भ्रष्टाचार आज एक ऐसा शब्द बन गया है जिससे हर कोई अवगत है और कहीं न कहीं अपने जीवन में उसका सामना कर रहा है. चाहे वह एक स्कूल जाने वाला छात्र हो या फिर दुकान से खरीददारी करने वाली गृहिणी या फिर आम आदमी.
बचपन से ही हमें हमारे बुजुर्गो से यह संस्कार मिला है कि ईमानदारी से बढ़ कर कोई चीज नहीं होती और ईमानदारी से किये गये कार्य में कभी असफलता नहीं मिलती. लेकिन आज समय का पहिया कुछ विपरीत घूम रहा है, भ्रष्टाचारी लोगों की तादाद निरंतर बढ़ रही है और इसके कारण ईमानदार लोगों को बड़ी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है. पर जिस तरह रात हो जाने से सूर्य का प्रकाश कम नहीं हो जाता, उसी तरह ईमानदार व्यक्तिव के प्रकाश और लोगों में उनके प्रति आदर में कमी नहीं आ सकती.
आज सफलता का मापदंड भले ही ईमानदारी न हो, पर यह बात सभी जानते हैं कि निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी से हासिल की गयी सफलता के पीछे कितना तप और त्याग छिपा होता है. दुर्भाग्य से आज लोग सिर्फ सफल होना चाहते हैं. आज हमारे आसपास में ऐसे कई उदाहरण मिल जायेंगे, जिसमें सफलता के शिखर पर पहुंचने पर भी उनकी सफलता भ्रष्टाचार के कारण ध्वस्त हो गयी.
यह सर्वत्र सिद्ध है कि भ्रष्टाचारी कितना ही बलशाली और सफल क्यों न हो जाये, समाज में सिर ऊंचा करके नहीं चल सकता. समाज हमेशा इन्हें ओछी नजरों से देखता है. वहीं ईमानदार चरित्र वाला इनसान हर जगह प्रतिष्ठा और सम्मान पाता है. आज समाज और अपने आसपास का वातावरण इस तरह का हो गया है, जिसमें लोग सफलता के पीछे पागल हुए जा रहे हैं. उन्हें किसी भी तरह सफलता चाहिए. लेकिन ऐसी सफलता कितने दिनों तक टिकेगी?
देव कुमार वर्मा, धनबाद