बंगाल में बीजेपी की जीत के सूत्रधार अमित शाह

Published at :06 May 2026 6:08 PM (IST)
विज्ञापन
Bengal Election Result

Bengal Election Result

Bengal Election Result: बंगाल चुनाव परिणाम में बीजेपी की जीत अप्रत्याशित नहीं था. इसके पीछे कई कारण थे. ममता बनर्जी की टीएमसी के शासन से जनता में असंतोष बढ़ा और बदलाव की लहर बनी. बीजेपी ने अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बूथ स्तर तक मजबूत संगठन और डेटा आधारित रणनीति अपनाई. 2024 लोकसभा के बाद से तैयारी तेज हुई और वोट शेयर बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया. कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और रोजगार जैसे मुद्दों पर प्रचार केंद्रित रहा.

विज्ञापन

Bengal Election Result: बंगाल में बीजेपी की जीत ना तो किसी जादू का परिणाम है और ना ही अप्रत्याशित ही है. इस परिणाम की अपेक्षा मीडिया, विपक्ष और यहां तक कि 15 साल शासन करने वाली टीएमसी को भी थी, क्योंकि सबको मालूम था कि बंगाल में परिवर्तन हो रहा है, और इस परिवर्तन के सूत्रधार कोई और नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह बन रहे हैं. कारण साफ था कि ममता बनर्जी की सरकार से लोग ऊब चुके थे और उससे मुक्ति का विकल्प केवल उन्हें बीजेपी ही नजर आ रही थी. तृणमूल ने अपने 15 साल के शासन में बंगाल को एक अराजक राज्य में बदल दिया था. जहां कानून की रोज धज्जियां उड़ाई जा रही थी.

बलात्कार और हत्या जैसी घटनाओं पर भी शासन संवेदनशील नजर नहीं आ रहा था. पुलिस प्रशासन का पूरी तरह राजनीतिकरण हो चुका था, और अधिकारी सत्ता से जुड़े अपराधियों को बचाने में लगे थे. राज्य सरकार केंद्र से बेवजह लड़ाई ठान कर बैठी थी, और यहां तक कि लोक कल्याण से जुड़ी योजनाओं को भी जनता तक नहीं पहुंचने देती थी. भ्रष्टाचार का बोलबाला ऊपर से नीचे तक था और मंत्री एवं अधिकारी सीधे घोटाले से जुड़े हुए थे. उसके बावजूद टीएमसी हर चुनाव जीत रही थी, क्योंकि चुनाव प्रक्रियां को उसने बंधक बना लिया था.

स्थानीय प्रशासन पूरी तरह तृणमूल के साथ था. विरोध में जो भी खड़ा होता था, उसे तृणमूल के गुंडे धमकाते-मारते थे और फिर भी किसी ने खिलाफ वोट देने की हिम्मत की तो जान से मार देने में भी नहीं हिचकते थे. तृणमूल के एजेंट गांव गांव, मुहल्ले-मुहल्ले सक्रिय थे और किसी भी अन्य पार्टी को घुसने की जगह नहीं देते थे. ऐसे में बीजेपी के संगठन को तैयार करना और तृणमूल के मुकाबले खड़े करना एक असंभव सा कार्य बन गया था. लेकिन ऐसे ही असंभव कार्यों को संभव करने की महारत गृह मंत्री अमित शाह की है.

अमित शाह ने पार्टी संगठन को हर स्तर पर तैयार करने और उसे अनुशासित कर चुनाव जीतने की मशीनरी में बदलने की कला गुजरात में ही विकसित कर ली थी. हर तरह के आकड़ों और तरीकों का उपयोग कर पार्टी के विस्तार को अंतिम बूथ तक ले जाने की महारत उन्हें गुजरात में ही हासिल गया था. पीएम मोदी के साथ मिलकर कर उन्होंने गुजरात के गांव-गांव तक बीजेपी का जनाधार विकसित किया. सहकारिता क्षेत्र से अपना राजनीतिक अभियान शुरू करने वाले अमित शाह पार्टी संगठन के विस्तार के लिए भी समर्पित कार्यकर्ताओं को टोली तैयार करते हैं. ज़मीनी स्तर पर विपक्ष के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए स्थानीय नेताओं का नेटवर्क तैयार करते हैं. वह एल.के. आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे वरिष्ठ नेताओं के भी चुनाव प्रभारी रह चुके हैं. अपने अनुभवों का पूरा उपयोग अमित शाह ने इस बार बंगाल में किया.

अपने विश्वस्त सहयोगियों चुनाव से महीनों पहले बंगाल भेजकर बीजेपी को एक मज़बूत राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित करने का अभियान अमित शाह ने 2024 के लोक सभा चुनाव के बाद ही शुरू कर दिया था. 2021 में पार्टी को जिन 77 सीटों पर सफलता मिली थी, उनमें वोट के अंतर को बढ़ाने और कम अंतर से हारने वाली सीटों को जीत में बदलने के गणित पर पार्टी के वरिष्ठ कार्यक्रयतों को लगा दिया था. पहले ही दिन से अमित शाह ने बंगाल में 150 से ज्यादा सीटें जितने का लक्ष्य कतीकर्ताओं के सामने रख दिया था.

