दहेज के खिलाफ सामूहिक विवाह जरूरी

Updated at : 21 Jan 2016 1:21 AM (IST)
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दहेज के खिलाफ सामूहिक विवाह जरूरी

देश में दहेज प्रथा आज भी विकराल रूप धारण किये हुए है. इस कुप्रथा की वजह से भारतीय समाज में आज भी कई प्रकार की घरेलू हिंसा को अंजाम दिया जाता है और लड़कियां उसकी शिकार होती हैं. गरीब परिवार में तो जन्म के समय से ही लड़कियां अभिशाप मानी जाती हैं. इसीलिए उन्हें अपने […]

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देश में दहेज प्रथा आज भी विकराल रूप धारण किये हुए है. इस कुप्रथा की वजह से भारतीय समाज में आज भी कई प्रकार की घरेलू हिंसा को अंजाम दिया जाता है और लड़कियां उसकी शिकार होती हैं. गरीब परिवार में तो जन्म के समय से ही लड़कियां अभिशाप मानी जाती हैं. इसीलिए उन्हें अपने अभिभावकों के घर से लेकर ससुराल तक उपेक्षा का शिकार होना पड़ता है. हमारे शहर धनबाद में इस दहेज प्रथा को मात देने के लिए सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया.
झारखंड के इस छोटे से शहर में इस प्रकार के सामाजिक समारोहों का आयोजन का पहल किया जाना एक सराहनीय कदम है. यह सच है कि आज के जमाने में सामूहिक विवाह दहेज प्रथा के खिलाफ अमोघ अस्त्र के समान है और समाज के हर परिवार को इस अस्त्र का इस्तेमाल करना चाहिए. झारखंड में भी लोगों को इस प्रकार के समारोहों के आयोजन के लिए आगे बढ़ कर पहल करनी चाहिए.
-मो नौशाद आलम, जीतपुर, धनबाद.
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