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रोजगार के विकल्प

Updated at : 10 Jun 2020 3:21 AM (IST)
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रोजगार के विकल्प

कामगारों के कौशल के सही इस्तेमाल से स्थानीय स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया जा सकेगा, जो आत्मनिर्भर भारत बनाने की आधारभूत आवश्यकता है.

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लॉकडाउन के पहले चरण की घोषणा के साथ प्रवासियों कामगारों के अपने गांव लौटने के सिलसिला शुरू हो गया था. अब तक लाखों श्रमिक औद्योगिक और व्यापारिक केंद्रों को छोड़ चुके हैं. हालांकि शहरों में कारोबारी गतिविधियों के फिर से चालू होने के कारण कोरोना संकट से पैदा हुई बेरोजगारी में कमी आयी है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अब इन श्रमिकों के लिए रोजगार की वैकल्पिक व्यवस्था करने की जरूरत भी बढ़ गयी है.

इसकी एक वजह तो यह है कि वापस लौटे कामगारों का तुरंत शहरों में लौटना संभव नहीं है और यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि उनका एक हिस्सा शायद लौटना भी न चाहे. हालांकि उनके काम पर लौटने के संतोषजनक संकेत मिलने लगे हैं, पर अर्थव्यवस्था को भी गति पकड़ने में कुछ समय लगना स्वाभाविक है.

बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत के महत्व को बनाये रखने तथा विकास की ओर अग्रसर होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भरता और स्थानीय उत्पादन व उपभोग पर जोर दिया है. ऐसे में गांवों में ही कामगारों को उनके कौशल के मुताबिक रोजगार के अवसर मुहैया कराना बहुत जरूरी है. प्रधानमंत्री कार्यालय इस दिशा में बड़ी पहल करते हुए ग्रामीण विकास, कृषि, पशुपालन, कौशल विकास और सड़क यातायात मंत्रालयों के साथ मिलकर एक बड़े कार्यक्रम की तैयारी कर रहा है.

इसके तहत कामगारों और उनके कौशल की जानकारी एकत्र करने, उन्हें समुचित प्रशिक्षण देने तथा उपयुक्त रोजगार उपलब्ध कराने की योजना है. ग्रामीण अर्थव्यवस्था लंबे समय से संकट में है तथा कृषि पर दबाव अधिक होने के कारण उसकी उत्पादकता का पूरा लाभ उठाने में बाधा है. हालांकि सरकार ने बीते सालों में कृषि आय बढ़ाने तथा ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की दिशा में कई कदम उठाया है, लेकिन विभिन्न कारकों के कारण आय और कारोबार का विस्तार अपेक्षित गति से नहीं हो पा रहा है.

इस स्थिति में वापस लौटे कामगारों का दबाव भी ग्रामीण आर्थिकी पर बढ़ा है. इन श्रमिकों की बेहतरी केंद्र सरकार की प्राथमिकता में है, इसका अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि वैकल्पिक रोजगार के कार्यक्रम की तैयारी प्रधानमंत्री कार्यालय के सीधे नेतृत्व में हो रही है. ग्रामीण रोजगार, सड़क निर्माण आदि अनेक क्षेत्रों में अवसर मुहैया कराने की प्रक्रिया तेजी से बढ़ रही है तथा विस्तृत कार्यक्रम के लागू होने का सिलसिला इसी महीने से शुरू हो जायेगा.

इस पहल में केंद्र और राज्य सरकारों की पहले से जारी योजनाओं को भी शामिल किया जा रहा है. औद्योगिक और कारोबारी गतिविधियों को पटरी पर लाने के लिए मांग में बढ़ोतरी सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है तथा इसके लिए हर स्तर पर आमदनी का मौका भी बनाना होगा. आबादी के मेहनतकश हिस्से को अगर काम मिले, तो वह विकास की नयी इबारत लिख सकता है. कामगारों के कौशल का भी सही इस्तेमाल कर स्थानीय स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया जा सकेगा, जो आत्मनिर्भर भारत बनाने की आधारभूत आवश्यकता है.

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संपादकीय is a contributor at Prabhat Khabar.

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