प्रचार संग जमीन पर बदलाव जरूरी

Published at :19 Nov 2013 2:58 AM (IST)
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प्रचार संग जमीन पर बदलाव जरूरी

दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में झारखंड पवेलियन में राज्य के ‘समग्र विकास’ को प्रदर्शित किया गया है. यहां समग्र विकास के मायने क्या हैं, यह झारखंड सरकार ही जान सकती है. जिस राज्य में भ्रष्टाचार का बोलबाला हो, सरकार ढीलीढाली हो, जनता की आमदनी दूसरे राज्यों की तुलना में […]

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दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में झारखंड पवेलियन में राज्य के ‘समग्र विकास’ को प्रदर्शित किया गया है. यहां समग्र विकास के मायने क्या हैं, यह झारखंड सरकार ही जान सकती है.

जिस राज्य में भ्रष्टाचार का बोलबाला हो, सरकार ढीलीढाली हो, जनता की आमदनी दूसरे राज्यों की तुलना में लगातार कम हो रही हो, जहां की संस्कृति-विरासत खतरे में हो, वहां की सरकार अगर समग्र विकास का दावा करे, तो यह मजाक ही लगता है. प्रगति मैदान की इस प्रदर्शनी से किसको लुभाया जा रहा है? राज्य गठन के बाद कई बड़ी-बड़ी कंपनियों के साथ एमओयू हुए, लेकिन एकाध को छोड़ कर अधिकतर ने बीच रास्ते में ही रिश्ते तोड़ लिये.

कई कंपनियों ने यहां की सरकार के साथ इसलिए एमओयू किये, क्योंकि उनकी नजरें यहां की खनिज संपदा पर टिकी थीं. उद्योग को बढ़ावा देने की सरकार की कोशिश भी कभी आगे नहीं बढ़ पायी. कभी भूमि संबंधी विवाद, तो कभी स्पष्ट नीति का अभाव आड़े आया. हस्तशिल्प को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में झारक्राफ्ट के जरिये कुछ काम हुआ है. पर यह पर्याप्त नहीं है.

इसके लिए कहीं-न-कहीं सरकार दोषी है. हां, झारखंड में खनिज संपदा की प्रचुरता है. लेकिन इसका लाभ सिर्फ पूंजीपतियों को मिल रहा है, आम जनता को नहीं. राज्य को भी खनन क्षेत्र से ज्यादा आमदनी नहीं हो रही है. इसके अलावा कला व पर्यटन के क्षेत्र में झारखंड को अभी बहुत कुछ करना बाकी है.

राज्य सरकार को प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यहां के दर्शनीय स्थलों को संवारना होगा. सरकार को राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना चाहिए. बिजली, सुरक्षा व जमीन संबंधी नीतियों को स्पष्ट करना चाहिए. भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में हरेक राज्य का पवेलियन वहां की झांकी प्रस्तुत करता है. झारखंड का पवेलियन भी निश्चित तौर पर लोगों को लुभायेगा.

अब सरकार को अपनी कला व संस्कृति के प्रचार-प्रसार पर खास ध्यान देने की जरूरत है. इससे झारखंड की छवि अंतरराष्ट्रीय फलक पर सुधरेगी. दूसरे देशों के लोग भी यहां आना चाहेंगे. मार्केटिंग पर ध्यान देना जरूरी है, लेकिन उतना ही आवश्यक है जमीनी हालात बदलना.

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