लोकतंत्र या परिवार तंत्र

Updated at : 21 Jul 2016 5:30 AM (IST)
विज्ञापन
लोकतंत्र या परिवार तंत्र

यह भारतीय राजनीति की विडंबना ही है कि इस लोकतंत्र में कुछ राजनीतिक दलों को छोड़कर अधिकांश का सर्वोच्च पद पूरी तरह से परिवार विशेष के लिए आरक्षित है, जो आनुवंशिक भी है. जिन दलों में सर्वोच्च पद आरक्षित नहीं भी हैं, वो भी परिवारवादी मानसिकता के संक्रमण से मुक्ति का दावा नहीं कर सकते़ […]

विज्ञापन

यह भारतीय राजनीति की विडंबना ही है कि इस लोकतंत्र में कुछ राजनीतिक दलों को छोड़कर अधिकांश का सर्वोच्च पद पूरी तरह से परिवार विशेष के लिए आरक्षित है, जो आनुवंशिक भी है.

जिन दलों में सर्वोच्च पद आरक्षित नहीं भी हैं, वो भी परिवारवादी मानसिकता के संक्रमण से मुक्ति का दावा नहीं कर सकते़ हाल ही में झारखंड विधानसभा उपचुनाव ने वंशवाद को और मजबूती प्रदान की़ झारखंड में तो स्थिति और बदतर तब हो जाती है, जब किसी सांसद, विधायक या मंत्री के घरवालों का ट्रांसफर, पोस्टिंग और प्रोजेक्ट संबंधी अनुशंसा में सीधा दखल होता है. कमोबेश यही स्थिति देश भर में व्याप्त है, जो इस लोकतंत्र को परिवार तंत्र बनाने की राह पर है.

ऋषिकेश दुबे, पलामू

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola