेट, सरकारी संस्थानों, विभागों, वायुयान व्यवस्था आदि को भारी नुकसान वहन करने पड़े हैं.

एक ऐसी कंप्यूटर व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही थी, जो तीव्र हो, जिसमें बहुआयामी प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जा सके, जो बिग डेटा को समाहित कर सके और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिसकी हैकिंग न हो सके. ऐसे में क्वांटम फिजिक्स में हो रहे शोध और नवाचार से भारत अलग नहीं रह सकता.

भारत सरकार का राष्ट्रीय क्वांटम मिशन भारत को डिजिटलाइजेशन, शोध एवं विकास, अंतरिक्ष विज्ञान, नागरिक सेवाओं के बेहतर निष्पादन समेत कई मामलों में दुनिया से आगे ले जायेगा. कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में भारत की अभी तक की प्रगति यह इंगित कर रही है कि हम आगे आने वाले कुछ ही वर्षों में इस क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर सकते हैं.

(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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डॉ अश्विनी

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By डॉ अश्विनी

डॉ अश्विनी is a contributor at Prabhat Khabar.

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