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बढ़ते तापमान का कहर

Updated at : 18 Mar 2025 6:00 AM (IST)
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heat wave

हीटवेव का अलर्ट जारी

Rising Temperatures : मौसम विभाग के मुताबिक, मध्य भारत के ऊपर उच्च दबाव का क्षेत्र बना हुआ है, जिस कारण हवा गर्म हो रही है. इसके अलावा आसमान साफ होने की वजह से सूर्य का रेडिएशन बहुत ज्यादा है.

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Rising Temperatures : मध्य मार्च में ही तापमान इस कदर बढ़ रहा है कि मौसम विभाग को देश के पांच राज्यों में हीटवेव का अलर्ट जारी करना पड़ा. उसने झारखंड और ओडिशा में रेड अलर्ट जारी किया है, तो छत्तीसगढ़, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में गर्म हवाएं चलने की चेतावनी दी है. झारखंड, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और महाराष्ट्र के विदर्भ में तापमान लगातार बढ़ रहा है. झारखंड में चाईबासा समेत सात जिलों में पारा 40 डिग्री के पार चला गया है, तो कुछ जिलों में गर्म हवा चलने के कारण येलो अलर्ट जारी किया गया है. पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर, बांकुड़ा, पश्चिम बर्दवान और बीरभूम में लू चल रही है. ओडिशा के कई जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की गयी है. ओडिशा के ही बौध शहर में रविवार को सर्वाधिक 43.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया.

मौसम विभाग के मुताबिक, मध्य भारत के ऊपर उच्च दबाव का क्षेत्र बना हुआ है, जिस कारण हवा गर्म हो रही है. इसके अलावा आसमान साफ होने की वजह से सूर्य का रेडिएशन बहुत ज्यादा है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत काम करने वाले जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय कार्यक्रम (एमपीसीसीएचएच) ने कहा है कि कुछ दिनों में देश के लगभग सभी हिस्से भीषण गर्मी की चपेट में आ सकते हैं. पिछले साल ऐसी गर्मी अप्रैल के महीने में महसूस की गयी थी.

जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान से उत्तराखंड जैसा अपेक्षाकृत ठंडा प्रदेश भी अछूता नहीं है. चमोली जिले के प्रसिद्ध हिल स्टेशन औली में कम बर्फबारी के कारण लगातार तीसरे साल नेशनल स्कीइंग और स्नोबोर्डिंग चैंपियनशिप रद्द करनी पड़ी. इस बार 16 से 19 मार्च तक वहां यह चैंपियनशिप थी. लेकिन आयोजकों का कहना है कि गर्मी पड़ने से बर्फ पिघल गयी, ऐसे में आयोजन संभव नहीं. यह चैंपियनशिप पहले जनवरी-फरवरी में होनी थी, पर तब भी बर्फबारी कम होने से उसे मार्च तक के लिए टाल दिया गया था. औली का यह हाल जलवायु परिवर्तन का ज्वलंत उदाहरण है.

मौसम विभाग का एक आंकड़ा बताता है कि पिछली गर्मी में देश के अलग-अलग राज्यों में हीटवेव के 536 दिन रिकॉर्ड किए गये थे, जो पिछले 14 साल में सबसे अधिक थे. जबकि इस साल हीटवेव की अवधि उससे ज्यादा दिनों तक रहने के आसार हैं. मौसम वैज्ञानिकों का यह आकलन सचमुच बहुत चिंतित करने वाला है कि हर साल बढ़ती गर्मी से आने वाले दिनों में हेल्थ इमरजेंसी जैसे हालात पैदा हो सकते हैं.

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