विचारों को क्रियात्मकता का जोड़

Updated at : 22 Jul 2016 5:36 AM (IST)
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विचारों को क्रियात्मकता का जोड़

युवाओं में आज सोशल मीडिया का बहुत आकर्षण है. देश-दुनिया में कोई भी घटना हो जाती है, तब सोशल मीडिया पर उसकी खबर नहीं पहुंचे, ऐसा होना असंभव है. आज की युवा पीढ़ी किसी भी प्रश्न पर सिर्फ सोशल मीडिया से ही चर्चा करती है. सिर्फ पोस्ट भेज कर किसी भी प्रश्न का समाधान कैसे […]

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युवाओं में आज सोशल मीडिया का बहुत आकर्षण है. देश-दुनिया में कोई भी घटना हो जाती है, तब सोशल मीडिया पर उसकी खबर नहीं पहुंचे, ऐसा होना असंभव है. आज की युवा पीढ़ी किसी भी प्रश्न पर सिर्फ सोशल मीडिया से ही चर्चा करती है. सिर्फ पोस्ट भेज कर किसी भी प्रश्न का समाधान कैसे हो सकता है?
सभी चीजें पोस्ट भेज कर बदली नहीं जा सकतीं. कुछ बातों के लिए सड़क पर उतर कर संवैधानिक मार्ग से जाहिर संघर्ष करना पड़ता है. युवा यह समझें कि समाज में परिवर्तन लाने के लिए विचारों को क्रियात्मकता का जोड़ देना जरूरी है.
उर्वी मुलम, ई-मेल से
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