पिचगीरी नुकसानदेह

Updated at : 28 Nov 2015 1:10 AM (IST)
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पिचगीरी नुकसानदेह

भारत ने नागपुर में तीसरे टेस्ट मैच में तीसरे दिन ही दक्षिण अफ्रीका को 124 रनों से पराजित कर मौजूदा सीरीज में निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है. स्पिनरों आर आश्विन और अमित मिश्रा की घूमती-छकाती गेंदों के सामने दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज टिक नहीं सके. सीरीज की यह विजय इसलिए भी उल्लेखनीय है कि यह […]

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भारत ने नागपुर में तीसरे टेस्ट मैच में तीसरे दिन ही दक्षिण अफ्रीका को 124 रनों से पराजित कर मौजूदा सीरीज में निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है. स्पिनरों आर आश्विन और अमित मिश्रा की घूमती-छकाती गेंदों के सामने दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज टिक नहीं सके. सीरीज की यह विजय इसलिए भी उल्लेखनीय है कि यह घरेलू मैदान पर बतौर कैप्टन विराट कोहली की पहली जीत है और इस हार के साथ दक्षिण अफ्रीका का विदेशी मैदानों पर अविजित रहने का नौ साल का सिलसिला टूट गया. हालांकि खेल में जीत-हार होती रहती है और यह भी सही है कि खिलाड़ियों, आयोजकों तथा दर्शकों के लिए निर्णय का बहुत महत्व होता है, परंतु खेल का दायरा इनसे बड़ा है.

इसलिए जीत के इस माहौल में टीम को बधाइयां देने के साथ कुछ सवालों पर चर्चा करना जरूरी है. क्रिकेट नियमों में टीमों को अपनी पसंद और क्षमता के मुताबिक पिचें तैयार करने का अधिकार है. इसलिए तकनीकी तौर पर भारतीय क्रिकेट प्रबंधकों को नागपुर में स्पिनरों के अनुकूल पिच तैयार करने के लिए गलत नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन यह जरूर सोचा जाना चाहिए कि क्या ऐसा करना क्रिकेट, टीम और दर्शकों के प्रति उचित है. जीत-हार की चिंता से जुड़ा पिच का मामला इतना गंभीर है कि भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य अधिकारी और पूर्व कप्तान रवि शास्त्री ने कुछ दिन पहले मुंबई के पिच क्यूरेटर के साथ झगड़ा तक कर लिया था. हमें ध्यान रखना होगा कि खेल खिलाड़ियों की क्षमता का प्रदर्शन होता है और दर्शक उस प्रदर्शन से आनंद प्राप्त करता है.

नागपुर में पांच दिनों के बेहतरीन खेल की उम्मीद कर रहे दर्शकों को निश्चित रूप से निराशा हुई होगी. खेल के किसी एक पक्ष के हिसाब से पिच बनाये जाने से कई खिलाड़ियों को अपना हुनर दिखाने का मौका नहीं मिला. यह रवैया भारतीय टीम के विदेशी पिचों पर बेहतर खेल दिखाने में भी बाधक बनता है, क्योंकि वहां ऐसी पिचें नहीं बनती. साथ ही, विदेशी पिचों पर अच्छा खेलनेवाले खिलाड़ियों को देश में खुद को मांजने का पूरा मौका नहीं मिलता. दुनिया की बड़ी टीम वही मानी जाती है, जिसका प्रदर्शन विदेशी धरती पर बेहतर होता है. लेकिन, पिछले सालों में भारतीय टीम का विदेशों में प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है. इसलिए क्रिकेट बोर्ड को चाहिए कि खासकर टेस्ट क्रिकेट के लिए ऐसी पिचें तैयार कराएं, जिन पर पांच दिनों में तेज गेंदबाजी, अच्छी बल्लेबाजी और स्पिन के जादू के लिए संतुलित मौके उपलब्ध हों. इससे खेल भी रोमांचक होगा और खिलाड़ियों के कौशल में भी सुधार होगा.

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