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आज से ‘सेवा तीर्थ’ होगा प्रधानमंत्री कार्यालय

Updated at : 13 Feb 2026 11:35 AM (IST)
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PMO New Name

सेवा तीर्थ, प्रधानमंत्री कार्यालय

PMO : साउथ ब्लॉक 1947 में स्वतंत्र भारत की सत्ता का केंद्र बना. इसी भवन के पीएमओ से भारत के सभी प्रधानमंत्रियों ने देश की दिशा तय की. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (1947-1964) ने यहां से कार्य करना प्रारंभ किया.

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PMO : भारत की सत्ता के केंद्र में स्थित साउथ ब्लॉक, केवल एक भवन नहीं, यह स्वतंत्र भारत के राजनीतिक इतिहास का साक्षी है. यहीं से दशकों तक ऐसे फैसले लिये गये, जिन्होंने युद्धों की दिशा बदली, अर्थव्यवस्था को नयी राह दी और वैश्विक मंच पर भारत की पहचान गढ़ी. अब 13 फरवरी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में स्थानांतरित होने जा रहा है.

इस बदलाव के साथ एक ऐतिहासिक अध्याय का समापन होगा और सरकारी कामकाज का एक नया दौर आरंभ होगा. प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) 15 अगस्त, 1947 से 12 फरवरी, 2025 तक महान वास्तुकार हर्बर्ट बेकर द्वारा डिजाइन किये गये साउथ ब्लॉक से संचालित होता रहा. वर्ष 1911 में देश की राजधानी के कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित होने के बाद ब्रिटिश नौकरशाही के लिए साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक बनाये गये.


साउथ ब्लॉक 1947 में स्वतंत्र भारत की सत्ता का केंद्र बना. इसी भवन के पीएमओ से भारत के सभी प्रधानमंत्रियों ने देश की दिशा तय की. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (1947-1964) ने यहां से कार्य करना प्रारंभ किया. उनके ही कार्यकाल में भारत की विदेश और रक्षा नीतियों की बुनियाद पड़ी. गुटनिरपेक्ष आंदोलन की सोच यहीं आकार लेती रही. वर्ष 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध के दौरान नेहरू देर रात तक अपने इसी कार्यालय में रणनीति बनाते थे.

जवाहरलाल नेहरू के बाद लाल बहादुर शास्त्री ने इसी पीएमओ से देश का नेतृत्व किया. हरित क्रांति की नींव रखने में नॉर्मन बोरलॉग और डॉ एमएस स्वामीनाथन से उनकी महत्वपूर्ण बैठकों का केंद्र भी यही दफ्तर हुआ करता था. वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध के समय शास्त्री जी ने साउथ ब्लॉक को ही अपना अस्थायी निवास बना लिया था. इंदिरा गांधी (1966-1977, 1980-1984) के कार्यकाल में ही 1971 का ऐतिहासिक भारत-पाकिस्तान युद्ध लड़ा गया. परिणामस्वरूप बांग्लादेश का निर्माण हुआ. उस निर्णायक विजय की रणनीति भी इसी पीएमओ में बनी. दरअसल, 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान साउथ ब्लॉक भारत का नर्व सेंटर बन गया था. यहां प्रधानमंत्री कार्यालय और रक्षा मंत्रालय थे. एक कमरे में ‘वॉर रूम’ बनाया गया था, जहां पूरे युद्ध की रणनीति बनती थी और निगरानी होती थी. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ और अन्य शीर्ष सैन्य अधिकारियों की अहम बैठकें यहीं इसी पीएमओ में होती थीं.


राजीव गांधी (1984-1989) ने भी यहीं से तकनीकी आधुनिकीकरण की दिशा में कई कदम उठाये. वर्ष 1987 में, श्रीलंका में भारतीय शांति सेना (आइपीकेएफ) भेजने का निर्णय भी यहीं लिया गया. वर्ष 1990 के दशक में पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व में आर्थिक उदारीकरण की ऐतिहासिक प्रक्रिया भी यहीं शुरू हुई. वित्त मंत्री डॉ मनमोहन सिंह के साथ उनकी महत्वपूर्ण बैठकों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजार के लिए खोल दिया. वर्ष 1993 का भारत-चीन सीमा समझौता भी इसी दौर की उपलब्धि रही.

अटल बिहारी वाजपेयी (1998-2004) ने प्रधानमंत्री रहते साउथ ब्लॉक से पोखरण परमाणु परीक्षण का निर्णय लिया और कारगिल युद्ध के दौरान रणनीतिक नेतृत्व किया. उसके बाद डॉ मनमोहन सिंह (2004-2014) के कार्यकाल में भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौता (2008) हुआ, जिसने भारत को वैश्विक परमाणु व्यवस्था में नयी पहचान दिलायी. मुंबई हमलों (26/11) के बाद आतंकवाद के खिलाफ कड़ी रणनीति भी यहीं बनी. वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 2014 से अब तक साउथ ब्लॉक से ही कार्य कर रहे थे. उनके नेतृत्व में भारत ने विदेश और रक्षा नीति में अधिक सक्रिय और निर्णायक रुख अपनाया. वर्ष 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 का बालाकोट एयर स्ट्राइक और हाल के सैन्य अभियानों की रणनीति भी इसी पीएमओ में तैयार की गयी.


अब पीएमओ ‘सेवा तीर्थ’ में स्थानांतरित हो रहा है, जो सेंट्रल विस्टा परियोजना का हिस्सा है और जो 2026 तक पूरी तरह विकसित होगा. सेवा तीर्थ-1 में पीएमओ, सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ-3 में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय होगा. ‘इंडिया हाउस’ नामक आधुनिक कॉन्फ्रेंस हॉल में विदेशी अतिथियों से मुलाकात की जायेगी. अत्याधुनिक सुरक्षा, ओपन वर्कस्पेस और बेहतर समन्वय की सुविधाओं से युक्त यह परिसर रायसीना हिल के निकट स्थित है. प्रधानमंत्री का नया आवास भी पास ही में निर्मित हो रहा है. यह स्थानांतरण औपनिवेशिक विरासत से आगे बढ़ने का प्रतीक माना जा रहा है.

साउथ ब्लॉक को अब ‘भारत थ्रू द एजेस’ संग्रहालय के रूप में विकसित किया जायेगा. विदित हो कि ‘सेवा तीर्थ’ नाम सत्ता से अधिक सेवा की भावना को रेखांकित करता है. सरकार का मानना है कि यह कदम प्रशासन को अधिक कुशल, आधुनिक और पारदर्शी बनायेगा. साउथ ब्लॉक ने नेहरू से लेकर मोदी तक की भारत की यात्रा देखी है. अब सेवा तीर्थ से नयी कहानी लिखी जायेगी. पर जब भी स्वतंत्र भारत के पहले आठ दशकों का इतिहास लिखा जायेगा, साउथ ब्लॉक स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय का उल्लेख अनिवार्य रूप से किया जायेगा. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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विवेक शुक्ला

लेखक के बारे में

By विवेक शुक्ला

विवेक शुक्ला is a contributor at Prabhat Khabar.

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