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सीमावर्ती क्षेत्र में इन्फ्रास्ट्रक्चर

Updated at : 10 Aug 2023 8:28 AM (IST)
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सीमावर्ती क्षेत्र में इन्फ्रास्ट्रक्चर

Ganderbal: Army convoy moves on Srinagar- Ladakh highway at Gagangeer, in Ganderbal district of Central Kashmir, Tuesday, Sept. 1, 2020. (PTI Photo)(PTI01-09-2020_000206B)

वार्ता की कोशिशें जारी रहनी चाहिए, लेकिन साथ ही सीमाई इलाकों में सेना की शीघ्र पहुंच को संभव बनाने के लिए हरसंभव उपाय किया जाना चाहिए. राष्ट्रीय सुरक्षा हमारा सर्वोपरि हित है.

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उत्तर और पूर्व में चीन के साथ भारत की 3488 किलोमीटर की सीमा लगती है. भारत से सटी सीमा पर चीन के साथ विवाद जारी है. विवाद को खत्म करने की कोशिशें भी जारी रहती हैं, इसके बावजूद तनाव में कमी नहीं आयी है. चीन का आक्रामक रुख भारत-चीन संबंध को सहज नहीं रहने देता है. गलवान घाटी का जख्म अभी भी भरा नहीं है. सीमा पर बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत ने सड़क आदि के निर्माण में तेजी दिखायी है, जो जरूरी भी है.

चीन से सटे सीमावर्ती इलाके में सड़क व इन्फ्रास्ट्रक्चर के सुधार में भारत काफी ध्यान दे रहा है. वर्ष 2014 से ऐसी कोशिशों में तेजी आयी है. इसका परिणाम यह हुआ है कि भारतीय सेना चीनी सेना के मूवमेंट पर नजर रखने और उनसे कुशलता से निपटने में सक्षम हुई है. हाल ही में विदेश मंत्री ने कहा कि भारत में सीमा पर इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास में होनेवाले खर्च में चार गुना वृद्धि हुई है. वर्ष 2013-14 में सीमा सड़क संगठन(बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन) का बजट 3782 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2023-24 में 14387 करोड़ रुपये का हो गया है.

वर्ष 2008-14 के दौरान 3610 किलोमीटर सड़क का निर्माण हुआ था, जबकि 2014-22 के दौरान 6806 किलोमीटर सड़क का निर्माण हो गया. सीमावर्ती क्षेत्र में तेजी से सड़क और सुरंग के निर्माण से फौजी टुकड़ियों के त्वरित मूवमेंट में सफलता मिली है. नेपाल-बिहार सीमा और नेपाल-उत्तर प्रदेश सीमा पर इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट बनाये गये हैं. इसी तरह के और चेकपोस्ट उत्तराखंड से सटी नेपाल सीमा पर भी बनाये जाने की योजना पर काम चल रहा है.

भूटान और असम के बीच रेल लिंक बनाने की दिशा में बात चल रही है. ध्यान देनेवाली बात यह है कि भूटान और चीन की आपस में कई दौर की वार्ता हो चुकी है. भारत को इस ओर भी नजर बनाये रखना चाहिए. म्यांमार की सीमा पर चुनौतीपूर्ण स्थिति है. म्यांमार ट्राइलैटेरल हाइवे भारत की एक महत्वाकांक्षी योजना है. इस पर भी काम चल रहा है. पूर्वी लद्दाख के इलाके में सैन्य तनाव कम करने के लिए भारत और चीन के बीच वार्ता जारी है.

इसी वर्ष अप्रैल में दोनों देशों के बीच कमांडर स्तर की बातचीत चुशूल-बोल्दो बॉर्डर मीटिंग पाइंट पर हुई थी. वार्ता की कोशिशें जारी रहनी चाहिए, लेकिन साथ ही सीमाई इलाकों में सेना की शीघ्र पहुंच को संभव बनाने के लिए हरसंभव उपाय किया जाना चाहिए. राष्ट्रीय सुरक्षा हमारा सर्वोपरि हित है. इसे ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनें और उसे शीघ्रता से कार्यान्वित किया जाए.

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