तितली उड़ी, उड़ जो चली

Published at :20 Nov 2013 4:27 AM (IST)
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तितली उड़ी, उड़ जो चली

।। चंचल।।(सामाजिक कार्यकर्ता)गरज यह कि यहां हर कोइ हलकान, परेशान है. उसके पास साइकिल है तो वह उसकी परेशानी है कि उसका टायर क्यों नहीं नया है और घंटी बोलती तो है, लेकिन मसूद की घंटी की तरह उसकी आवाज नहीं निकलती. रामलाल तेली की दिक्कत कत्तई दूसरी है कि उसके माल में उतना मुनाफा […]

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।। चंचल।।
(सामाजिक कार्यकर्ता)
गरज यह कि यहां हर कोइ हलकान, परेशान है. उसके पास साइकिल है तो वह उसकी परेशानी है कि उसका टायर क्यों नहीं नया है और घंटी बोलती तो है, लेकिन मसूद की घंटी की तरह उसकी आवाज नहीं निकलती. रामलाल तेली की दिक्कत कत्तई दूसरी है कि उसके माल में उतना मुनाफा नहीं होता जितना कि बहादुर कर ले जाता है . तुर्रा यह कि ये सारी दिक्कतें, परेशानियां किसी न किसी तरह से चौराहे पर आ जाती हैं और जेरे बहस हो जाती हैं. आज एक नयी परेशानी आयी है. लाल्साहेब का लड़िका बम्मई पलट हुआ है और उसकी बात बढ़ गयी है .

वह यहां रहते -रहते यहां से गायब भी हो जाता है और ऐसी जुबान बोलने लगता है जो सलीमा के परदे पर सुना जाता है बाकी तो कहीं और नहीं . और यह खबर चौराहे पर आ गयी. लानेवाला कोइ और नहीं खुद लाल्साहेब हैं. उनकी एक आदत है कोइ भी बड़ी खबर खोलने से पहले लाल्साहेब बीड़ी जलायेंगे. जला हुआ हिस्सा मुंह में डाल कर जोरदार धुंआ निकालेंगे. फिर बीड़ी को सीधा करेंगे और आंखें गोल कर के जनता जनार्दन का मुआयना करेंगे. इसके बाद अपनी बात बोलेंगे. उनकी भूमिका यहां से शुरू हुई-जमाना खराब होना शुरू हो गया है, चीजें फटाफट बदल रही हैं कल तक लोग लोग बात करते थे तो तौल कर और बात हो जाती है तो लोग दौड़ते हैं तराजू लेकर. अपने काम का छांट लीजिए बाद बाकी वहीं छोड़ दीजिए . ..कयूम से नहीं रहा गया.

कितना लपेटते. सो उन्होंने टोका. क्या हुआ भाई जरा हमें भी तो बताया जाय . .लाल्साहेब ने इधर उधर देखा, जैसे कोइ गुप्त बात बता रहे हों – हुआ यह कि इस बार जब से तन्नुआ बम्मई कमा के लौटा है उसकी बात बढ़ गयी है. कह रहा है कि जमीन बेचो, घर बेचो. भैंस और बकरी बेचो. पैसा लगाओ, पैसा कमाओ. चलो फिल्म में घुसो बाकी सब खलास . उमर दरजी ने पेंच ढीला किया-अगर फिल्म की बात है तो तब फिर क्या पूछना, अपने भी गांव का नाम रोशन होगा..नाम तो कई लोग इसके पहले ही रोशन कर चुके हैं . सतनारायण मिसिर जब सधुआये औ लगे प्रबचन करने तो कहां-कहां से लोग नहीं आते रहे. देखते देखते पूरी बाजार सज गयी. और जब साधू पकड़ाया तो पूछ मत. वो भी रोशन हुआ था. नवल उपाधिया ने दोनों हाथ जोड़ कर सतनारायण मिसिर को याद किया . लेकिन चिखुरी की चिंता दूसरी रही. चुनांचे उन्होंने लाल्साहेब से पूछा-हुआ क्या है, उसे पूरी बात तो बताओ. हुआ यह है लाल्साहेब ने बोलना शुरू किया. वह एक मौनी चिवड़ा और टटका गुड़ ले कर ङोलगां में लेट जायगा. उसे चबाता रहेगा, गुड़ खाता रहेगा फिर अचानक रु क जायगा और सामने पेड़ की फुनगी देखने लगेगा. फिर अचानक जोर से उठेगा और धनुष की तरह तन जायगा. फिर ? फिर क्या लगेगा गाना गाने . तितली उड़ी .

उड़ जो चली. फिर ? फिर बोलेगा ठायं? ठायं . नगाड़े की पहलकी चोट अनारकली के मौत का पगां बनेगी..नहीं महराज यह मत करो. यही होगा.यह हमारे साहेब का फरमान है .और यह फिल्म चलेगी. बात अभी चल ही रही थी कि तन्नू आता हुआ दिखाई पड़ा, बिलकुल पैंतरा भाजते हुए. आया और उसे देख कर लाल्साहेब खिसक लिए. चिखुरी ने तन्नू को बुलाया प्यार से बिठाया और बोले-क्या बनाओगे बेटा, फिल्म का नाम क्या होगा. फिल का नाम होगा-साहेब का गुलाम और बीवी हलकान. उमर दरजी से नहीं रहा गया-ओ हमने तो यह देखी है. लखी सराय में . न जाओ सैंया . अबे उमर वह दूसरी थी यह दूसरी है . इसमें क्या है तन्नू बाबू ? यह एक जासूसी फिल्म है. इंसमे एक गुलाम है. गुलाम का ऐ साहेब है. गुलाम वही करता है जो गुलाम लोग करते आये हैं. एक दिन एक तितली साहेब की नजर के सामने आ जाती है. बस साहब का दिल आ जा ता है. यहां गाने हैं मार दिया जाय कि कत्ल किया जाय की तर्ज पर अचानक तितली उड़ जाती है. वह कहां गयी, कहां बैठी? इस कहानी का खेल यही है.

गुलाम के कारकून ने खबर दी कि तितली एक डाल पर बैठी है. गुलाम कारकून से कहता है डाल को तोड़ दो. और फिर नया गाना . चिखुरी ने पूछा और यह साहेब कौन हैं? लीजिए यही तो खेल है इस फिल्म का. साहेब की खोज ही तो फिल्म को चलायेगी. एक फिल्म थी वह कौन थी. एक फिल्म यह होगी वह कौन है / इस लिए हम पिताजी को बोल रहे हैं सब बेचो. चलो बनाते हैं फिल्म – नवल से नहीं रहा गया – वह चलेगी फिल्म ? तन्नो ताव खा गया – क्यों नहीं चलेगी ? नहीं चलेगी तो उसे राजनीति में डाल देंगे .. – राजनीति में ? कई आंखे एक साथ गोल हो गयीं. लोगों ने देखा कि तन्नू तन कर जा रहा है . नगाड़े की पहली चोट अनारकली.

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