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Indian Railways : विकास की रेल

Updated at : 10 Oct 2025 8:49 AM (IST)
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Pamban Bridge

पंबन पुल

Indian Railways : ये मल्टी ट्रैकिंग परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'न्यू इंडिया' के विजन का हिस्सा हैं. इन सभी परियोजनाओं का काम पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत किया जायेगा. इन परियोजनाओं के जरिये कोयला, सीमेंट, स्टील, अनाज, कंटेनर आदि का परिवहन आसान हो जायेगा और सालाना करीब 78 मिलियन टन अतिरिक्त माल की ढुलाई संभव हो सकेगी.

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Indian Railways : हाल ही में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (सीसीइए) की बैठक में 24,634 करोड़ रुपये की चार मल्टी ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी गयी, जो ढांचागत विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है. इन परियोजनाओं के तहत महाराष्ट्र में वर्धा और भुसावल के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन का निर्माण होना है. यह ट्रैक 314 किलोमीटर लंबा होगा. ऐसे ही, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में गोंदिया-डोंगरगढ़ के बीच 84 किलोमीटर लंबी चौथी लाइन का निर्माण होगा. जबकि वडोदरा (गुजरात) और रतलाम (मध्य प्रदेश) के बीच 259 किलोमीटर की तीसरी और चौथी रेल लाइन बनेगी.

इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश में इटारसी-भोपाल-बीना के बीच 237 किलोमीटर की चौथी रेललाइन को मंजूरी दी गयी है. इन चार रेल परियोजनाओं से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात के 18 जिलों के लगभग 3,633 गांवों के 85 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा. इनमें दो आकांक्षी जिले मध्य प्रदेश का विदिशा और छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव भी हैं, जहां इन परियोजनाओं के जरिये नौकरी और स्वरोजगार के नये अवसर पैदा होने की उम्मीद है. इन चारों राज्यों में कुल 894 किलोमीटर नयी रेल पटरियां बिछायी जायेंगी. इससे माल ढुलाई से लेकर पैसेंजर ट्रैफिक तक सब कुछ तेज और आसान होगा. इन परियोजनाओं का एक उद्देश्य महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ के प्रमुख रूटों में भीड़भाड़ कम करना भी है.

ये मल्टी ट्रैकिंग परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘न्यू इंडिया’ के विजन का हिस्सा हैं. इन सभी परियोजनाओं का काम पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत किया जायेगा. इन परियोजनाओं के जरिये कोयला, सीमेंट, स्टील, अनाज, कंटेनर आदि का परिवहन आसान हो जायेगा और सालाना करीब 78 मिलियन टन अतिरिक्त माल की ढुलाई संभव हो सकेगी. सरकार का यह फैसला भारतीय रेलवे की माल ढुलाई क्षमता के अनुरूप ही है, जो 2024-25 में 1.6 अरब टन तक पहुंच गयी है.

दूसरी तरफ, ये परियोजनाएं सांची, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, भीमबेटका रॉक शेल्टर, हजारा फॉल्स और नावागांव नेशनल पार्क जैसे पर्यटन स्थलों को भी जोड़ेंगी. यही नहीं, ऊर्जा कुशल और पर्यावरण अनुकूल रेल परिवहन से कार्बन उत्सर्जन में 139 करोड़ किलोग्राम की और लगभग 28 करोड़ लीटर कच्चे तेल के आयात में कमी आयेगी. वर्ष 2030-31 तक इन परियोजनाओं के पूरी होने की उम्मीद है, जिससे नये भारत को नयी गति मिलेगी.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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