महिला सशक्तीकरण
Updated at : 21 Jan 2016 1:24 AM (IST)
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साल 2006 में जब देश में पहली बार बिहार में नीतीश सरकार ने पंचायतों व नगर निकायों में महिलाओं के लिए आधी सीटें आरक्षित की थीं, तब महिला सशक्तीकरण की दिशा में इसे एक प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा था. लेकिन, करीब एक दशक बाद इस बदलाव का असर राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में साफ […]
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साल 2006 में जब देश में पहली बार बिहार में नीतीश सरकार ने पंचायतों व नगर निकायों में महिलाओं के लिए आधी सीटें आरक्षित की थीं, तब महिला सशक्तीकरण की दिशा में इसे एक प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा था. लेकिन, करीब एक दशक बाद इस बदलाव का असर राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में साफ तौर पर देखा जा सकता है.
पंचायतों व निकायों में आरक्षण ने महिलाओं में चेतना जगायी और उन्हें नेतृत्वकारी भूमिका में खड़ा किया. कई सामाजिक बुराइयों पर चोट के लिए महिलाएं खुद ही आगे आ रही हैं. बाद में बिहार से सबक लेते हुए 14 अन्य राज्यों ने पंचायतों व निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान लागू किया. अब बिहार ने महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है. राज्य सरकार की नौकरियों में 35 फीसदी पद महिलाओं के लिए आरक्षित किये गये हैं.
इसमें महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि पहले से आरक्षण का जो कोटा तय है, उसी में महिलाओं के अलग से आरक्षण होगा. यानी जिसकी जैसी आबादी होगी, उसी अनुपात में नौकरियों में उसकी हिस्सेदारी भी होगी. महिलाओं के लिए शिक्षकों की नियुक्ति में पचास प्रतिशत पद और पुलिस बल में 35 फीसदी आरक्षण का प्रावधान पहले से राज्य में लागू है. महिला सशक्तीकरण पर राज्य नीति बनानेवाला बिहार पहला राज्य है, जिसका मूल मंत्र यह सुनिश्चित करना है कि संसाधनों तक महिलाओं की पहुंच बने और हर क्षेत्र में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो, ताकि वे मुख्यधारा के विकास में हिस्सा लें.
विकास प्रक्रिया में हिस्सेदार बनने के साथ उन्हें इसका लाभ भी मिले. सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए आरक्षण के प्रावधान का बिहार जैसे पिछड़े राज्य के लिए खासा महत्व है, जहां सदियों की सामाजिक प्रथाओं और सांस्कृतिक परंपराओं से उपजी हुई विशिष्ट किस्म की लैंगिक असमानता है. इससे न केवल महिलाओं को स्वतंत्र आर्थिक आधार मिलेगा, बल्कि संगठित क्षेत्र में स्त्री-पुरुष श्रम अनुपात भी दुरुस्त होगा.
दुनिया की जानी-मानी कंसलटेंसी फर्म मैकिंजी द्वारा हाल ही में जारी इंडिया फीमेल एम्पॉवरमेंट इंडेक्स के मुताबिक, कामकाजी उम्र के लिहाज से बिहार में 32 फीसदी महिलाएं हैं, लेकिन उनकी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पाता है. इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर हम स्त्री-पुरुष भेदभाव को खत्म कर दें, तो अर्थव्यवस्था को बहुत फायदा होगा. महिला सशक्तीकरण की दिशा में बिहार के चौतरफा प्रयास का असर अगले कुछ सालों में नजर आयेगा.
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