2024 के लोकसभा चुनावों में केवल 12 सीटों पर मिली जीत की समीक्षा की गई और उसे आधार बनाकर पार्टी नई रणनीति में बदलाव किया ताकि 2026 में एक बड़ी वापसी सुनिश्चित की जा सके. शमिक भट्टाचार्य जैसे मुखर नेता को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया. लेकिन साठ ही अमित शाह ने इस बात का पूरा ख्याल रखा कि पुराने और अनुभवी नेताओं की उपेक्षा ना हो. संघ के साथ योजना बनाकर अमित शाह ने बंगाल के भद्रलोक यानि शहरीबुद्धिजीवीयों के बीच सघन प्रचार का काम शुरू किया. उत्तरी बंगाल के साथ तृणमूल के गढ़ वाले दक्षिण बंगाल पर भी फोकस किया गया. इससे सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस को उसके घर में ही घेरने में सफलता मिली.

अमित शाह हर चुनाव में बूथ-स्तरीय प्रबंधन को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं. बंगाल में भी इस पर बहुत मेहनत बीजेपी ने इस बार की. डेटा-आधारित चुनाव प्रबंधन की योजना बनाई और टीएमसी के दबदबे को खत्म कर दिया. सुवेंदु अधिकारी को पार्टी का एक प्रमुख चेहरा तो बनाया लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में बंगाली भाषी नेताओं को भी बड़े पैमाने पर उतार दिया. सबके सामने लक्ष्य साफ था कि इस बार बीजेपी के वोट शेयर को 2021 के 38.15 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 से 50 प्रतिशत तक लाना है.

बंगाल में कभी भी चुनाव शांतिपूर्ण नहीं हुआ. हर चुनाव में हिंसा का दौर देखा गया. तृणमूल ने भी पूरे राज्य में भय का माहौल कायम कर रखा था. चुनाव के बाद क्या होगा, इस चिंता में लोग अपनी पसंद की पार्टी को वोट देने से हिचकते थे. लेकिन इस बार अमित शाह ने इस डर को खत्म करने की ठान ली थी. इस मुद्दे को उन्होंने सीधे तौर पर संबोधित किया. उन्होंने मतदाताओं को आश्वस्त किया कि बिना किसी डर के मतदान करें. केंद्रीय बलों की प्रत्यक्ष तैनाती तब तक रहेगी जब तक जरूरत होगी,. इससे जनता में यह विश्वास पैदा करने में मदद मिली कि वे बिना किसी संभावित खतरे के चुनाव में भागीदारी कर सकते हैं. ग्राउन्ड पर काम कर रहे भाजपा कार्यकर्ताओं को भी बल मिला कि उनका नेतृत्व हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा है. इससे पार्टी को जमीनी स्तर पर काम करना औरआसान हो गया.

बीजेपी के सामने सत्ता-विरोधी मुद्दों की कमी नहीं थी. तृणमूल भ्रष्टाचार, घुसपैठ, महिला सुरक्षा और रोजगार के मुद्दे पर बैक फुट पर थी. बीजेपी ने अपने प्रचार का फोकस भी इन्हीं मुद्दों पर केंद्रित रखा और टीएमसी को भी इन्हीं मुद्दे पर घेरे रखने में सफलता भी पाई. सत्ताधारी पार्टी इससे बौखलाहट की शिकार हो गई. अंत में सांस्कृतिक प्रतीकवाद का मुद्दा उछालना शुरू किया, पर यहाँ भी अमित शाह ने अपने राष्ट्रवादी एजेंडे को स्थानीय बंगाली भावनाओं के साथ जोड़ दिया और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान को असली बंगाली अस्मिता की पहचान के रूप में प्रस्तुत किया.

चुनाव परिणाम बताते हैं कि अमित शाह ने बीजेपी के जनाधार को उत्तरी बंगाल के जलपाईगुड़ी और कूच बिहार से लेकर दक्षिण बंगाल तक फैलाने में बड़ी भूमिका निभाई. दोनों चरणों के मतदान में 91 प्रतिशत से अधिक भागीदारी के साथ, यह स्पष्ट था कि अधिक लोग मतदान करने के लिए आगे आ रहे थे, और बीजेपी के पक्ष में वोट डाल रहे थे. 4 मई 2026 को बीजेपी के पक्ष में जो राजनीतिक लहर देखने को मिली, उसके बड़े सूत्रधार अमित शाह रहे.

विज्ञापन
विक्रम उपाध्याय

लेखक के बारे में

By विक्रम उपाध्याय

विक्रम उपाध्याय is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola