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खानपान में बदलाव से मोटापे की मार झेलता देश

Updated at : 20 Aug 2025 5:15 AM (IST)
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Obesity

मोटापे की बढ़ती समस्या

Obesity : अध्ययन बताता है कि 1990 के दशक में भारत में मोटापे की समस्या सीमित और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहद कम थी. लेकिन वर्ष 2000 के बाद आर्थिक विकास के साथ-साथ खानपान में बदलाव, पैकेज्ड फूड, शुगर ड्रिंक्स की बढ़ती खपत और जंक फूड के प्रसार ने स्थिति बदल दी.

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Obesity : देश में मोटापा अब सिर्फ एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति के रूप में उभर रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन और इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च के हालिया अध्ययन के मुताबिक, 1990 में देश की वयस्क आबादी में मोटापे की दर नौ से दस फीसदी थी, जो 2025 तक बढ़कर 20 से 23 प्रतिशत तक पहुंच गयी है. तीन दशक में वजन बढ़ने की रफ्तार दोगुनी हो चुकी है और आज शहरी क्षेत्रों में हर चार में से एक व्यक्ति मोटापे से प्रभावित है.

अध्ययन बताता है कि 1990 के दशक में भारत में मोटापे की समस्या सीमित और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहद कम थी. लेकिन वर्ष 2000 के बाद आर्थिक विकास के साथ-साथ खानपान में बदलाव, पैकेज्ड फूड, शुगर ड्रिंक्स की बढ़ती खपत और जंक फूड के प्रसार ने स्थिति बदल दी. दरअसल 1990 के दशक की शुरुआत में अपने यहां खाद्य तेल की प्रति व्यक्ति औसत खपत सालाना 3.5 से चार लीटर थी, जो 2025 में बढ़कर 19 से 20 किलोग्राम सालाना हो गयी. यानी पिछले तीन दशकों में खाद्य तेल की प्रति व्यक्ति खपत लगभग पांच गुना बढ़ गयी है.

जबकि डब्ल्यूएचओ के मानकों के मुताबिक, एक स्वस्थ वयस्क के लिए महीने में 500-600 ग्राम खाद्य तेल का सेवन पर्याप्त है. इससे अधिक तेल के सेवन से मोटापा, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है. शहरीकरण, बड़े शहरों और महानगरों में ऑफिस की लंबी दिनचर्या, घटती आउटडोर गतिविधियां, असंतुलित आहार और बढ़ते तनाव भी बढ़ते मोटापे का कारण हैं. कम नींद और ज्यादा तनाव भी मोटापा बढ़ाते हैं. कुछ महीने पहले मेडिकल जर्नल ‘द लैसेंट’ ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया था कि देश में 2050 तक 25 साल से अधिक उम्र के 45 करोड़ लोग मोटापे से पीड़ित हो सकते हैं.

उस अध्ययन में मोटापे का कारण खान-पान और खराब लाइफस्टाइल को बताया गया था, साथ में इस पर भी चिंता जतायी गयी थी कि भारत में बच्चे भी मोटापे का शिकार हो रहे हैं. हाल के दौर में कई बार देशवासियों को मोटापे के खिलाफ सजग कर चुके प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भी बढ़ते मोटापे पर चिंता जतायी थी. इससे पहले विश्व स्वास्थ्य दिवस पर भी प्रधानमंत्री ने देशवासियों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और मोटापे से मुक्त जीवन जीने का आग्रह किया था. विशेषज्ञों के मुताबिक, संतुलित खानपान की आदत डालकर और शारीरिक गतिविधियों में भाग लेकर मोटापे से निपटा जा सकता है.

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