अवसरवादी राजनीति

पिछले दिनों आदिवासी-मूलवासी और स्थानीय नीति को लेकर पूर्व मंत्री देवदयाल कुशवाहा की प्रेस वार्ता पढ़ने को मिली. इसमें उन्होंने स्थानीय नीति के विरोध में राज्य के कुशवाहा समाज को संगठित होने का आह्वान किया. यह सब पढ़ कर मैं सोचने को मजबूर हो गया कि ये कैसे नेता हैं, जो चुनाव के दिनों में […]
पिछले दिनों आदिवासी-मूलवासी और स्थानीय नीति को लेकर पूर्व मंत्री देवदयाल कुशवाहा की प्रेस वार्ता पढ़ने को मिली. इसमें उन्होंने स्थानीय नीति के विरोध में राज्य के कुशवाहा समाज को संगठित होने का आह्वान किया.
यह सब पढ़ कर मैं सोचने को मजबूर हो गया कि ये कैसे नेता हैं, जो चुनाव के दिनों में वोट पाने के लिए बाहरी और भीतरी के सारे भेद मिटा देते हैं, लेकिन जब राजनीति करने का अवसर देखते हैं, तो आंदोलनकारी बन जाते हैं! समाज को ऐसे नेताओं से सावधान रहने की जरूरत है.
अशोक कुशवाहा, मटवारी, हजारीबाग
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