बिना काम प्रोन्नति नहीं
Updated at : 28 Jul 2016 6:46 AM (IST)
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सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए संशोधित वेतनमान की अधिसूचना जारी हो गयी है. आशा के अनुरूप केंद्रीय कर्मियों को बढ़ा हुआ वेतन और पेंशन आनेवाले अगस्त महीने से मिलने लगेगा. अगले साल के 31 मार्च तक एरियर भी मिल जाने की उम्मीद है, जिसकी गिनती जनवरी 2016 से की जायेगी. […]
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सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए संशोधित वेतनमान की अधिसूचना जारी हो गयी है. आशा के अनुरूप केंद्रीय कर्मियों को बढ़ा हुआ वेतन और पेंशन आनेवाले अगस्त महीने से मिलने लगेगा. अगले साल के 31 मार्च तक एरियर भी मिल जाने की उम्मीद है, जिसकी गिनती जनवरी 2016 से की जायेगी. बढ़ा हुआ वेतन अपने साथ बढ़ी हुई जिम्मेवारी भी ले आया है.
लोगों में लगातार यह धारणा बनी चली आ रही है कि सरकारी विभागों में कामकाज कम मात्रा में और सुस्त रफ्तार से होता है. अच्छी बात यह है कि केंद्र सरकार ने लोगों की इस धारणा का ख्याल रखा है और निर्णय लिया है कि जिन कर्मचारियों का काम अपेक्षा के अनुरूप नहीं पाया गया, उनका वार्षिक अप्रेजल या इंक्रीमेंट नहीं होगा. इसी के अनुकूल कर्मचारियों की प्रोन्नति और सालाना वेतन-वृद्धि के बेंचमार्क का दर्जा ऊंचा करते हुए ‘अच्छा’ की जगह ‘बहुत अच्छा’ कर दिया गया है.
उम्मीद यही बंधती है कि ऐसे उपायों से केंद्रीय कर्मियों में अपने काम के प्रति जवाबदेही की भावना बढ़ेगी और वे जिम्मेवारी को समय से निभाने के अपने कर्तव्य के प्रति पहले की तुलना में ज्यादा गंभीर होंगे. बहरहाल, प्रोन्नति और सालाना वेतन वृद्धि को एक हद तक कार्य-निष्पादन की मात्रा और गति से जोड़ने के सरकार के नये फैसले कहां तक सफल होंगे इसका ठीक-ठीक उत्तर भविष्य ही दे पायेगा. सरकारी कामकाज एक विराट तंत्र के भीतर संपन्न होता है.
इस तंत्र के भीतर कर्तव्य-भावना और ईमानदारी के लिहाज से ही नहीं मातहत और उच्च पदस्थ के साथ अपने संबंध-समीकरणों के मामले में भी अलग-अलग लोग होते हैं. अक्सर अपने निजी संबंध-समीकरणों के कारण कुछ कर्मचारी हमेशा ही अपने आला अफसर के गुडबुक में होते हैं, जबकि कुछ पर्याप्त मेहनती होने के बावजूद अकारण कोपभाजन बनते हैं. इसलिए अप्रेजल की पूरी प्रणाली को वस्तुनिष्ठ बनाना भी बहुत महत्वपूर्ण है. फिर विभागों में होनेवाला काम बहुत हद तक कर्मचारियों-अधिकारियों के कामकाज के परिवेश और जरूरी सुविधाओं पर भी निर्भर करता है.
कामकाज के लिए जरूरी भौतिक ढांचे में किसी किस्म की कमी हो, तो इसे कर्मचारियों की सुस्ती या कर्तव्य-भावना में दोष बता कर नहीं ढका जाना चाहिए. मिसाल के लिए, इ-गवर्नेंस के वक्त में बेहतर कंप्यूटर, तेज गति के इंटरनेट और बिजली की मौजूदगी किसी काम के लिए जरूरी पूर्व-आवश्यकता है.
इन जरूरी सुविधाओं में थोड़ी-सी भी कमी कर्मचारी या विभाग के कामकाज में बाधा पैदा करेगी. इसलिए सालाना वेतनवृद्धि या प्रोन्नति में रोक का निर्णय तभी कारगर कहलायेगा, जब कामकाज की मात्रा और गति को निर्धारित करनेवाले तमाम पहलुओं पर सोच-विचार कर कोई व्यवस्था अमल में लायी जाये.
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